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LAC पर चीन से लड़ने के लिए सेना ने मांगे ये खास रडार, जानें खासियत

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LAC पर चीन से लड़ने के लिए सेना ने मांगे ये खास रडार, जानें खासियत

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एलएसी पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना ने खुद को लो लेवल लाइटवेट रडार (एलएलएलडब्ल्यूआर) से लैस करने की मांग की है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, भारतीय सैन्य अधिकारी ने बताया कि एलएसी पर पहाड़ी इलाकों के कारण निगरानी करना संभव नहीं है। इसका फायदा उठाकर दुश्मन के हेलीकॉप्टर, ड्रोन आसानी से भारतीय सीमा पर प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए भारतीय सेना को एलएलएलडब्ल्यूआर से लैस किए जाने की आवश्यकता है। 

सेना द्वारा जिन रडार की मांग की गई है, वे मेक इन इंडिया (Make in India) प्रोजेक्ट की लिस्ट में शामिल हैं. इसके जरिए भारतीय सेना (Indian Army) ने रक्षा उद्योग के साथ साझेदारी कर आगे बढ़ाने की योजना बनाई है. इस लिस्ट को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) द्वारा सोमवार को जारी किया गया. इसमें सर्विलांस और आर्म्ड ड्रोन स्वार्म, काउंटर ड्रोन सिस्टम, इन्फ्रैंट्री वेपन्स ट्रेनिंग सिम्युलेटर, रोबोटिक्स सर्विलांस प्लेटफॉर्म, पोर्टेबल हेलिपैड्स और कई तरीके के हथियार शामिल हैं. सेना एक 3डी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिक स्कैन एरे रडार चाहती है, जिसमें एयर डिफेंस हथियारों के सामरिक नियंत्रण के साथ 50 किमी की रेंज हो.

इस सूची में निगरानी और सशस्त्र ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम, पैदल सेना हथियार, रोबोटिक निगरानी प्लेटफॉर्म, पोर्टेबल हेलीपैड्स और गोला-बारूद भी शामिल है। चीन के साथ भारत का उत्तरी और पूर्वी सीमाओं तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस तनाव के कारण पिछले 18 महीने से दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर डटी हुई हैं। कई बार सैन्य वार्ताओं का भी कोई नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में इस दुर्गम क्षेत्र को चीन से और सुरक्षित करने के लिए सेना को लो लेवल लाइटवेट रडार की आवश्यकता है। सेना को ऐसा रडार चाहिए 50 किमी की सीमा पर वायु रक्षा हथियारों का सामरिक नियंत्रण भी रखता हो। सरकार ने 209 ऐसी रक्षा वस्तुओं की सूची जारी की है, जिनके आयाता पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। एलएलएलडब्ल्यूआर भी उनमें से एक है। 

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हवाई टारगेट का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए उच्च ऊंचाई वाले मैदानों और पहाड़ों में जमीनी निगरानी के लिए अश्लेषा एमके I (Aslesha Mk I) नामक एक LLLWR को तैयार किया है. अधिकारियों ने कहा कि भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने अश्लेषा रडार को अपने बेडे़ में शामिल कर लिया है, लेकिन सेना ने इसे ऑर्डर नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि इसकी जरूरतें काफी अलग थीं. अधिकारियों ने कहा कि चीन सीमा पर गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए LLLWR की तत्काल जरूरत है.

Army asked for this special radar to fight China on LAC, know the specialty

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