Type to search

पाकिस्तान जैसे मिस्र के हालात, भारत ने थामा है हाथ

दुनिया देश

पाकिस्तान जैसे मिस्र के हालात, भारत ने थामा है हाथ

Share
Pm modi

भारत और मिस्र के बीच दशकों पुराने संबंधों को इस बार 26 जनवरी को नया आयाम मिलने वाला है. दोनों देशों के लिए ये दिन बेहद खास है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनेंगे. ये उनका तीसरा भारतीय दौरा होगा. दोनों देशों के बीच सिर्फ राजनायिक ही नहीं, बल्कि बड़ा व्यापारिक सहयोग भी है. बीते कुछ सालों में भारत-मिस्र के बीच व्यापार काफी बढ़ा है.

हालांकि, मिस्र की आर्थिक स्थिति भी पाकिस्तान की तरह ही बदहाल है और भारत एक दोस्त की भूमिका अच्छे से निभा रहा है. भले ही मिस्र एक मुस्लिम देश है, लेकिन वो हमेशा से ही पाकिस्तानी नीतियों और आतंकवाद की खिलाफत करता रहा है. भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार परिषद की 25-26 जुलाई 2022 को काहिरा में हुई संयुक्त व्यापार समिति की पांचवीं बैठक के बाद जारी पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 में दोनों देशों के बीच व्यापार में इससे पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 75 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है. मिस्र में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने भी जानकारी देते हुए बताया है कि भारत और मिस्र के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार अपने हाई लेवल पर है.

वित्त वर्ष 2021-22 का डाटा देखें तो भारत और मिस्र के बीच व्यापार 7.26 अरब डॉलर को पार कर गया. अगले पांच साल में इसके 12 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जहां मिस्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, तो वहीं भारत मिस्र के लिए छठा सबसे अहम व्यापारिक भागीदार है. दोनों देशों के बीच में साल 1978 से द्विपक्षीय कारोबार समझौता लागू है. बीते कुछ सालों में व्यापार में काफी बढ़ोतरी हुई है. दस सालों में दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात करीब पांच गुना बढ़ा है.

दोनों देशों के बीच व्यापार पर नजर डालें तो सामने आता है कि भारत आयात से ज्यादा मिस्र को निर्यात करता है. मिस्र खाद्य पदार्थों का बड़ा आयातक है और अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है. हाल ही में भारत ने जब गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी, तब भी मिस्र को गेहूं को कई टन खेप भेजी थी.

बता दें रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine) मिस्र को गेहूं निर्यात करने वाले प्रमुख देश हैं, तकरीबन 80 फीसदी जरूरत का गेहूं यहां से मिलता है. लेकिन दोनों देशों के बीच युद्ध से सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच मिस्र में गेहूं की किल्लत चरम पर पहुंच गई थी. इसके बाद मिस्र भारत से बड़े पैमाने पर गेहूं का आयात करने लगा और जून 2022 में भारत से 1.8 लाख टन गेहूं भेजा गया था. इसके अलावा मिस्र, भारत से सूती धागे, तिल, कॉफी, जड़ी बूटी, तंबाकू और दालों का निर्यात करता है.

दूसरी ओर भारत द्वारा मिस्र से खरीदे जाने वाले सामानों की बात करें तो उर्वरक निर्यात के मामले में मिस्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. पहले और दूसरे नंबर पर क्रमश: सऊदी अरब और ओमान का नाम आता है. भारत, मिस्र से कच्चा तेल, उर्वरक, कॉटन और इन ऑर्गेनिक केमिकल समेत चमड़े और लोहे के उत्पादों का आयात बड़ी मात्रा में करता है.

दोनों देशों के बीच इन जरूरी सामानों के अलावा मेडिसिन का आयात-निर्यात भी होता है. Covid-19 महामारी के प्रकोप के दौरान कोरोना वैक्सीन के मामले में भारत और मिस्र के बीच खूब व्यापार हुआ था. रिपोर्ट की मानें तो कोविड-19 के दौरान मिस्र ने 2021 की शुरुआत में भारत से 50 हजार वैक्सीन खरीदी थीं. जबकि भारत ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मिस्र में निर्मित लगभग 3 लाख रेमडिसिविर की खुराकें मगाई थीं.

भले ही भारत और मिस्र के बीच व्यापारिक संबंध गहरे हों. लेकिन वर्तमान में सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान की तरह ही इस मुस्लिम देश की वित्तीय हालत भी खस्ताहाल है. मिस्र भी इस समय बड़े आर्थिक संकट से घिरा हुआ है. महंगाई दर मिस्र में भी पाकिस्तान के लगभग बराबर है. जहां पाकिस्तान में महंगाई 24.5 फीसदी पर पहुंच गई है, तो इस देश की जनता भी 24 फीसदी महंगाई दर के चलते त्राहि-त्राहि करने को मजबूर है.

कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका की हालत किसी से छिपी हुई नहीं है, कुछ ऐसा ही हाल पड़ोसी पाकिस्तान का भी हो रहा है. वहीं मिस्र के हालात भी बहुत जुदा नहीं है और इस देश पर विदेशी कर्ज की बात करें तो यह बढ़कर 170 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इस आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे मिस्र का साथ जब किसी अन्य मुस्लिम देश ने नहीं दिया, तो फिर भारत ने अपनी दोस्ती का परिचय देते हुए उसका हाथ थामा. गेहूं और चावल की भारी किल्लत से जूझने वाले मिस्र को इस खाद्यान संकट से निकालने में भारत पूरी मदद कर रहा है.

मुस्लिम देश होने के बावजूद भारत को मिस्र की दोस्ती क्यों पसंद है? इसका एक बड़ा कारण ये भी हो सकता है कि इस देश ने हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है. मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी (Organization of Islamic Cooperation) में यह पाकिस्तानी नीतियों का हमेशा से विरोधी रहा है. भारत के अलावा मिस्र में संकट की इस घड़ी में इजरायल और अमेरिका भी उसकी मदद को आगे आए हैं.

भारत-मिस्र आपसी व्यापारिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. व्यापार और Investment संबंधों में हालिया प्रगति की समीक्षा के दौरान बीते साल निवेश को बढ़ाने की दिशा में कई नए क्षेत्रों की पहचान भी की गई थी. इनमें खाद्य और कृषि के अलावा समुद्री उत्पाद, ऊर्जा विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया समेत नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, एमएसएमई, इंजीनियरिंग सामान, विनिर्माण, आईटी और IT सेवाएं, पर्यटन आदि शामिल हैं.

भारतीय कंपनियों के निवेश के बारे में बात करें तो तकरीबन 50 भारतीय कंपनियों ने मिस्र में भारी निवेश किया हुआ है. इसमें रसायन, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, खुदरा, परिधान और कृषि क्षेत्रों किया गया इन्वेस्टमेंट शामिल है. पीआईबी के डाटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 तक ये 3.2 अरब डॉलर से अधिक का रहा. इस निवेश के जरिए वहां 30,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है.

Egypt’s situation like Pakistan, India has held hands

Share This :
FacebookTwitterWhatsAppTelegramShare
Tags:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *