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#hathras:चिट्ठी आई है

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#hathras:चिट्ठी आई है

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#Hathras

यूपी के हाथरस (#hathras) में एक खत सामने आया है,जो आरोपी संदीप ने हाथरस के एसपी को लिखा है। इस खत में दो अहम बातें हैं

  1. आरोपी का कहना है कि उसकी पीड़िता से दोस्ती थी, और  घटना वाले दिन वो लड़की से मौका-ए-वारदात की जगह पर मिला भी था, लेकिन लड़की की मां और भाई के कहने पर वहां से चला गया था
  2.   पीड़िता की मां और भाई ने मारपीट की  और बच्ची की जान ले ली ।

यानी ये मामला गैंगरेप का नहीं ऑनर किलिंग का है…

आरोपियों का मकसद इंसाफ पाना था तो उन्हें ये खत किसी पुलिस अफसर को नहीं, कोर्ट के जज को लिखना चाहिए था, अदालत इसे संज्ञान में लेती और इस पर कार्रवाई करने का आदेश पुलिस को देती, लेकिन तब इस खत पर टीवी स्टूडियो में चर्चा नहीं हो सकती थी, क्योंकि ये खत… कोर्ट का दस्तावेज बन जाता। जाहिर है आरोपियों का मकसद एक नैरेटिव बनाने का था…ताकि इस पर टीवी चैनलों में बहस हो, चर्चा हो, कॉल रिकार्ड की कहानी के साथ जोड़ कर इसे आगे बढाया जाए। ये महज इत्तेफाक नहीं हो सकता कि सात अक्टूबर को आरोपी खत लिखते हैं, जो जेलर के माध्यम से एसपी(#hathras) को भेजा जाता है और ये खत अगले दिन सुबह 9.30 बजे सभी टीवी चैनलों पर आ जाता है। जाहिर है प्रशासन चाहता था कि ये खत सामने आए और कॉल रिकार्ड वाले नैरेटिव को आगे ले जाए।

ये किस तरह से गलत है, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को भटकाने की साजिश है, इसे तथ्यों के जरिए समझिए ….

  1. बुरी तरह घायल लड़की अस्पताल ले जाई गई, नियम है कि 24 घंटे के अंदर उसका मेडिकल होना चाहिए था, नहीं हुआ।  
  2.  चार दिन के बाद फोरेंसिक एविडेंस का कोई मतलब नहीं होता …इसे mud कहते हैं .. menstruation…urination … defecation …इस मामले में 8 दिन के बाद यानी 22 सितंबर को जब बच्ची ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया, इसके बाद पुलिस ने मामले में गैंगरेप की धारा जोड़ी और उसका सैंपल लिया गया । सवाल है क्या ऐसा इसलिए किया गया  ताकि अदालत को बताया जा सके कि  रेप नहीं हुआ था ?
  3. इसी दिन यानी 22 सितंबर को  मेडिकोलीगल ओपिनियन लिया गया – रिपोर्ट में कहा गया कि लड़की के साथ जबरदस्ती की गई
  4. 28 सितंबर को  बच्ची को सफदरजंग लाया गया, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गई।   सफदरजंग की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में  लिखा है कि- “hymen showed multiple old healed tears”, and  “anal orifice showed old healed tear”.

मतलब ये कि लड़की का बयान तो रेप की बात कहता ही है, इस मामले में मेडिको लीगल ओपिनियन मे जबरदस्ती की बात कही गई है और सफदरजंग के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पेनेट्रेशन का जिक्र है।  अब सवाल है अगर ये मामला ऑनर किलिंग का है तो क्या पीड़िता के भाई ने अपनी सगी बहन के साथ जबरदस्ती की थी।

  • ठाकुर और दलित परिवार के बीच जिस दोस्ती और रिश्ते की दुहाई दी जा रही है, उसका एक सच ये भी है कि अगर इस परिवार के लोग राशन लेने दुकान पर जाते हैं तो दुकानदार इनके हाथ पर पैसे नहीं रखता, ऊपर से हाथ पर गिरा देता है। ऐसे में रिश्ते और दोस्ती की कहानी पर यकीन करना मुश्किल है।

इसके पहले यूपी पुलिस ने 13 अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच कथित कॉल रिकार्ड जारी किए। जिसमें दावा किया गया कि ये फोन जो पीड़िता के भाई का था, और उसकी भाभी के पास रहता था , उससे पीड़िता  और आरोपी के बीच छह महीने में कुल 104 बार बात चीत हुई। कहा गया कि 60 कॉल रात के वक्त की गई।

पीड़िता के भाई का कहना है कि मेरी बहन अनपढ़ थी, वो सिर्फ फोन रिसीव करना जानती थी,  नंबर डायल करना उसे नहीं आता था। उनका दावा है कि अगर बात हुई है तो ऑडियो पेश किया जाए।

इस तरह ये कहानी भी फर्जी मालूम होती है।

इस बीच कई तरह के स्टिंग सामने आ रहे हैं जो कथित तौर पर आरोपी पक्ष के दावे की पुष्ट करते हैं। इस बीच सारे मामले पर यूपी सरकार ने क्या किया है …इस पर गौर कीजिए

  1. अगर किसी लड़की के साथ गैंगरेप होता है, बाद मे उसकी जान चली जाती है तो सरकार को चाहिए कि फौरन उसके परिवार की सुरक्षा के इंतजाम करे, उन्हें वहां से ले जाकर कहीं गुप्त जगह पर  जैसे लखनऊ में सेफ हाउस मुहैया कराए, उन्हें आगे जिन्दगी बसर करने के लिए सरकारी नौकरी दे। अब तक यूपी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया। बच्ची चली गई…परिवार को रोज धमकियां मिल रही हैं, गांव में जरूर इनकी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन यहां इनके रहने से हो ये रहा है कि रोज नए नैरेटिव सामने आ रहे हैं और मीडिया इस परिवार से हर नई कहानी पर सफाई मांग रहा है।
  • पीड़िता का मजिस्ट्रेट के सामने बयान है कि उसके साथ गैंग रेप हुआ, मेडिको लीगल ओपिनियन है 22 सितंबर का जिसमें जबरदस्ती की बात कही गई है, 29 सितंबर का सफदरजंग अस्पताल का पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेनेट्रेशन का जिक्र है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार हलफनामा दे कर कहती है कि रेप नहीं हुआ, और सबूत के तौर पर 11 दिन बाद के फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देती है जिसकी रेप के नजरिए से न फोरेंसिक मान्यता है न सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के मद्देनजर कोई  कानूनी मान्यता है।
  •  इस मामले में राहुल गांधी से लेकर डेरेक ओ ब्रायन तक हाथरस आए, लेकिन राज्य के मुखिया मुख्यमंत्री आदित्यनाथ खुद गांव नहीं गए। तब भी नहीं जब 22 सितंबर को बच्ची ने गैंगरेप का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दिया… तब भी नहीं जब 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई …तब भी नहीं जब पुलिस ने उसके शव को रात में जला दिया।
  •   विरोधी पार्टियों पर चाहे वो समाजवादी पार्टी हो, भीम पार्टी हो या राष्ट्रीय लोक दल हो, सब पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं क्योंकि धारा 144 का उल्लंघन हो रहा था, महामारी कानून का उल्लंघन हो रहा था, लेकिन हाथरस के गांव में दबंगों की पंचायत इस दौरान लगातर बैठती रही, तब पुलिस ने कुछ नहीं किया …क्यों ?
  •   जो पीड़ित है, उसे यूपी सरकार की पुलिस या एसआईटी  जांच पर भरोसा नहीं है, उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले  को देखे, वहीं आरोपी पक्ष है जो सरकार की जांच से पूरी तरह संतुष्ट है…ऐसा सुना है कभी ?
  • कहा जा रहा है कि एसआईटी की जांच चल रही है, ये एसआईटी के लोग आरोपी के परिवारवालों के पास नहीं जाते, बस पीड़िता के परिवार के पास रोज जा रहे हैं । क्यों ?
  • एक थ्योरी रंजिश की भी है। कहा जा रहा है कि पहले भी दोनों परिवारों में रंजिश थी, इसी वजह से पीड़िता ने इस परिवार के लोगों का नाम लिया। ठाकुरों की बहुलता वाले गांव में दांत में जीभ की तरह जीने वाले दलित की ….घास काट कर गुजारा करने वाले परिवार की किसी से ऐसी क्या रंजिश हो सकती है जिसके लिए वो अपनी ही बेटी ..बहन की जान ले ले और फिर वही बेटी…वही बहन रंजिश की इस थ्योरी को मरते वक्त बयान देकर आगे बढ़ाए।

यूपी सरकार और मीडिया  ने (#hathras)एक दलित परिवार के खिलाफ ऐसा नैरेटिव तैयार किया है जिसमें एक बच्ची जिसकी मौत हो चुकी है, उसका मरने के बाद… अब जबकि वो सफाई तक नही दे सकती ….चरित्र हनन किया जा रहा है और उसके परिवार वालों को ही उसका कातिल ठहराया जा रहा है।

 विजया, दीपिका, भावना, वर्तिका…

ये उन औरतों के नाम हैं

जो बहुत बचके चलीं

टिन्नी, मिनी, रिधु…

ये उन लड़कियों के नाम हैं

जिन्हें बचके चलने वाली औरतें

बचके चलना सिखा रही हैं

(विजया सिंह की कविता- पत्रिका सदानीरा से)

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