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Bihar..बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन को Delhi High Court से मिला पैरोल

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Bihar..बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन को Delhi High Court से मिला पैरोल

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Bihar..दो भाइयों के निर्मम हत्‍या के मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे शहाबुद्दीन को Delhi High Court ने राहत दी है। अपने परिजनों से मुलाकात के लिए उन्हें सशर्त पैरोल दिया गया है।

Bihar..Delhi High Court ने शहाबुद्दीन को 6 घंटे की सशर्त कस्टडी पैरोल की अनुमति दी है। Laloo yadav के करीबी और दबंग राजनेता मोहम्मद शहाबुद्दीन फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। Patna High Court के 30 अगस्त, 2017 को दिए फैसले पर Supreme Court ने मुहर लगाई थी। शहाबुद्दीन को ये सजा 2004 में हुए दोहरे कत्ल के मामले में सुनाई गई थी ।

वर्ष 2004 में शहाबुद्दीन और उसके गुर्गों ने रंगदारी नहीं देने पर सीवान के प्रतापपुर गांव में चंदा बाबू के दो बेटों सतीश और गिरीश रौशन को तेजाब डालकर जिंदा जला दिया था. । इस केस में शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जेल मैनुएल के उल्लंघन के मामले में Supreme Court के आदेश पर शहाबुद्दीन को साल 2018 में Bihar की सीवान जेल से दिल्‍ली की तिहाड़ जेल में स्‍थानांतरित किया गया था ।

Bihar के इस बाहुबली के पिता शेख मोहमद हसीबुल्लाह की 19 सितंबर को मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही पैरोल को लेकर प्रयास किया जा रहा था। इस बीच पिता की मौत के बाद मां के बीमार होने के आधार पर शहाबुद्​दीन ने कस्टडी पैरोल की मांग की थी । कोर्ट ने शहाबुद्​दीन 30 दिनों के भीतर अपनी इच्छानुसार कोई भी तीन तारीख चुनने का आदेश दिया। तारीख के चयन के बाद Delhi High Court ने शहाबुद्दीन को छह घंटे की सशर्त ‘कस्टडी पैरोल’की अनुमति दे दी ।

न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को किसी भी तीन दिन में छह-छह घंटे की कस्टडी पैरोल की अनुमति देते हुए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के निर्देश दिए है । साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि कस्टडी पैरोल के लिए शहाबुद्दीन को मुलाकात के लिए दिल्ली में ही एक स्थान की जानकारी पहले ही जेल अधीक्षक को देनी होगा। साथ हीं उक्त स्थान का सत्यापन करने के साथ ही राज्य पुलिस वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करेगी ।

नियमों के अनुसार शहाबुद्दीन को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे के तक अपनों से घंटे के लिए मुलाकात करने की अनुमति होगी। इन छह घंटों में यात्रा समय भी शामिल होगा । हालांकि याचिककर्ता इस दौरान अपनी मां, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के अलावा किसी और से मुलाकात नहीं कर सकेगें ।

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