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नेपाल में भारत के खिलाफ देखी जा रही भारी नाराजगी

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नेपाल में भारत के खिलाफ देखी जा रही भारी नाराजगी

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उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा क्षेत्र में भारत सरकार के रोड बनाने के फैसले को लेकर नेपाल में भारी नाराजगी देखी जा रही है और नेपाल में विपक्ष के साथ साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल पार्टियों ने भारत से नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर नहीं करने के लिए कहा है। नेपाल ने एक बार फिर से चीन के साथ ट्राई-जंक्शन के पास लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्र पर अपना दावा ठोका है और अपने दावे को सही ठहराने के लिए पहले एक नया राजनीतिक नक्शा जारी कर चुका है।

हालांकि, अब तक नेपाल की गठबंधन सरकार सड़क के विस्तार पर पिछले महीने पीएम नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों पर चुप रही थी, लेकिन अब मुख्य सत्तारूढ़ दल में शामिल नेपाली कांग्रेस ने शुक्रवार को एक बयान में कहा है कि, भारत सरकार का सड़क विस्तार करने का प्रस्ताव आपत्तिजनक है और नेपाली कांग्रेस ने भारत सरकार से इस क्षेत्र से सैनिकों को तुरंत वापस बुलाने का भी आह्वान किया है। नेपाल की कांग्रेस पार्टी की तरफ से बयान जारी करते हुए भारतीय निर्माण पर आपत्ति जताई गई है और कहा गया है कि, “नेपाली कांग्रेस स्पष्ट है कि लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी नेपाली क्षेत्र हैं और नेपाल को इस भूगोल का उपयोग करने का अधिकार होना चाहिए।”

”कालापानी में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस किया जाना चाहिए।” आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर को हल्द्वानी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि, भारत ने टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वेदर रोड पर काम करने के अलावा लिपुलेख तक सड़क बनाने की भी योजना बनाई थी और “इसे आगे बढ़ाया जा रहा है”। चीन के साथ विवाद के बीच चीन की सीमा रेखा के साथ लगते ट्राइ-जंक्शन के पास लिपुलेख दर्रे पर सड़क के निर्माण ने पिछले कुछ महीनों में भारत और नेपाल के बीच सबसे खराब राजनयिक संकटों में से एक को जन्म दिया, जबकि, भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया है, कि सड़क केवल पूर्व-मौजूदा मार्ग के मुताबिक ही बनेगी, ताकि कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा हो।

नेपाल की सरकार में शामिल एक और पार्टी, सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) ने इसी हफ्ते अपने बयान में कहा था कि, नेपाल सरकार के परामर्श के बिना क्षेत्र में की गई कोई भी विकास की गतिविधि “पूरी तरह से अवैध है और यह हमारी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता का एक प्रमुख उल्लंघन है”।

Huge resentment is being seen against India in Nepal

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