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चीन अब तिब्बत के लोगों को जबरन सेना में कर रहा भर्ती!

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चीन अब तिब्बत के लोगों को जबरन सेना में कर रहा भर्ती!

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वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) में लगातार मिल रही नाकामयाबी और परेशानी के बाद अब चीन नयी चाल चलने की फिराक में है. चीन ने तिब्बत के लिए एक खास कानून निकाला है. जिसके अंतर्गत भारत के साथ लगते तिब्बत के इलाके में रहने वाले लोगों के हर घर से 18 से 40 साल तक के उम्र के एक व्यक्ति को चीनी मिलिशिया में शामिल होना जरूरी है. वैसे दुनिया के कई देश ऐसे हैं जिनमें सेना में भर्ती होना अनिवार्य है. चीन भी उन्हीं देशों में से एक है.

लेकिन 1949 के बाद से इस अनिवार्यता को लागू नहीं किया और उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये थी कि चीन के युवा अपनी मर्ज़ी से और स्वेच्छा से सेना में शामिल हो रहे थे. जिससे चीनी पीएलए की जरूरत पूरी हो रही थी. हालांकि 18 साल के उम्र के बाद चीन के हर युवा को अपना रजिस्ट्रेशन मिलिट्री सर्विसेज के लिए करना होता है लेकिन फौज में शामिल होना अब जरूरी नहीं है. लेकिन, अब चीन ने फिर से सेना में शामिल होना अनिवार्य कर दिया है. लेकिन ये अनिवार्यता चीनी नागरिकों के लिए नहीं बल्कि तिब्बत के लोगों पर जबरन थोप रहा है.

फिलहाल डोक्लाम के पास चुंबी वैली में भारी संख्‍या में लोगों की भर्ती का काम जारी है. सूत्रों के मुताबिक, इसी साल अगस्त से भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है. अभी तक कुल 400 युवाओं की भर्ती की योजना पर काम हो रहा है. इस भर्ती के बाद सभी युवाओं को एक साल के लिए ल्हासा के पास ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके बाद इन्हें भारत चीन बॉर्डर एलएसी (LAC) पर तैनात किया जाएगा. चीनी सेना तिब्बत के पठार में ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकती. इसलिए तिब्‍बल के युवा विषम परिस्थितियों पर चीनी सेना की तरफ से बेहतर तरीके से लड़ सकते हैं.

पैंगाग के दक्षिण छोर पर भारतीय स्पेशल फ़्रंटियर फोर्स के कब्जे के बाद से ही चीन ने तिब्बतियों की मिलीशा फोर्स तैयार करने में तेजी लाई है. इससे पहले पूर्वी लद्दाख के दूसरी ओर नागरी से भी इसी साल जुलाई में ऐसी ही भर्ती की गई. चीन ने तिब्बतियों को चीनी आर्मी में शामिल करने का फैसला कई कारणों को ध्यान में रखकर लिया है. इनमें सबसे पहला कारण हिमालय का बेहद सर्द और कठोर मौसम है. जिसे PLA के सैनिक झेल नहीं पा रहे हैं. जबकि तिब्बती इसी इलाके के निवासी होने के कारण इस मौसम के अभ्यस्त होते हैं और आसानी से कहीं भी चढ़ जाते हैं.

दूसरा कारण चीन पर बढ़ रहे इंटरनेशनल प्रेशर को कम करना है. तिब्बतियों को अपनी सेना में शामिल करके भारत के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन चलवाने की भी योजना है. इस योजना में अगर तिब्बती सैनिक मारे जाते हैं तो चीन आसानी से दुनिया को कह सकेगा कि तिब्बती अपनी मातृभूमि चीन को बचाने के लिए शहीद हुए हैं.

China is now forcibly recruiting the people of Tibet into the army!

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