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वादों की पोटली…खोखली!

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वादों की पोटली…खोखली!

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Bihar election, parties making all kind of promises

एक लक्ष्य, 5 सूत्र और 11 संकल्प। यही वो फॉर्मूला है, जिसके भरोसे बीजेपी (BJP), बिहार चुनाव में अपनी नैया पार लगाने की सोच रही है। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को पटना में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election) के लिए अपना संकल्प पत्र जारी किया। अपने संकल्प पत्र में बीजेपी ने “आत्मनिर्भर बिहार” का लक्ष्य रखा है, जबकि 5 सूत्रों में गांव, शहर, उद्योग, शिक्षा और कृषि के विकास पर फोकस रहेगा। इसके अलावा 11 संकल्प किये हैं, जिन्हें सत्ता मिलने पर पूरा किया जाएगा।

Bihar election: बीजेपी के 11 संकल्प

  1. बिहार में स्वास्थ्य, आईटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में कुल 19 लाख लोगों को रोज़गार दिया जाएगा। प्रदेश को नेक्सट जेनरेशन आईटी हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
  2. कोरोना का टीका विकसित होने पर बिहार के सभी लोगों को मुफ्त में टीका लगाया जाएगा।
  3. सरकार बनी तो एक साल के भीतर स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में तीन लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
  4. साल 2022 तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के तीस लाख लोगों को पक्के मकान दिये जाएंगे।
  5. माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के माध्यम से पचास हज़ार करोड़ रुपये की व्यवस्था की जाएगी और एक करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
  6. धान और गेहूं के बाद दलहन की ख़रीद भी एमएसपी की दरों पर की जाएगी। किसान उत्पाद संघों की बेहतर सप्लाई चेन बनाई जाएगी, जिससे 10 लाख रोज़गार पैदा होंगे।
  7. अगले दो सालों में मीठे पानी में पलने वाली मछलियों के उत्पादन में बिहार को देश का नंबर एक राज्य बनाया जाएगा।
  8. स्वास्थ्य विभाग में एक लाख लोगों को नौकरी दी जाएगी और 2024 तक दरभंगा एम्स को चालू कराया जाएगा।
  9. लुहार, मूर्तिकार, बढ़ई, बुनकर आदि कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए 500 करोड़ रुपये का बिहार शिल्प एवं कारीगर उत्थान फंड का निर्माण किया जाएगा।
  10. मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत अन्य सभी तकनीकी शिक्षा को हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराया जाएगा।
  11. राज्य में दवा उद्योगों की स्थापना पर बल दिया जाएगा और निजी निवेश को बढ़ावा देते हुए उन्हें अनुदानित दरों पर ज़मीन, बिजली आदि उपलब्ध करायी जाएगी।

क्या है इन वादों का मतलब?

बिहार के लोगों के लिए बीजेपी ने भी अपने चुनावी वादों का पिटारा खोल दिया है। पार्टी ने बिहार के लोगों के लिए 11 संकल्प लिये हैं, जिसे सत्ता में आने पर पूरा किया जाएगा। वैसे, उन्होंने ये नहीं बताया कि डबल इंजन की सरकार ने अब तक ये काम पूरे क्यों नहीं किये? क्या इसका मतलब ये है कि नीतीश के साथ सत्ता में दस साल से ज्यादा का वक्त काफी नहीं था? या इसका मतलब ये था कि नीतीश सरकार बीजेपी के जनता के हित के काम करने नहीं देती, इसलिए उसे अलग से 5 साल चाहिए? या केन्द्र की सरकार बिहार की जनता के लिए कुछ खास नहीं कर सकती, इसलिए प्रदेश में भी बीजेपी की सरकार बनाई जाए?

कितना भरोसा करेगी जनता?

बीजेपी ये माने या ना माने, लेकिन अगर बिहार का विकास नहीं हुआ, तो इसके लिए बीजेपी भी उतनी ही जिम्मेदार है, जितना नीतीश कुमार। सत्ता में शामिल होने का मतलब सिर्फ सत्ता सुख भोगना नहीं होता, जनता के सुख-दुख में भागीदार बनना भी होता है। आखिर जनता ने उनके विधायकों को भी कुछ उम्मीद से ही वोट दिये थे। दूसरी तरफ निर्मला सीतारमण से इसकी घोषणा करवा कर बीजेपी ने एक और रणनीतिक गलती कर दी। वित्त मंत्री के तौर पर उनके द्वारा उठाए सभी कदमों से सिर्फ ये संदेश गया है कि सरकार असल में जनता को लोन के अलावा और कुछ देना नहीं चाहती। अगर निर्मला सीतारमण कोई घोषणा करती हैं, तो सभी को अंदेशा होने लगता है कि उनकी ही जेब के पैसे से…आर्थिक राहत का पैकेज….निकलेगा। ऐसे में उनकी चुनावी घोषणाओं पर जनता कितना यकीन करेगी,..इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

क्यूं जरुरी था ये संकल्प-पत्र?

दरअसल ये कोई संकल्प-पत्र नहीं, विपक्ष को उसकी भाषा में जवाब देने की कोशिश है। पार्टी को भी पता है कि जनता इसे सीरियसी नहीं लेगी, लेकिन ये मैसेज जरुर जाएगा कि घोषणाओं के मामले में बीजेपी भी किसी से पीछे नहीं। इससे पहले बुधवार को कांग्रेस ने भी अपना ‘बदलाव पत्र 2020’ जारी किया था। इसमें 12 बड़ी स्कीमों के तहत किसानों का कर्ज माफ, गरीबों का लोन और बकाया बिजली बिल माफ करने से लेकर लड़कियों को केजी से पीजी तक की मुफ्त शिक्षा का वादा किया गया था। वहीं आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन ने तो पहली कैबिनेट तक ही 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। वहीं छात्रों के आवेदन फॉर्म पर फीस की माफी और परीक्षा में शामिल होने के लिए किराया तक देने की बात कही गई थी। अब वादों के मामले में बीजेपी कैसे पीछे रह सकती थी? इसलिए जनता के सामने एक और चुनावी संकल्प पत्र लेकर हाजिर हो गई।

उधऱ, सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। पार्टी ने घोषणापत्र के साथ नया नारा दिया है, ‘पूरे होते वादे, अब हैं नए इरादे।’इन्होंने संकल्प लिया है – ‘युवा शक्ति-बिहार की प्रगति, आर्थिक हल-युवाओं को बल, आरक्षित रोजगार-महिलाओं को अधिकार और सशक्त महिला-सक्षम महिला।’ पार्टी के नेताओं का दावा है कि हमने जो वादा किया है, उसे पूरा किया है। अगली बार सात निश्चय-2 को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

ये पब्लिक है….सब जानती है!!!

बिहार की जनता इतनी परिपक्व तो जरुर है कि इन चुनावी वायदों की असलियत समझ सके। कई सालों से घोषणा-पत्रों और वादों की बरसात झेल रही जनता इनमें से किसी पर भी यकीन करेगी, ये मुश्किल लगता है। पार्टियों के नेता भी ये बात बखूबी समझते हैं, इसलिए एक-से बढ़कर एक वादों की घोषणा करते जाते हैं। ना तो बीजेपी, ना कांग्रेस और ना ही आरजेडी के नेताओं को इसकी सटीक जानकारी होगी कि बिहार कितने के कर्ज में है…लेकिन बांटने के लिए सभी तैयार हैं। नीतीश के अलावा सभी को लगता है कि 10 लाख नौकरियां तो बक्से में बंद हैं…बस सत्ता मिली और बक्से का ढक्कन खोलना बाकी होगा।

सवाल ये है कि क्या जनता अभी तक नेताओं के झांसे में आ रही है? अगर नहीं आ रही है तो नेताओं को अब थोड़ा समझदार हो जाना चाहिए…। और अगर जनता झांसे में आ रही है…तो उन्हें भी समझदार होना पड़ेगा क्योंकि नेता तो सत्ता की चाबी से अपनी दुनिया संवार लेंगे…लेकिन आम लोगों की जिन्दगी फिर वैसी की वैसी रह जाएगी।

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