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#BiharElection2020: क्या नीतीश का जाना तय हो गया है?

जरुर पढ़ें बिहार चुनाव

#BiharElection2020: क्या नीतीश का जाना तय हो गया है?

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बिहार (#BiharElection2020 ) में दो दौर का चुनाव हो चुका है। दूसरे दौर के चुनाव में ईवीएम का जिन्न छपरा में प्रकट हुआ। यहां कुछ लोगों का कहना था कि वो वोट आरजेडी को दे रहे थे, लेकिन जा बीजेपी को रहा था, वो भी एक के बदले पांच।

यूट्यूब पर इस वीडियो को 11 लाख से ज्यादा लोग अब तक देख चुके हैं।

दूसरी चर्चित तस्वीर है मधुबनी के हरलाखी की, जहां जनसभा को संबोधित करने पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कुछ अराजक तत्वों ने प्याज फेंका। अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे नीतीश को फौरन सुरक्षा बलों ने घेर लिया। घटना से आहत नीतीश की पहली प्रतिक्रिया थी ….फेंको…फेंको…और फेंको …लेकिन थोड़ी देर में उन्होंने अपने क्रोध पर नियंत्रण पा लिया और लोगों से कहा कि इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

कुछ दिन पहले इसी तरह छपरा मे परसा एसेंबली सीट में लालू प्रसाद के समधी चंद्रिका राय के प्रचार के लिए जब मुख्यमंत्री आए थे, तब वहां कुछ लोगों ने लालू प्रसाद के समर्थन में नारे लगाए थे। जाहिर है 15 साल का एंटीइनकमबैंसी नीतीश के खिलाफ नजर आ रहा है। वहीं चिराग पासवान की सभा में भारी भीड़ उमड़ रही है।

खगड़िया में वोट डालने के बाद ANI से बात करते हुए चिराग ने ऐलान किया

मैं आप सब को लिखित में यह बात दे सकता हूं कि नीतीश कभी भी दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे

मंगलवार को तेजस्वी की रैलियों में भी भारी भीड़ नजर आई।

आलमनगर की तस्वीर

त्रिवेणीगंज की तस्वीर

दो दौर की वोटिंग खत्म होने तक 6 बातें सामने आई हैं

  1. बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ताओं में आपसी तालमेल की कमी नजर आ रही है। ये कमी उन 28 सीटों पर नजर आई, जहां मुकाबला सीधे तौर पर बीजेपी बनाम आरजेडी है, यही स्थिति उन 24 सीटों पर भी नजर आई जहां मुकाबला जेडीयू बनाम आरजेडी  (जैसे – हथुआ में जदयू मंत्री रामसेवक सिंह Vs  राजेश कुशवाहा राजद ) है।
  2. ये कमी साफ तौर पर उन सीटों पर नजर आई है जहां पार्टी के बागी निर्दलीय या एलजेपी के टिकट पर खड़े हैं।
  3. कुशवाहा फैक्टर एनडीए को 15 से 20 सीटों पर मुश्किल में डाल रहा है
  4.  मुस्लिम वोटर पंद्रह साल और तीन चुनाव बाद एकमुश्त तौर पर जेडीयू के खिलाफ और आरजेडी के साथ नजर आ रहा है
  5. आरजेडी को एहसास हो रहा है कि उसने कांग्रेस को कम से कम बीस सीटें ज्यादा दे दीं, जो उसे अपने पास रखनी चाहिए थी।
  6. पहले दौर के चुनाव में गठबंधन स्वीप करती नजर आ रही है। दूसरे दौर में मोदी के प्रचार का फायदा बीजेपी को हुआ है, लेकिन ये दौर फिफ्टी-फिफ्टी का रहा है।

तीसरे दौर की 78 सीटों पर अब सबकी नजर है। इस दौर में 25 सीटों के साथ जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी है। बीजेपी 20, आरजेडी 18 और कांग्रेस के खाते में 10 सीटें। ऐसा लग रहा है कि कुशवाहा फैक्टर और सीमांचल का मुस्लिम वोट अब तय करेगा कि नीतीश कुमार अगली बार मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं।

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