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App की कसम

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App की कसम

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जैसे शतरंज का एक खिलाड़ी वजीर, ऊंट और घोड़े की सीधी, उल्टी, तिरछी चाल चलता है, कुछ उसी तरह चीन ने भारत के मोबाइल एप की दुनिया में तीन साल पहले दस्तक दी और धीरे-धीरे इसके हर वर्टिकल या यूं कहें कि आधे भू-भाग पर कब्जा कर लिया।

2017 की शुरूआत में भारत के टॉप 100 एप में सिर्फ SHAREit, UCBrowser और mobile legends जैसे गिनती के ही चीनी एप शामिल थे, लेकिन 2018 खत्म होते-होते इस लिस्ट में 40 चीनी एप शामिल हो चुके थे।

  • सोशल कन्टेंट एप : Helo, SHAREit;
  • एंटरटेनमेंट एप : TikTok, LIKE, Kwai;
  • वेब ब्राउजर : UCBrowser/UCBrowser Mini
  • लाइव स्ट्रीमिंग : LiveMe, Bigo Live, Vigo Video;
  • यूटीलिटी : BeautyPlus, Xender, Cam Scanner;
  • गेमिंग: PUBG, Clash of Kings, Mobile Legends;
  • शॉपिंग : ClubFactory, SHEIN, ROMWE

अगर सरकार 59 एप पर बैन कर इस रफ्तार पर रोक न लगाती, तो अगले दो साल में टॉप 100 में 90 से ज्यादा एप चीनी ही होते। भारतीय OTT की सीमा में चीनी एप की तैनाती को इकोनॉमी के नजरिए से समझिए।

2019 में एक बड़ी घटना हुई जिस पर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया। पांच साल पुरानी एक इंडस्ट्री 106 साल पुरानी इंडस्ट्री से आगे निकल गई। भारत में डिजीटल स्ट्रीमिंग या OTT अब इंडियन सिनेमा से आगे निकल चुकी है। Ernst & Young के मुताबिक OTT में भारत इस साल चीन को पीछे छोड़कर अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। KPMG के मुताबिक अगले तीन साल तक ये सेक्टर दुनिया में सबसे तेज…. सालाना 45%  की रफ्तार से बढ़ने वाला है.. Boston Consulting Group ने इस पर एक रिपार्ट बनाई है- Entertainment Goes Online’। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रूरल इंडिया में मोबाइल पर इंटरनेट एक्सेस और डाटा की भूख ने OTTकी दुनिया में एक लहर पैदा कर दी है, जिसने सारी दुनिया को हैरान कर दिया है।

आपने बीते तीन साल में भारत के डिजिटल बाजार पर कब्जा करने की चीनी रणनीति को समझा, अब ये जानिए कि भारत सरकार के फैसले के बाद चीन क्या कह रहा है ?

चीन की जनता में बेरोजगारी और महंगाई को लेकर पैदा आक्रोश को कम करने के लिए चीनी प्रेसीडेंट शी जिनपिंग के गवर्नेंस को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया जा रहा है।

एप बैन को लेकर चीन के ग्लोबल टाइम्स का कहना है

Chinese enterprises that have investments in or intend to explore the Indian market should be very cautious of erratic nationalism, and carry out a comprehensive assessment before putting their investments in the country. The same scenario also applies to foreign investments from other countries or regions if they cannot guarantee a permanent amicable relationship with India.

यानी सरकार के इस फैसले से भारत में चीनी निवेश और स्टार्ट अप कंपनियों पर फर्क पड़ेगा।

ग्लोबल टाइम्स ने एक भारतीय मोबाइल मैन्यफैक्चरर के हवाले से कहा है कि चीनी सामान के बायकॉट की अपील का असर हुआ है और चीनी मोबाइल कंपनियों की बिक्री तेजी से गिर रही है।

चीनी मीडिया का अनुमान है कि जिस तरह भारत सरकार एक के बाद एक सख्त फैसले ले रही है उसके नतीजे में भारत चीन व्यापार में इस साल 30% और अगले साल 50% कमी आ सकती है।

India bans 59 mostly Chinese apps amid border crisis

चीनी टीवी न्यूज चैनल CGTN ने बैन की घटना को 2017 के डोकलाम विवाद के बाद भारतीय सैनिकों द्वारा चीनी एप्स को अनइंस्टॉल किए जाने से जोड़ा है।

चीनी मीडिया इस बात से राहत महसूस कर रहा है कि अब तक भारत सरकार ने गेमिंग की सबसे मशहूर एप PUBG पर रोक नहीं लगाया है। 7 जुलाई को इसका नया वर्सन 0.19.0 रिलीज हो रहा है जिसमें पहली बार PUBG Mobile exclusive Map, Livik भी शामिल होगा।

भारत में गेमिंग के शौकीन mobile legends पर लगे बैन से शॉक्ड हैं। टिकटॉक स्टार्स की तरह कई प्लेयर्स इन्हीं गेम्स में अपना करियर बनाते हैं।

इसके अलावा दूसरा बेहद मशहूर चाइनीज गेमिंग एप Garena Free Fire भी भारत में बैन नहीं किया गया है।

फैसले का चीनी कंपनियों पर क्या असर होगा ?

चीन ने बहुत सारे एप खास तौर पर भारतीय यूजर के लिए लोकल लैंग्वेज कन्टेंट एप बनाए थे। हेलो, लाइकी जैसे ये एप इंडियन यूजर के न होने से जल्द ही गूगल प्ले स्टोर से गुम हो सकते हैं। टिकटॉक जैसे एप पर पहले ही यूरोप और अमेरिका में डाटा प्राइवेसी को लेकर जांच चल रही है। अब इसके IPO की फन्डिंग प्रभावित होगी और बाजार में इसकी कीमत कम हो जाएगी। यही हाल कमोबेश सभी 59 एप्स का होगा।

क्या Weibo की एक चूक की वजह से बैन हुए 59 एप ?

चंद रोज पहले चीन में ट्विटर की नकल पर बने एप Weibo ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान को डिलीट कर दिया था जो उन्होंने मुख्यमंत्रियों से हुई बातचीत के बाद दिया था। इसी तरह भारत-चीन सीमा विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय के बयान को भी Weibo ने डिलीट कर दिया था।

4मई 2015 को Weibo से जुड़ने के बाद प्रधानमंत्री इसी प्लेटफार्म के जरिए चीन से संवाद करते थे। चार साल से Weibo पर ही वो प्रेसीडेंट शी जिनपिंग को जन्म दिन की बधाई देते थे। अब Weibo भी 59 एप में शामिल है जिन्हें बैन कर दिया गया है।

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