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कोयला और बिजली संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

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कोयला और बिजली संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

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ऊर्जा संकट को कम करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों की सभी मांगों को पूरा कर रही है. पिछले चार दिनों में कोयले का स्टॉक बढ़ने लगा है. सरकारी सूत्र का कहना है कि एक माह में स्थिति सामान्य हो जाएगी. दैनिक बिजली और कोयले की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है. वहीं, संकट को कम करने के लिए, केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने राज्यों को एक्सचेंज पर उच्च कीमतों पर बिजली नहीं बेचने से लेकर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में बिजली उत्पादक को आदेश देने तक के निर्देश जारी किए हैं.

सरकारी सूत्रों ने बताया कि कोयला मंत्रालय जनवरी से कोल इंडिया (Coal India) से स्टॉक लेने के लिए राज्यों को लिख रहा है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. कोल इंडिया एक सीमा तक ही स्टॉक कर सकता है क्योंकि ओवरस्टॉकिंग से कोयले में आग लग सकती है. झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में अपनी कोयला खदानें हैं लेकिन, खनन बहुत कम या बिल्कुल नहीं है.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन को लेकर समीक्षा बैठक की. सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान कोयले के परिवहन को बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई. कोयला मंत्रालय को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कहा गया है, जबकि रेलवे को बिजली संयंत्रों तक ईंधन पहुंचाने के लिए रेक उपलब्ध कराने को कहा गया है. कोयले की कमी के कारण राजस्थान से लेकर केरल में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है.

वहीं, देश में बिजली संकट के बीच रेलवे ने भी बड़ा कदम उठाया है. अब पावर प्लांट को कोयला पहुंचाने के लिए 24 घंटे ट्रेन चल रही हैं. राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने कोयले की इस कमी को आपातकाल घोषित कर दिया है. सभी जोनल रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चौबीसों घंटे संचालन नियंत्रण कक्षों (Operational control rooms) को तैयार करें.

Central government’s big decision between coal and power crisis

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