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गैलेलियो का कुत्ता

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गैलेलियो का कुत्ता

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1597 में गैलेलियो के आविष्कार से पहले दुनिया कम्पास के बारे में कम ही जानती थी, लेकिन अब ये पता चला है कि कई कुत्ते ये कंपास लेकर पैदा होते हैं।

अगर किसी पालतू कुत्ते को आप घर से सौ या हजार फीट दूर छोड़ आएं तो बगैर किसी GPS के वो बहुत आसानी से अपने मालिक के घर पहुंच जाएगा। eLife में प्रकाशित, चेक रिपब्लिक की एक स्टडी से पता चला है कि कुत्तों में धरती के मैग्नेटिक फील्ड को समझने की गजब की समझ होती है। इस फील्ड को कुत्ते कंपास की तरह इस्तेमाल करते हैं और अपनी मंजिल तक बेहद आसानी से पहुंच जाते हैं।

धरती के अंदर की मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करने की जानवरों की इस समझ को magnetoreception कहा जाता है। अब तक ये समझा जाता था कि  प्रवासी पक्षी, डॉल्फिन और कछुओं की कुछ प्रजातियों में ये समझ होती है। जंगल में लोमड़ी इसी का इस्तेमाल शिकार तक पहुंचने मे करती है।

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प्राग में Czech University of Life Sciences की स्टडी रिसर्चर Kateřina Benediktová मानती हैं कि जानवरों की इस समझ को समझने लायक हम अब तक नहीं बन पाए हैं।

“This ‘sense’ is beyond our own human perception and it is, therefore, very hard to understand its meaning for animals,”

कंपास वाले कुत्ते की तलाश कैसे शुरू हुई?

2013 में Frontiers in Zoology जरनल में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया कि चेक साइंटिस्ट्स ने गौर किया कि कुत्तों की कुछ प्रजाति पूप करने के लिए अपने शरीर को हर बार धरती के magnetic north-south axis की रेखा से मिलान करती हैं।

इसके बाद कुत्तों पर चेक साइंटिस्ट्स ने अपनी स्टडी को आगे बढ़ाया । सितंबर 2014 से दिसंबर 2017 के बीच fox terriers और miniature dachshunds  जैसे मशहूर शिकारी कुत्तों पर रिसर्च किया गया। इस दौरान पालतू शिकारी कुत्तों को घर से ले जाकर दूर करीब के जंगल में छोड़ दिया जाता था। पता चला कि ये कुत्ते 30 से 90 मिनट के अंदर अपने मालिक के घर पहुंच जाते थे। 10 प्रजातियों के 27 शिकारी कुत्तों पर 62 जगहों पर 622 बार हुए इस प्रयोग का अब नतीजा सामने आया है।

a fox terrier (left) and a miniature dachshund (right), are equipped with a GPS transmitter, an antenna and a camera,Image credit: eLife

स्टडी में पाया गया कि ज्यादातर वक्त कुत्ते अपने शरीर से निकलने वाली गंध को सूंघ कर अपने लिए रास्ता तलाश रहे थे। इसे साइंस की भाषा में “tracking’’ कहते हैं। लेकिन 622 में 223 बाद ये पाया गया कि कुत्ते अपने ठिकाने पर पहुंचने के लिए किसी चमत्कार की तरह खुद ही सबसे छोटे रास्ते का पता लगा ले रहे थे और बाकी कुत्तों के मुकाबले काफी जल्द अपने ठिकाने पर पहुंच जा रहे थे  । इसे ‘’scouting’’ कहा गया। ये पाया गया कि धरती के north-south axis की समझ से उन्हें छोटा रास्ता तलाश करने में मदद मिल रही थी।

रिसर्चर Benediktová ने पेपर में लिखा

“We propose that this [compass] run is instrumental for bringing the mental map into register with the magnetic compass and to establish the heading of the animal”

“Hunting dogs roam over large distances. A human would most probably get lost without a compass and a map if roaming over comparable distances in unfamiliar forested areas. In addition, after the north-south compass run, dogs were able to run more directly to the owner.

अमेरिका के John Hopkins University में neuroscience professor Kathleen Cullen इसे बेहद अहम खोज मानती हैं

Overall, I think that the authors’ unexpected discovery that hunting dogs will often perform a ‘compass run’ before returning home is exciting — these results will certainly motivate further exploration of how exactly the mammalian brain encodes magnetic cues and then uses this information to achieve accurate navigation.”

बगैर साइंस के बताए भी हम ये समझ पाए हैं कि कुत्ते बच्चों के बेस्ट फ्रेंड होते हैं

Cute Dogs and Babies are Best Friends - Dogs Babysitting Babies Video

क्योंकि वो बेस्ट फ्रंड होते हैं, इसलिए वो उनकी हिफाजत भी करते हैं

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