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भारत की चीन को नसीहत, कहा- LAC के समझौतों का होना चाहिए पालन

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भारत की चीन को नसीहत, कहा- LAC के समझौतों का होना चाहिए पालन

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भारत ने गुरुवार को एक बार फिर से चीन से कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के प्रबंधन के लिए हुए समझौतों का ‘ईमानदारी’ से पालन किया जाए. भारत का यह बयान पूर्वी लद्दाख में सीमा पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए होने वाली 16वीं दौर की सैन्य बैठक के तीन दिन पहले आया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘यह आवश्यक है कि भारत और चीन के बीच 1993 और 1996 में हुए उचित समझौतों का ईमानदारी से अनुपालन किया जाए.’

वह मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे. अरिंदम बागची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान का भी संदर्भ दिया कि भारत एलएसी पर स्थिति में एकतरफा बदलाव की किसी भी कोशिश को कभी स्वीकार नहीं करेगा. गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच 5 मई 2020 से गतिरोध चल रहा है, जिसकी वजह से पांगोंग त्सो झील क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसके बाद से इन इलाकों में दोनों पक्षों ने हजारों सैनिकों व भारी हथियारों की तैनाती कर रखी है.

दोनों देशों के बीच चल रही तनातनी के बीच 17 जुलाई को 16वें दौर की कोर-कमांडर स्तर की अहम वार्ता होगी. यह बैठक पूर्वी लद्दाख के चुशूल-मोल्डो मीटिंग पॉइंट पर होगी. सूत्रों की मानें तो इस मीटिंग में खासतौर से पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी की पेट्रोलिंग पॉइंट (PP-15) नंबर 15 पर डिसइंगेजमेंट के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जाएगी. पीपी-15 वह स्थान है, जहां पिछले 2 साल से दोनों देशों की एक-एक प्लाटून आमने सामने हैं. जानकारी के मुताबिक, पीपी-15 के अलावा भारत की तरफ से देपसंग प्लेन और देमचोकजैसे विवादित इलाकों के समाधान का मामला भी उठाया जा सकता है.

कोर कमांडर लेवल की इस वार्ता में भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल अनिन्दय सेनगुप्ता और चीन की तरफ से मेजर जनरल यांग लिन शामिल होंगे. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से इंडोनेशिया के बाली में गत 7 जून को हुई एक मुलाकात के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए सैनिकों की वापसी का मुद्दा उठाया था. इस दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से कहा था कि चीन एवं भारत के संबंधों में ‘सुधार की दिशा में प्रगति’ दिख रही है, क्योंकि दोनों देशों ने संवाद कायम रखा है और अपने मतभेदों का प्रभावी तरीके से प्रबंधन किया है.

India’s advice to China, said – LAC agreements should be followed

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