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केरल में जगह-जगह दिखाई जा रही 2002 दंगों पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री

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केरल में जगह-जगह दिखाई जा रही 2002 दंगों पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री

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गुजरात दंगों पर बने बीबीसी के विवादास्पद वृत्तचित्र को वाम समर्थक स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) सहित विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने पूरे केरल में दिखाया. उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पश्चिमी राज्य के मुख्यमंत्री थे. वृत्तचित्र को दिखाए जाने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा शाखा ने प्रदर्शन किया. बीबीसी का वृत्तचित्र ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ को मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शित किया गया.

बीबीसी का यह वृत्तचित्र दो भाग में है, जिसमें दावा किया गया है कि यह 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित कुछ पहलुओं की पड़ताल पर आधारित है. 2002 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे. प्रदर्शन के विरोध में भाजपा के युवा मोर्चा ने प्रदर्शन किया. भाजपा को अप्रत्याशित रूप से कई हलकों से समर्थन मिला, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ए .के एंटनी के बेटे अनिल ने वृत्तचित्र प्रदर्शित किए जाने के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की.

पलक्कड़ में विक्टोरिया कॉलेज और एर्नाकुलम में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज तक युवा मोर्चा द्वारा प्रदर्शन मार्च निकाला गया, जहां एसएफआई ने वृत्तचित्र के प्रदर्शन की घोषणा की थी. दोनों जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने और किसी भी प्रकार के संघर्ष को टालने के लिए हस्तक्षेप किया. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम के कुछ और कॉलेजों में वृत्तचित्र दिखाए जाने की उम्मीद है. केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की युवा शाखा डीवाईएफआई ने कहा कि वह न केवल केरल में बल्कि पूरे भारत में वृत्तचित्र का प्रदर्शन करेगी.

डीवाईएफआई के राज्य सचिव वीके सनोज ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्र सरकार इसे छिपाने का प्रयास कर रही है लेकिन इसके बावजूद इसे जनता को दिखाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वृत्तचित्र के प्रदर्शन के बारे में कुछ भी ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ नहीं है क्योंकि इसे प्रतिबंधित नहीं किया गया है. सनोज ने कहा कि राज्य या देश में संघर्ष का माहौल बनाने में डीवाईएफआई की कोई दिलचस्पी नहीं है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल ने राज्य में जारी राजनीतिक तूफान में स्पष्ट रूप से भाजपा का समर्थन करते हुए कहा कि ब्रिटिश प्रसारक बीबीसी के विचारों को भारतीय संस्थानों पर तरजीह देना, देश की संप्रभुता को ‘‘कमजोर’’ करेगा.

अनिल एंटनी पार्टी की केरल इकाई के डिजिटल संचार का जिम्मा संभाल चुके हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा के साथ बड़े मतभेदों के बावजूद मुझे लगता है कि (भारत में) वे उस बीबीसी के विचारों को थोप रहे हैं जिस सरकार प्रायोजित चैनल का (कथित भारत विरोधी) पूर्वाग्रहों का लंबा इतिहास रहा है, वे इराक युद्ध के पीछे का दिमाग रहे जैक स्ट्रॉ का समर्थन कर (भारतीय) संस्थानों पर एक खतरनाक मिसाल कायम कर रहे हैं, हमारी संप्रभुता को कमजोर कर रहे हैं.’’ स्ट्रॉ 2002 में तत्कालीन ब्रिटिश विदेश मंत्री थे. इससे पहले दिन में केरल में विभिन्न राजनीतिक समूहों ने घोषणा की कि वे वृत्तचित्र का प्रदर्शन करेंगे, जिसके बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से हस्तक्षेप करने और इस तरह के प्रयासों पर रोक लगाने का आग्रह किया.

माकपा की युवा शाखा डीवाईएफआई ने अपने फेसबुक पेज पर वृत्तचित्र को केरल में प्रदर्शित किए जाने की घोषणा करके राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया. इसके बाद माकपा से संबद्ध वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) की विभिन्न शाखाओं, जिसमें यूथ कांग्रेस भी शामिल है, ने घोषणा की कि वे राज्य में वृत्तचित्र का प्रदर्शन करेंगे.

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने भी कहा कि गणतंत्र दिवस पर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया जाएगा. भाजपा ने इस तरह के कदम को ‘‘देशद्रोह’’ करार दिया और केरल के मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने और इस तरह के प्रयासों को रोकने की मांग की. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने विजयन से शिकायत कर मांग की कि राज्य में वृत्तचित्र के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाए.

अपनी शिकायत में सुरेंद्रन ने कहा कि वृत्तचित्र का प्रदर्शन देश की एकता और अखंडता को खतरे में डालने के विदेशी कदमों को माफ करने के समान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि दो दशक पहले हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को फिर से दोहराने का उद्देश्य ‘‘धार्मिक तनाव को बढ़ावा देना’’ है. केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने भी मुख्यमंत्री से वृत्तचित्र के प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया और मामले में उनसे तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. मुरलीधरन ने फेसबुक पर लिखा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किए गए आरोपों को फिर से पेश करना देश की सर्वोच्च अदालत की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने जैसा है. मुरलीधरन और सुरेंद्रन दोनों ने वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग को ‘‘ राजद्रोह ’’ करार दिया.

एसएफआई ने इससे पहले दिन में फेसबुक पर अपने पोस्ट में कहा था कि राज्य के विभिन्न कॉलेज परिसरों में वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया जाएगा. कांग्रेस की राज्य की युवा शाखा के अध्यक्ष शफी परम्बिल ने फेसबुक पर लिखा कि विश्वासघात और नरसंहार की यादों को सत्ता के दम पर छुपाया नहीं जा सकता और बीबीसी का वृत्तचित्र केरल में दिखाया जाएगा. केपीसीसी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता शिहाबुद्दीन करयात ने एक बयान में कहा कि देश में इस पर अघोषित प्रतिबंध के मद्देनजर गणतंत्र दिवस पर पार्टी के जिला मुख्यालयों में वृत्तचित्र दिखाया जाएगा. केंद्र ने वृत्तचित्र के कई यूट्यूब वीडियो और उसके लिंक साझा करने वाले ट्विटर पोस्ट को ‘ब्लॉक’ करने का निर्देश दिया है.

सरकार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ट्विटर और यूट्यूब को ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ नामक वृत्तचित्र के लिंक ब्लॉक करने का निर्देश दिया था. विदेश मंत्रालय ने वृत्तचित्र को ‘‘दुष्प्रचार का हिस्सा’’ बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि इसमें निष्पक्षता का अभाव है तथा यह एक औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है. हालांकि, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने वृत्तचित्र तक पहुंचने के सभी लिंक ‘ब्लॉक’ करने का गत शुक्रवार को निर्देश जारी किया था. इस बीच वृत्तचित्र श्रृंखला की शनिवार को 302 पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व नौकरशाहों और पूर्व सैन्य अधिकारियों के समूह ने निंदा की तथा कहा कि यह ‘‘हमारे नेता, साथी भारतीय एवं एक देशभक्त’’ के खिलाफ पक्षपातपूर्ण आरोपपत्र है, जो नकारात्मकता और पूर्वाग्रह से भरा है.’’

BBC documentary on 2002 riots being shown at various places in Kerala

Asit Mandal

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