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कोरोना सूंघने वाला कुत्ता?

कोरोना दुनिया

कोरोना सूंघने वाला कुत्ता?

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तेरी मेहरबानियां जैसी फिल्मों में हम वफादार कुत्ते को देखते आए हैं। मालिक की जान बचाने वाला कुत्ता, बदला लेने वाला कुत्ता, ड्रग्स सूंघने वाला कुत्ता, बारूद सूंघने वाला कुत्ता…

लेकिन क्या आप जानते हैं किसी एसिम्टोमैटिक मरीज को सूंघ कर कोरोना का पता लगा सकता है कुत्ता?

और ये किसी फिल्म की कहानी नहीं है…

कोरोना सूंघने वाला कुत्ता कहां तैयार हो रहा है?

यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के स्कूल ऑफ वेटरिनरी मेडिसीन (Penn Vet) में कुत्तों के सूंघने की ताकत को बेहतर तौर पर समझने की कोशिश हो रही है, ताकि इसका इस्तेमाल कोरोना मरीजों की पहचान में की जा सके। पहले स्टेज में कोरोना की गंध को समझने की कोशिश हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो जाता है, तब अगर उसमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं, यानी वो एसिम्टोमैटिक है तब भी उसके शरीर से एक खास तरह की गंध निकलती है जिसका दूसरे इनसानों को तो पता नहीं चलता, लेकिन कुत्ते इसका पता लगा सकते हैं। इस प्रोग्राम में फिलहाल 8 कुत्तों को ट्रेनिंग दी जा रही है। तीन हफ्ते तक उन्हें कोरोना संक्रमितों के थूक और यूरिन सैंपल की पहचान करना सिखाया जा रहा है। इस तकनीक को odor imprinting कहते हैं। दूसरे स्टेज में कुत्तों को कोरोना संक्रमित मरीजों और स्वस्थ लोगों के बीच फर्क समझने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

कुत्तों में सूंघने की ताकत इनसानों से कितनी ज्यादा है?

अमेरिका में 1980 के दशक में हुए रिसर्च से पता लगा कि कुत्तों में इनसान की कोशिकाओं में मौजूद VOC यानी volatile organic compounds को सूंघ कर पता लगाने की जबरदस्त समझ होती है। ये VOC इनसान के खून, थूक, यूरिन और सांसों में पाए जाते हैं। रिसर्च से पता चला कि जब किसी को कैंसर हो जाता है तब कैंसरग्रस्त कोशिकाओं से खास तरह का VOC निकलता है जिसकी पहचान कुत्ते फौरन कर लेते हैं।

कुत्ते कैसे सूंघ कर पता लगा लेते हैं ?

इनसानों की तरह कुत्तों में भी सेंस डिटेक्टर होते हैं। इनसानों में इनकी तादाद 60 लाख के करीब होती है, जबकि कुत्तों में इनकी तादाद पचास गुनी ज्यादा यानी 30 करोड़ के करीब होती है। पचास गुना ज्यादा सेंस डिटेक्टर होने की वजह से कुत्तों में सूंघ कर पता लगाने या फर्क करने की ताकत इनसानों से  दस हजार से एक लाख गुनी ज्यादा होती है।

Alexandra Horowitz ने अपनी किताब Inside of a Dog में बताया है कि अगर चाय में चीनी एक चम्मच की जगह दो चम्मच पड़ गई है तो हममें से कई लोग इसे पीने से पहले ही इसकी गंध से समझ जाते हैं, वहीं कुत्ते दस लाख लीटर सादे पानी में एक चम्मच चीनी के फर्क को महसूस कर सकते हैं। वो बीस लाख सेब में एक सड़े सेब की पहचान  कर सकते हैं।

12 हजार लीटर के टैंकर के अंदर एक प्लास्टिक कंटेनर में छिपा कर ले जाए जा रहे 4 किलो ड्रग्स का पता एक ट्रेंड कुत्ता टंकी का ढक्कन खोलते ही लगा लेता है।

अगर ये रिसर्च कामयाब रहा तो कोरोना के कम्यूनिटी स्प्रेड को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।

क्या कुत्ते को नहीं होगा कोरोना ?

अगर कुत्ते को कोरोना के संक्रमित मरीज के पास ले जाएंगे तो खतरा ये भी है कि संक्रमण कुत्ते को भी हो सकता है। मार्च में हांगकांग में एक कुत्ते के संक्रमित होने की बात सामने आ चुकी है। इनसान से जानवर को होने वाला कोरोना का ये पहला मामला था। अमेरिका से भी मालिक से पालतू कुत्ते के संक्रमित होने का मामला सामने आ चुका है।

जाहिर है खतरा तो है, लेकिन वैज्ञानिक ये जोखिम उठाने को तैयार हैं। उम्मीद है कोरोना सूंघने वाला पहला कुत्ता जुलाई तक बाजार में आ जाएगा।

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