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इकोनॉमिक्स प्याज ही तो है?

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इकोनॉमिक्स प्याज ही तो है?

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पिछले साल जब जीडीपी की दर महज 4.2% दर्ज की गई तब बताया गया था कि बीते 11 साल में इकोनॉमी की ये सबसे सुस्त रफ्तार है। अब हमने 40 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है।

इकोनॉमी को हुआ क्या है ?

देश की अर्थव्यवस्था में मंदी आ गई है।  मंदी का आना या होना तब माना जाता है जब लगातार दो तिमाही में जीडीपी में कमी दर्ज की जाए। 1996 से देश में हर तिमाही की जीडीपी के आंकड़े सरकार ने बताने शुरू किए। जनवरी-मार्च2020 में जीडीपी 3.1% थी जो पिछले साल इसी दौरान 5.7% थी। इसके बाद इस साल अप्रैल से जून 2020 की तिमाही में जीडीपी की दर -23.9% हो गई जो पिछले साल इसी दौरान 5.2% थी। केंद्र सरकार के लिए मंदी एक गुप्त रोग है, जिसके होना वो सार्वजनिक तौर पर कभी कबूल नहीं कर पाई , लेकिन अब सरकार के CEA- Chief Economic Advisor  K V Subramanian कह रहे हैं कि 1870 के बाद बीते 150 साल में हम सबसे बड़ी मंदी से गुजर रहे हैं।

 “what we were going through is a one-and-a-half century event”

दुनिया की पांच सबसे बड़ी इकोनॉमी की बात करें तो सिवाय चीन के, बाकी सभी देशों की इकोनॉमी कोरोना ने तबाह कर दी है। सबसे बुरी हालत अमेरिका की है, भारत दूसरे नंबर पर है।

अप्रैल-जून तिमाही में GDP की दर ( दुनिया की 5 सबसे बड़ी इकोनॉमी)

देश GDP दर
अमेरिका-31.7%
चीन03.2%
जापान-7.8%
जर्मनी-10.1%
भारत-23.9%

कितने बुरे हैं हालात?

  • ये पहली बार है कि GDP के सभी 8 हिस्सों में गिरावट दर्ज की गई है
  • कृषि में 3.4% की वृद्धि हुई है लेकिन nominal growth in agri GDP पिछले साल 13.5% थी
  • खेती के अलावा सबसे ज्यादा रोजगार वाले तीन क्षेत्र होटल(-47%) , कंस्ट्रक्शन (-50%)  और मैन्यूफैक्चरिंग (-39%) में सबसे तेज गिरावट आई है

चिंता की बात क्या है?

  1. जीडीपी के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इकोनॉमी में डिमांड की जिस कमी की बात दबी जुबान से कही जा रही थी, उसकी हालात उससे कहीं ज्यादा बुरी है, जितनी बताई जा रही थी
  2. सरकार चाह कर भी बहुत नहीं कर सकती। इस तिमाही में सरकार का खर्च 10.54 लाख करोड़ रहा है, जबकि आय महज 2.32 लाख करोड़। fiscal deficit 8.21 लाख करोड़ पर पहुंच गया है जो पिछले साल इसी दौरान 5.47 लाख करोड़ था।
  3. 70 हजार से ज्यादा रोजाना संक्रमण के बाद भी कोरोना अब तक पीक पर नहीं पहुंचा है, ऐसे में आशंका है कि अगली तिमाही यानी जुलाई से सितंबर जीडीपी के आंकड़े भी सकून देने लायक नहीं होंगे।

क्या इकोनॉमी में गिरावट की वजह सिर्फ कोरोना है ?

जानकारों की राय है कि हमारी इकोनॉमी में पांच बुनियादी परेशानियां हैं जिन्हें सरकार अब तक दूर नहीं कर पाई है

  1. बैंकिंग और नॉन बैंकिंग फाइनान्स सेक्टर में कर्ज  और निगरानी संबंधी कमजोरियां
  2.  कर्ज मिलने में बाधाएं
  3.  consumption based economy में निजी खर्च – private consumption में आई भारी कमी
  4.  industrial activity में गिरावट
  5.  इकोनॉमी में नई पूंजी निवेश की मात्रा में कमी

इनमें से act of god वाली थ्योरी कहां फिट होती है, इसका पता चलते ही आपको बताया जाएगा…फिलहाल आप एक चुटकुला सुनिए।

पापा…. रमेश फेल हो गया

तुम्हारा क्या हुआ ?

संजय और सुरेश भी फेल हो गए

अरे…अपना रिजल्ट बताओ, तुम पास हुए कि नहीं ?

मुखिया जी का बेटा भी फेल हो गया..

दूसरो से क्या मतलब बेटा…तुम अपना रिजल्ट बताओ

जब मुखिया जी का बेटा फेल हो गया  …तब  बापू तुम्हारा बेटा कैसे पास होता ?

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