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पीएम को पाती, पक्षपात का प्रश्न!

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पीएम को पाती, पक्षपात का प्रश्न!

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को शिकायती चिट्ठी भेजी है। इसमें कोविड-19 की वजह से राज्य में उत्पन्न कई गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान खींचने की कोशिश की गई है। सीएम के सबसे बड़ी शिकायत ये है कि उनके राज्य को केन्द्र सरकार के नियमों का सख्ती से पालन करने की सज़ा भुगतनी पड़ रही है। इन्होंने अपनी चिट्ठी में मुखय तौर पर दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों और मजदूरों की वापसी का मुद्दा उठाया है।

पीएम को लिखी चिट्ठी के कुछ अहम बिंदु

  • पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बोलनेवाले मुख्यमंत्रियों में झारखंड के मुख्यमंत्री का नाम शामिल नहीं था। जबकि एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर झारखंड को भी अपनी बात रखने का मौका देने का अनुरोध किया गया था।
  • झारखंड सरकार ने कोरोना के नियंत्रण हेतु, गृह मंत्रालय द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत समय-समय निर्गत किये गए आदेशों का अक्षरश: अनुपालन करते हुए ठोस कार्रवाई की है। लेकिन मीडिया के जरिए मिली जानकारी से पता चलता है कि अन्य राज्यों द्वारा इन आदेशों का घोर उल्लंघन करते हुए प्रतिदिन कई कार्रवाई की जा रही है।
  • गृह मंत्रालय द्वारा  दिनांक 15 अप्रैल 2020 को जारी आदेश में लिखा है कि 3 मई 2020 तक व्यक्तियों का इंटर-स्टेट आवागमन मना है। इस आदेश का उल्लंघन डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत आपराधिक माना जाएगा। फिर भी कुछ राज्य आपसी सहमति से बड़े पैमाने पर छात्रों का इंटर-स्टेट आवागमन करवा रहे हैं। जबकि गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा करने के लिए कोई रियायत नहीं दिया गया है ।
  • भारत सरकार के निर्देशों के विपरीत की गई कार्रवाई सिर्फ इस आधार पर बाध्य नहीं हो सकती कि यह कार्य संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री की आपसी सहमति से किए गए हैं। ऐसे राज्यों से केंद्र सरकार द्वारा किसी प्रकार का स्पष्टीकरण पूछे जाने या डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत इनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई किए जाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
  • इस वजह से प्रदेश के जनमानस में ऐसी धारणा बन रही है कि इन राज्यों को भारत सरकार के गृह मंत्रालय की मौन सहमति प्राप्त है।
  • झारखंड के 5 हजार से ज्यादा बच्चे कोटा और देश के अन्य शहरों में फंसे हुए हैं। साथ ही लगभग 5 लाख से अधिक झारखंड के प्रवासी मजदूर अपने राज्य वापस आने के लिए बार-बार गुहार लगा रहे हैं। बच्चों के अभिभावक, मजदूरों के रिश्तेदारों, जनप्रतिनिधियों तथा अन्य बुद्धिजीवियों द्वारा, अन्य राज्यों की तरह हमारे बच्चों तथा मजदूरों को वापस लाने की व्यवस्था करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परंतु भारत सरकार के आदेश के सम्मान के कारण झारखंड सरकार ऐसा करने में अपने आप को असमर्थ महसूस कर  रही है।
  • विशेष तौर पर झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में उभर रहे आक्रोश को देखते हुए प्रधानमंत्री गृह मंत्रालय को निर्देश दें कि इन राज्यों में फंसे बच्चों को वापस लाने के लिए आदेश जारी करें, ताकि केंद्र सरकार के सहयोग से वैधानिक रूप से इस कार्य को पूरा किया जा सके।
  • जिन राज्यों द्वारा इस कार्य को बिना केंद्र के आदेश के किया जा रहा है, उन राज्यों के वरीय पदाधिकारियों को भविष्य में न्यायालयों में अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे पदाधिकारियों का मनोबल गिरेगा तथा प्रशासन पर इसका कुप्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
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