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क्या हममें हर्ड इम्यूनिटी आ गई है?

कोरोना जरुर पढ़ें

क्या हममें हर्ड इम्यूनिटी आ गई है?

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ख़बर का सार

  • निजी जांच लैब Thyrocare ने की स्टडी
  • 2.7 लाख लोगों का serological test
  • 26% सैंपल में मिला एंटीबडी
  • दिसंबर तक 40% आबादी में एंटीबडी होने की संभावना

देश में रोजाना संक्रमण के मामले 70 हजार के करीब सामने आ रहे हैं। अगस्त के पहले 20 दिनों में दुनिया में सबसे ज्यादा  कोरोना के 12 लाख नए मामले भारत में आए हैं, जबकि कुल संक्रमण का आंकड़ा 30 लाख के पास है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि देश में कोरोना के कुल कितने मामले हो सकते हैं, जिनके बारे में हम अब तक नहीं जानते हैं।

थाइरोकेयर की स्टडी का अनुमान है कि देश में 26%यानी हर चार मे से एक …करीब 33 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं।

क्या है सेरो सर्वे ?

sero survey

सेरो सर्वे एक ब्लड टेस्ट है जिसे खून में  IgG antibodies का पता चलता है। ये एंटीबडी खून में संक्रमण होने के करीब दो हफ्ते बाद बनना शुरू होता है। इस टेस्ट से पता चलता है कि ये शख्स क्या कोरोना से पहले संक्रमित हुआ और फिर ठीक हो गया है?

स्टडी के मायने

देश में चार मे से एक व्यक्ति को कोरोना हो चुका है। मतलब ये कि मौजूदा संक्रमण 30 लाख से सौ गुना ज्यादा करीब 33 करोड़ लोग हैं जिन्हें कोरोना हुआ लेकिन उन्हें पता भी न चला, न इलाज की जरूरत पड़ी और वो ठीक भी हो चुके हैं।

ये जांच हर एज ग्रुप में की गई, लिहाजा अनुमान है कि एंटीबडी सिर्फ युवाओं में ही नहीं, बच्चों और बूढ़ों में भी बन रही है।

इसके पहले बीते महीने कंपनी ने 53हजार सैंपल टेस्ट किए थे। तब एंटीबडी का आंकड़ा करीब 15% था।

सेरो सर्वे से हमें क्या पता चलता है?

इसका फायदा ये है कि अब इम्यून लोगों की पहचान कर उन्हें कोरोना के खिलाफ जंग में फ्रंटलाइन वर्कर से लेकर सार्वजनिक महत्व के बाकी कामों में लगाया जा सकता है।

इस टेस्ट से सरकार को ये समझने में मदद मिलती है कि शहर के किस इलाके में छूट दी जाए और कहां सख्ती की जाए। जिस इलाके में बड़ी तादाद में लोगों में एंटीबडी मिलेगा, वहां ज्यादा गतिविधियों की इजाजत दी जा सकती है।

शहरों में जो इलाके बीते दो महीनों में हॉटस्पॉट बने हुए थे, वहां नॉन हॉट स्पॉट एरिया के मुकाबले ज्यादा तादाद में लोगों में एंटीबडी मिल रहा है। ये राहत वाली खबर है।

गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीजों के लिए अभी सबसे कामयाब प्लाज्मा थेरेपी माना जा रहा है। एंटीबडी टेस्ट करवा कर पाजिटिव आए लोग प्लाजमा डोनेशन के लिए आगे आएँगे।

सेरो टेस्ट में SPR- seropositivity rate दिल्ली और न्यूयार्क दोनों का एक जैसा 23 से 25%है, लेकिन दिल्ली के मुकाबले न्यूयार्क में ज्यादा लोगों की मौत हुई। इस तरह सेरो टेस्ट को IFR यानी संक्रमण से हुई मौत के आंकड़े से मिलान करने से हमें पता चला है कि न्यूयार्क में कोरोना का संक्रमण दिल्ली के मुकाबले दस गुना और लंदन में मुंबई के मुकाबले तीन गुना ज्यादा जानलेवा था।

कब, कहां सेरो टेस्ट ?

 

  1. पुणे में 4000 सैंपल के टेस्ट में 17% में एंटीबड़ी मिला

 

  • मुंबई में 9590 सैंपल के टेस्ट में 24.3% में एंटीबड़ी मिला

 

संक्रमण के ज्यादा मामले अब तक महाराष्ट्र और मुंबई से आए हैं, लेकिन दिल्ली में हुए सेरो टेस्ट से पता चला कि यहां करीब 25% लोगों में एंटीबडी हो सकता है। 21,387  लोगों के NCDC यानी National Centre for Disease Control के सेरो टेस्ट में 23.48% और निजी लैब थायरोकेयर के टेस्ट में दिल्ली के 25.10% आबादी में एंटीबडी होने की संभावना जताई गई।

 

दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो सेरो सर्वे में स्पेन में 5%, टोक्यो में 0.1%, कैलिफोर्निया में 02- 4.5%, न्यूयार्क में 6.7% और लंदन में 17% एंटीबॉडी मिलने की बात कही गई।

क्या हम herd immunity के करीब हैं?

एक महीने में एंटीबडी के आंकड़े का 15% से 26% तक पहुंचने के बाद ये अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले चार महीने में यानी दिसंबर तक देश की 40% आबादी में एंडीबडी डेवलप हो जाएगी। HIT यानी Herd Immunity Threshold के लिए ये आंकड़ा कम से कम 60%( अगर R-nought- average number of people that an infected person can pass on the infection  to be 02 – 03)  होना चाहिए, जो इस साल के आखिर तक होता नजर नहीं आ रहा।  दिल्ली, चेन्नई या मुंबई जैसे बड़े शहर अगर हर्ड इम्यूनिटी हासिल भी कर लें तो इससे छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लोग नए संक्रमण से महफूज नहीं हो जाते।  

 

साइंटिस्ट कह रहे हैं कि SARS-CoV-1 का एंडीबडी शरीर में दो से तीन साल तक रहता था, जबकि कोविड19 यानी SARS-CoV-2 का एंटीबडी सिर्फ दो से तीन महीने ही शरीर में रहता है। ऐसे में हर्ड इम्यूनिटी का क्या मतलब रह जाता है ये भी समझने की जरूरत है। कुछ वायरोलॉजिस्ट ये भी कह रहे हैं कि जो एंटीबडी B lymphocytes के जरिए खून में बनती है उससे शरीर को जरूरी सुरक्षा हासिल नहीं होती। इम्यूनिटी के मामले में शायद ज्यादा बड़ी भूमिका thymus-derived T lymphocytes की है जो cellular immunity दिलाने का काम करते हैं।

सेरो टेस्ट कोरोना के खिलाफ जंग में काफी अहम साबित हो सकता है। जरूरी है कि साइंस के इस काम को अहमदाबाद सी सियासत से बचाया जाए।

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