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सरकारी ट्रेन, सरकारी ख़त और कभी सरकारी हीरो रहे अमिताभ बच्चन के लिए स्मिता पाटिल का वो गाना

देश

सरकारी ट्रेन, सरकारी ख़त और कभी सरकारी हीरो रहे अमिताभ बच्चन के लिए स्मिता पाटिल का वो गाना

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अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म है शक्ति

फिल्म का एक गाना है जो इस तरह शुरू होता है–

हमें बस ये पता है वो बहुत ही खूबसूरत है

लिफाफे के लिए लेकिन पते की भी जरूरत है

तो हमारे देश की गोल्डन जुबली सरकार  ने … जिसने …देश में कोरोना का पहला मामला आने के 55 दिन बाद लॉकडाउन लगाया और अब लॉकडाउन के ठीक 50 दिन बाद उसे ये ख्याल आया है कि जो लोग देश की राजधानी दिल्ली में फंस गए हैं, उन्हें तो कम से कम उनके राज्य भेज ही दिया जाए।

हमने सनम को
हमने सनम को ख़त लिखा
ख़त में लिखा
ऐ दिलरुबा दिल की गली
शहर-ए-वफ़ा

अब आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर 50 दिन बाद दिल्ली से 15 जगह की रेल सेवा क्यों शुरू हुई ?

इस सवाल का जवाब एक ख़त में है

पहुँचे ये ख़त जाने कहाँ
जाने बने क्या दास्ताँ
पहुँचे ये ख़त जाने कहाँ
जाने बने क्या दास्ताँ
उस पर रक़ीबों का ये डर
लग जाये उनके हाथ गर
कितना बुरा अंजाम हो
दिल मुफ़्त में बदनाम हो
ऐसा न हो ऐसा न हो
अपने खुदा से रात दिन माँगा किये ये दुआ


ये ख़त जो होम सेक्रेटरी अजय भल्ला ने सभी राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को लिखा है —

 Centre has said it has noted with great concern that migrant workers continue to walk on roads and railway tracks to return to their native places …”Since their movement by buses and ‘Shramik’ special trains has already been allowed to enable their travel to native places, all State/UT governments should ensure that migrant workers do not resort to walking on road and on railway tracks,”

मतलब ये कि सरकार जानती है कि गरीबों, दिहाड़ी मजदूरो, बच्चों, महिलाओं का हजार किलोमीटर पैदल चलना सिर्फ एक घटना नहीं है, राजनीति के नजरिए से ये केंद्र और राज्य दोनों सरकार… के लिए पब्लिक रिलेशन डिजास्टर है।  ये लोग जो लॉकडाउन और सोशल डिस्टेन्सिंग के कानून से नहीं डरे,  पुलिस की लाठियों से नहीं डरे, उनके विजुअल्स ने सरकार को डरा दिया है।  गरीबी और पेट की आग के सामने सरकार का कानून फेल हो गया है। मध्यवर्ग तो घरों में कैद है, लेकिन गरीब और मजदूर पुलिस की लाठियां खाकर भी सड़कों पर, रेल ट्रैक पर पैदल चल रहे हैं..जिन्हें बस में, श्रमिक स्पेशल में जगह मिल रही है, वो संख्या इतनी कम है, कि बाकी लोग ट्रक में, टैंकर में, जिसे जो साधन मिल रहा है उसमें सवार हो कर अपने गांव, घर के सफर पर निकल पड़े हैं। रोड और रेल एक्सीडेंट के बाद भी आजादी बाद का सबसे बड़ा पलायन जारी है। सकते में आई सरकार जो कर रही है वो सिर्फ  डैमैज कंट्रोल है।

स्वर्गीय स्मिता पाटिल जी गा रही हैं

हमने सनम को ख़त लिखा
ख़त में लिखा

पीपल का ये पत्ता नहीं
काग़ज़ का ये टुकड़ा नहीं
पीपल का ये पत्ता नहीं
काग़ज़ का ये टुकड़ा नहीं
इस दिल का ये अरमान है
इसमें हमारी जान है
ऐसा ग़ज़ब हो जाये ना
रस्ते में ये खो जाये ना
हमने बड़ी ताक़ीद की
डाला इसे जब डाक में
ये डाक बाबू से कहा


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