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बांग्लादेश और अडानी के बीच हुए विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

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बांग्लादेश और अडानी के बीच हुए विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

Adani
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मशहूर भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिकी रिसर्च एजेंसी हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट बहुत अधिक नुकसान पहुंचा रही है. रिपोर्ट के आने के बाद से ही अडानी के शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी है और बुधवार देर शाम अडानी ने अपना 20 हजार करोड़ का फुल सब्सक्राइब फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO)वापस ले लिया. अडानी की नेटवर्थ में अप्रत्याशित गिरावट आई है और वे दुनिया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट से निकलकर 16वें स्थान पर आ गए हैं. इन सभी घटनाक्रमों के बीच बांग्लादेश और अडानी पावर लिमिटेड के बीच हुए बिजली खरीद समझौते पर भी विवाद खड़ा हो गया है.

बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी UNB के मुताबिक, बांग्लादेश ने अडानी की कंपनी से मांग की है कि वो बिजली खरीद समझौते को संशोधित करे वरना वो इस समझौते को रद्द कर देगा. बांग्लादेश के साथ अडानी पावर लिमिटेड के इस विवाद पर गुरुवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से सवाल किया गया कि यह प्रोजेक्ट बहुत हद तक हमारी विदेश नीति का हिस्सा है. अब बांग्लादेश अडानी ग्रुप से कह रहा है कि वो इस समझौते को संशोधित करे वरना वो बिजली नहीं खरीदेगा. इससे पूरा प्रोजेक्ट ही अधर में दिख रहा है. बांग्लादेश के मंत्री भी इस मुद्दे पर बात करने भारत आए थे, इस पर कोई टिप्पणी?

जवाब में अरिंदम बागची ने कहा, ‘हम समझते हैं कि अपने पड़ोसियों के साथ हमारे आर्थिक संबंध हमारे विकास में भी मदद करते हैं. हम इस बारे में बात करते आए हैं कि हमारे पड़ोसियों को भारत के आर्थिक विकास से कैसे लाभ हो. हमने कोशिश की है कि हम उनके साथ कनेक्टिविटी, पावर ट्रांसमिशन को आसान बनाए. यह पड़ोसियों के प्रति हमारी रणनीति का अहम हिस्सा है, हमारे लिए हमारे पड़ोसी पहले हैं. लेकिन अगर कोई प्रोजेक्ट आर्थिक कारणों से प्रभाव में नहीं आ रहा तो इससे आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि हमारे रिश्ते खराब हो रहे हैं. हम कोशिश करेंगे कि कैसे दोनों देश व्यापार, ऊर्जा आदि के क्षेत्र में नजदीक आएं.’

अरिंदम बागची से यह भी पूछा गया कि अडानी को लेकर क्या किसी विदेशी सरकार ने भारत सरकार को अप्रोच किया है जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई सरकार इन सब चीजों के लिए हमें अप्रोच करेगी.’ बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते में विवाद बिजली परियोजना में इस्तेमाल होने वाले कोयले की कीमतों को लेकर हुआ है. अडानी पावर लिमिटेड झारखंड के गोड्डा जिले में 1,600 मेगावाट का बिजली संयंत्र स्थापित कर रही है जिसकी बिजली बांग्लादेश को बेची जाएगी. अडानी पावर लिमिटेड इस संयंत्र के लिए कोयला 400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से दे रहा है. बांग्लादेशी मीडिया में कहा जा रहा है कि ये कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से बहुत ज्यादा है. बांग्लादेश के एक अधिकारी ने कहा कि यह कीमत 250 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से कम होनी चाहिए.

खरीद समझौते से परिचित अधिकारियों ने बताया है कि बांग्लादेश में बिजली क्षेत्र के विकास की देखरेख करने वाली एजेंसी बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इस संबंध में अडानी की कंपनी को पत्र भी लिखा है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जनवरी के पहले हफ्ते में बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन राज्य मंत्री नसरुल हामिद एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पावर प्लांट की साइट पर आए थे और उसी दौरान उन्होंने इस बारे में अडानी पावर लिमिटेड को सूचित किया था.

बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी की कंपनी ने अपने समझौते में कोयले की कीमतों पर किसी तरह की छूट का प्रावधान नहीं रखा है. गोड्डा संयंत्र के लिए कोयले की वार्षिक जरूरत 70 से 90 लाख टन होने का अनुमान है. बांग्लादेश को एक यूनिट बिजली के लिए अडानी पावर लिमिटेड को 20-22 रुपये देने होंगे जो कि बहुत ज्यादा है. BPDB के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘आप इसकी तुलना बांग्लादेश में कोयले से चलने वाले संयंत्रों से खरीदी गई बिजली की कीमत से करें- यह 12 टका प्रति यूनिट से कम है.’

India’s Ministry of External Affairs responded to the dispute between Bangladesh and Adani

Asit Mandal

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