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बा-“बरी”!

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बा-“बरी”!

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#BabriDemolitionCase:ayodhya rally

एक दिन अचानक….बाबरी मस्जिद गिर पड़ी

जिस मामले में अयोध्या के डीएम, यूपी के सीएम और देश के पीएम पर अपने फर्ज को अंजाम नहीं देने की बात कही गई….28 साल पुराने #BabriDemolitionCase… बाबरी मस्जिद गिराए जाने के उस मामले में लखनऊ की विशेष अदालत ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि ये घटना पूर्व नियोजित नहीं थी…अचानक हुई थी। ये पहली बार है कि जिस घटना को देश की सबसे बड़ी अदालत…. सुप्रीम कोर्ट ने अपराध माना, उसमें देश की सबसे छोटी अदालत ने एक या दो नहीं सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मस्जिद गिराए जाने की जिस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में आडवाणी, जोशी, भारती जैसे नेताओं पर आपराधिक पडयंत्र के इल्जाम को बहाल किया था, उसे भी विशेष अदालत ने पूर्व नियोजित न मानकर स्वत:स्फूर्त माना। अदालत ने माना कि अराजक तत्वों ने इस घटना को अंजाम दिया, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक षडयंत्र की दफा लगाने को कहा था वो आरोपी तो दरअसल भीड़ को रोक रहे थे।  ये भी एक नया इतिहास ही होगा कि एक ही मामले में किसी व्यक्ति को एक ही कोर्ट से दो-दो बार रिहाई मिले। मई 2001 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आडवाणी, जोशी, बाल ठाकरे समेत कई नेताओं पर मुकदमा रद्द कर दिया था, बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दोबारा मामला चला और अंतत: विशेष अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष सबूत जुटाने में नाकाम रहा। अदालत के फैसले से देश की सबसे अहम जांच एजेंसी के तौर पर सीबीआई की साख कम हुई है। अदालत ने कहा कि सीबीआई ने अदालत में जो तस्वीरें सौंपी, उनकी निगेटिव नहीं दी, इसी तरह घटना के साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए वीडियो की भी मूल प्रति अदालत को नहीं दी गई।

तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद मामले में सीबीआई की भूमिका पर कड़ी नराजगी जताई थी –जस्टिस नरीमन ने कहा था –

 “in the present case, crimes that shake the secular fabric of the constitution have allegedly been committed almost 25 years ago. The accused persons have not been brought to book largely because of the conduct of the CBI in not pursuing the prosecution of the aforesaid alleged offenders in a joint trial, and because of technical defects which were easily curable, but which were not cured by the Uttar Pradesh government.”

बोफोर्स, जैन हवाला, 2G घोटाला, आरुषि मर्डर और बेल्लारी खान मामले की तरह ही सीबीआई एक बार फिर आरोपियों को सजा दिलाने में नाकाम रही। अदालत के फैसले से 17 साल तक चली लिब्रहान कमीशन की जांच पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिसमें 68 लोगों को गुनहगार करार दिया गया था और इस घटना के पीछे साजिश होना कबूल किया गया था।

सवाल मीडिया की विश्वसनीयता पर भी है। 6दिसंबर 1992 ..रविवार के दिन ..ज्यादातर अखबारों ने खबर दी थी कि विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर लाख से ज्यादा कारसेवक अयोध्या में हैं और वो बाबरी मस्जिद के बगल में पूजा करना चाहते हैं।
 Times Of India की headline थी  ‘2.25 lakh VHP volunteers are poised to perform prayers right next to the Babri Masjid’

तो क्या मीडिया भूलवश… अराजक तत्वों को वीएचपी के कार्यकर्ता बता रहा था ?

करन थापर को दिए इंटरव्यू में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने भी कबूल किया था कि ये घटना स्वत:स्फूर्त नहीं थी, इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया था।

तो क्या लिब्रहान कमीशन और देश के प्रधानमंत्री से घटना का सच समझने में चूक हुई?

आम तौर पर फैसला सुनाए जाते वक्त आरोपियों का अदालत में रहना जरूरी होता है लेकिन जिस केस ने देश की राजनीति में बीजेपी को बड़ी जमीन दी, आडवाणी, लालू और मुलायम को बड़ा नेता बनाया …उस हाईप्रोफाइल केस के छह आरोपी …जिसमें एक पूर्व उप प्रधानमंत्री, एक तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष और एक पूर्व कैबिनेट मंत्री थे… अदालत का फैसला सुनने के लिए पेश नहीं हुए। हालांकि फैसला आने के फौरन बाद उनका स्वास्थ्य इतना बेहतर हो गया कि उन्होंने प्रेस से बात की…जय श्री राम का नारा लगाया ।  वैसे आडवाणी के बयान  …बहुत समय बाद अच्छा समाचार मिला …में एक सवाल भी छिपा है कि जिस  राम मंदिर के लिए उन्होंने रथयात्रा निकाली, 28 साल मुकदमा झेला, बीते पांच अगस्त को उसके भूमि पूजन को क्या वो अच्छा समाचार में नहीं गिनते?

अदालत के फैसले से जहां राम मंदिर का अध्याय खत्म होता नजर आ रहा है, वहीं काशी और मथुरा को लेकर नए सवाल भी सामने आए हैं

एक बड़ा सवाल मुस्लिम समुदाय की चिंताओं को लेकर भी है।

 बीते साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद, उन्हें उम्मीद थी कि विशेष अदालत आरोपियों को सजा सुनाएगी। अब जबकि ऐसा नहीं हुआ है तब ये और भी ज्यादा जरूरी है कि उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाने वाले बयान की राजनीति बंद हो और 1991 के केंद्र सरकार के उस फैसले का  सम्मान किया जाए जिसमें देश भर के तमाम पूजा स्थलों की यथास्थिति बनाए रखने का संकल्प लिया गया था।

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