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#Honey: मिलावटी मधु से सावधान

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#Honey: मिलावटी मधु से सावधान

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#Honey

जो शहद (#Honey ) हम कोरोना काल में इम्यूनोबूस्टर समझ कर या मोटापा कम करने में मददगार मान कर ले रहे हैं, वो मिलावटी हो सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) ने भारत और जर्मनी की लैब में भारत के मशहूर ब्रांडों की शहद जांच के लिए भेजा।इस जांच में चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। downtoearth.org.in में प्रकाशित लेख में विस्तार से ये रपट छपी है

Can sugar syrups be adulterated with honey that can go undetetcted under Indian testing protocols?

 रिपोर्ट में कहा गया है कि-

  •  13 बड़े और छोटे शहद के ब्रांडों में सिर्फ 3 ब्रांड सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर ही शुद्धता के पैमाने पर खरे पाए गए
  • भारत की प्रयोगशाला बड़े ब्रांडों में सी3 और सी4 शुगर की मिलावट का पता नहीं लगा पाई
  • लेकिन जब इन सभी नमूनों को उन्नत परीक्षण के लिए जर्मनी भेजा गया, तब तस्वीर बदल गई
  • भारत में पास हो चुके बहुत से नमूने ट्रेस मार्कर फॉर राइस (टीएमआर) परीक्षण में फेल हो गए
  • लगभग सभी नमूने न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कॉपी (एनएमआर) परीक्षण में फेल हो गए
  • डाबर शहद ने सी3 और सी4 शुगर का परीक्षण पास किया लेकिन तीनों नमूने एनएमआर टेस्ट में विफल हुए। एक नमूना टीएमआर पर भी विफल रहा।
  • पतंजलि शहद सी3 और सी4 शुगर परीक्षण में पास हुई लेकिन दोनों नमूने टीएमआर और एनएमआर परीक्षण में विफल हुए।
  • बैद्यनाथ शहद ने सी3 और सी4 शुगर के परीक्षण पास किए लेकिन एनएमआर पर विफल रहे। एक नमूना टीएमआर पर भी विफल रहा।
  • झंडु शहद ने सी3 और सी4 शुगर और टीएमआर के परीक्षण पास किए लेकिन एनएमआर पर विफल रहा।

#Honey:मिलावट का गणित

शहद बनाने वाली कंपनियां पहले गन्ने के रस से बनी साधारण शुगर का इस्तेमाल मिलावट के लिए करती थीं। बाद में चावल का C3शुगर इस्तेमाल होना शुरू हुआ। अब संशोधित शुगर का इस्तेमाल हो रहा है जो भारत में लैब की जांच में पकड़ में नहीं आते। ये कंपनियां जो शहद पालकों से 120 से 150 रुपये किलो शुद्ध शहद खरीदती थीं अब संशोधित सुगर शिरप 50 से 60 रुपये किलो चीन से आयात करती हैं। शुद्ध शहद में (25-75%) तक ये शिरप मिला कर मिलावटी मधु तैयार होता है। इस तरह 50% मिलावटी मधु 125 रुपये में तैयार हो जाता है जिसे कंपनी तीन सौ से चार सौ रुपये किलो बेचती है। मिलावट के अलावा ये कंपनियां देश के कस्टम कानून का भी उल्लंघन कर रही हैं।  चीनी कंपनियां अक्सर इसका पेपरवर्क हांगकांग या किसी और देश के नाम से करती हैं। कस्टम क्लियरेंस में भी इसे सुगर शिरप दर्ज नहीं किया जाता।

इस जांच का हमारे लिए क्या मतलब है?

बहुत निश्चितता के साथ ये कहा जा सकता है कि हम और आप जिस ब्रांडेड शहद का इस्तेमाल बहुत भरोसे के साथ करते आए हैं, दरअसल वो हमारे भरोसे लायक नहीं है। इन्हें बनाने वाली कंपनियां बहुत सोच-समझ कर संशोधित शुगर सिरप       (50 से 60 रुपये/किलो) का इस तरह (25-75%) इस्तेमाल करती हैं जिससे उनका शहद सस्ता तैयार हो जाता है और हमारे देश में मौजूद लैब इस मिलावट को पकड़ नहीं पाते। ये भी जानकारी सामने आई है कि बीते दस साल में मिलावटी शहद का पता लगाने के एफएसएसएआई  के मानक सख्त होने के बजाय कमजोर होते गए हैं। जैसे TMR- trace marker for rice syrup ,   SMR- special marker for rice syrup और  FO – foreign Oligosaccharides जैसे दुनिया में सबसे ज्यादा मान्य जांच को अक्टूबर 2019 में अमान्य कर दिए गए। जिससे मिलावट करने वाली कंपनियों को फायदा हुआ। खास बात ये है कि 28 फरवरी 2020 को एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (ईआईसी) ने सभी शहद निर्यातकों के लिए (एनएमआर) टेस्टिंग अनिवार्य कर दिया। यानी हम शुद्ध मधु का निर्यात करते हैं, लेकिन अपने ही देशवासियों के लिए हम मिलावटी मधु से संतुष्ट हैं।

दस साल पहले जरूरत का 75% शहद आयात करने वाले अमेरिका ने मिलावटी शहद की जांच की तो पाया कि शहद का सबसे बड़ा उत्पादक चीन, भारत समेत कई देशों का इस्तेमाल ट्रांजिट सेंटर के तौर पर मिलावटी शहद अमेरिका भेजने के लिए कर रहा था। तब इसे नाम दिया गया- हनी लांडरिंग। इसके बाद अमेरिका ने कस्टम अधिकारियों को खास ट्रेनिंग दी, एनएमआर मशीन लगवाए और सख्त पेनाल्टी के कानून बनाए।

बड़ी तस्वीर क्या है?

भारत में शहद का कारोबार 

सालउत्पादनएक्सपोर्ट
200535हजार मीट्रिक टन      16,769 मीट्रिक टन      
20171.05 लाख मीट्रिक टन     51,547 मीट्रिक टन    
स्रोत- national bee board

पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में 16 लाख लोग मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करते हैं। मिलावटी मधु की वजह से बाजार में कच्चे शहद की मांग लगातार गिर रही है और मधुमक्खी पालकों को शहद की वाजिब कीमत नहीं मिल पा रही। फायदे में सिर्फ चीन है और उसकी अलीबाबा, ओके केम, ट्रेडव्हील जैसी कंपनियां हैं जो फ्रक्टोज सिरप, हनी ब्लैंड सिरप, फ्रक्टोज राइस सिरप फॉर हनी, टैपिओका फ्रक्टोज सिरप और गोल्डन सिरप के नाम से भारतीय कंपनिओं को मिलावट के लिए सिंथेटिक सिरप बेच रही हैं। चीन की देखादेखी मिलावट के सिंथेटिक सिरप के कारोबार में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में कई फैक्टरियां खुल गई हैं जो “ऑल पास सिरप” बना रही हैं।

मिलावट पर रोक कैसे लगे ?

  1. चीन से शहद और हर तरह के सिरप के आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
  2. सभी सिरप और शहद उचित एचएस कोड के तहत आयात हों और उनका डाटाबेस सार्वजनिक रहे।
  3. शहद की मिलावट की जांच के लिए टीएमआर- ट्रेस मार्कर फॉर राइस सिरप को अपनाया जाए। इसी तरह एक्सपोर्ट के लिए जरूरी, न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) को घरेलू उपयोग के लिए भी अनिवार्य किया जाए।  
  4. मिलावटी शहद बेचने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसमें कंपनी के खर्च पर रैंडम सैंपलिंग टेस्ट और फेल होने पर हर बार पहले से ज्यादा बड़ा जुरमाना लगाया जाए।
  5. साइंटिस्ट के द्वारा शहद की शुद्धता की जांच के घरेलू तरीके को ब्रांडेड शहद की पैकिंग में शामिल किया जाए। ताकि लोग खुद ही इसकी शुद्धता की जांच कर संतुष्ट हो सकें।
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