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#Hathras: ये ऊपरवाला कौन है ?

क्राइम जरुर पढ़ें

#Hathras: ये ऊपरवाला कौन है ?

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#Hathras

हमारे देश में हर 16 मिनट में एक और हर दिन रेप के औसतन 87 मामले दर्ज होते हैं, फिर भी हाथरस(#Hathras ) की घटना पांच मामलों में अलग है …

1.            यहां एक गरीब दलित परिवार की लड़की का डाइंग स्टेटमेंट है कि उसके साथ रेप हुआ और जिले के एसपी कहते हैं कि  बस उसकी गरदन तोड़ी गई है…. इसके बाद राज्य के एडीजी प्रेस कान्फ्रेंस कर कहते हैं कि लड़की झूठ बोल रही है, उसका बयान झूठा है, उसके साथ रेप नहीं हुआ…..जबकि 2014 में parminder vs state of delhi में  सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को बहाल रखा था जिसमें कहा गया था कि रेप के लिए स्पर्म का पाया जाना जरूरी नहीं है। इसके पहले state of up vs babulnath 1994 और   wahid khan vs state of mp 2010 में भी ये कहा गया था कि स्पर्म का मिलना जरूरी नहीं है। तो क्या यूपी के एडीजी को कानून का ज्ञान नहीं है?

2.            मौत के बाद देर रात, पुलिस ने उसके शव को परिवार को सौंपने की जगह…चुपचाप  जला दिया। घर के लोग आखिरी वक्त उस बच्ची का चेहरा भी न देख सके।

3.            पीड़ित परिवार के लोगों को पुलिस ने मारा पीटा, धमकाया, सबके फोन छीन लिए, घर के लोगों को  नजरबंद कर दिया, यहां तक कि बच्ची के पिता को धमकाने खुद डीएम साहब  घर पर आए। बच्ची के परिवार से  मिलने की इजाजत न विरोधी पार्टियों को दी जा रही है न प्रेस को।

4.            हाथरस (#Hathras) जाने की कोशिश में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को गिरफ्तार किया गया। राहुल गांधी, डेरेक ओ ब्रायन और काकुली घोष दस्तीदार के साथ बदसलूकी भी हुई।

5.            आदेश हुआ है कि पीड़िता के परिवार वालों का नारको टेस्ट किया जाएगा, जबकि वो इसके लिए तैयार नहीं हैं।

ये तब …जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 12 अक्टूबर को पीड़िता के परिवार को अपनी बात रखने का मौका दिया है और डीजीपी, डीएम एसपी जैसे अफसरों को अपनी सफाई पेश करने का हुक्म दिया है।

The matter is of immense public importance & public interest as it involves allegation of high handedness by the State Authorities resulting in violation of the basic human and fundamental rights not only of the deceased victim but also of her family members” – HC

हाथरस की निर्भया का सच तो एसआईटी जांच में सामने आएगा, लेकिन इस मामले में डीएम के बयान और उस बयान पर पीड़िता के परिवार की प्रतिक्रिया आपको जरूर सुननी चाहिए। डीएम ने कथित तौर पर बच्ची के परिजनों को एक घर और 25 लाख मुआवजा देने की बात कही और बयान बदलने के लिए दबाव डाला। इस पर बच्ची के परिवार की एक महिला का कहना था कि क्या डीएम साहब 25 लाख रुपये में अपनी बेटी सौंप देंगे? हमारे समाज में पैसा और पोस्ट, रिश्वत और रसूख वाले लोग अक्सर ये समझ नहीं पाते कि अगर हमने पैसों के लिए फर्ज, देशभक्ति और नैतिकता को रेहन रख दिया तो ये कैसे हो सकता है कि  एक गरीब 25 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम के बारे में न सोच कर अपनी बेटी के बारे में सोचे, उसके आखिरी क्रिया कर्म को लेकर उसमें संवेदना हो, वो उसे सजा कर तैयार कर चिता पर भेजने के बारे में सोचे..इसके लिए पुलिस की लाठियां खाएं, अफसरों की घुड़कियां सहे।

हाथरस( #Hathras🙂 में एक ओर बीजेपी है जिसे समझ नहीं आ रहा कि जो मीडिया छह साल से पार्टी की लाइन को देश के सच के तौर पर पेश कर रहा था , वही मीडिया क्यों हाथरस में इस तरह खुल कर पहली बार क्यों यूपी पुलिस के नाम पर प्रदेश की बीजेपी सरकार के खिलाफ नजर आ रहा है? दरअसल टीवी चैनलों को ये समझ आ गया है कि वो कुछ कर लें, उनमें सरकार का पक्ष मजबूती से रखने में अरनब वाला टैलेंट नहीं है, लिहाजा टीआरपी की दौड़ में अपनी साख बचाए रखने की खातिर उन्हें खबर की दुनिया में लौटना पड़ रहा है।

निर्भया के बाद देश में हालात बदलने की उम्मीद थी….लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर रेप का इल्जाम लगा तो बगैर किसी जांच का इंतजार किए फौरन केंद्र सरकार उनके बचाव में आ गई। यूपी में भी एक ओर गरीब दलित परिवार है तो दूसरी ओर सारा प्रशासन, पास के 12 गांव के सवर्ण।   कोई आश्चर्य नहीं अगर पुलिस साबित कर दे कि बच्ची ने खुद ही अपने गर्दन की हड्डियां तोड़ लीं और जिन युवकों पर रेप और मर्डर का इल्जाम लगा है, वो दरअसल उसकी जान बचाने के लिए उसे अलीगढ़ अस्पताल ले गए थे।

अन्याय जिधर है उधर शक्ति !

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