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हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए कितना खतरनाक है कोरोना ?

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हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए कितना खतरनाक है कोरोना ?

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कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा किन्हें है?

JAMA यानी Journal of the American Medical Association के ताजा रिसर्च से पता चला है कि कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा उन्हें है जिन्हें पहले से एक से ज्यादा बीमारियां हैं। न्यूयॉर्क के अस्पतालों में भर्ती 5700 से ज्यादा मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड के रिसर्च से कुछ अहम जानकारी सामने आई है।





एक से ज्यादा बीमारी होने पर बढ़ जाता है खतरा

पता चला है कि न्यूयॉर्क के अस्पतालों में कोरोना के मरीजों में सिर्फ 6% ऐसे थे जो पहले पूरी तरह स्वस्थ थे, किसी तरह की दवा का रेगुलर सेवन नहीं कर रहे थे। जबकि 80% मरीज ऐसे थे जिन्हें पहले से एक से ज्यादा बीमारियां थी। इन मरीजों में मुश्किल से 6% मरीज ही थे जिन्हें कोरोना संक्रमण से पहले सिर्फ एक बीमारी थी। निष्कर्ष ये है कि अगर किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा बीमारी है तो उसे कोरोना से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

इस रिसर्च में ये भी जानने की कोशिश की गई, कि पहले से हुई बीमारियों में क्या हम ये पता कर सकते हैं कि किस बीमारी के मरीजों को कोरोना ज्यादा संक्रमित कर रहा है। यानी उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति में फौरन ले आता है।

हाइपरटेंशन के मरीजों को है ज्यादा खतरा

रिसर्च से पता चला है कि अगर किसी को लाइफस्टाइल डिजीज जैसे  हाइपरटेंशन, मोटापा या  डायबिटीज है तो उनके लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।

खतरा हार्ट, किडनी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, HIV और हेपाटाइटिस के मरीजों को भी है मगर उनसे कम।

ये रिसर्च हमें बताता है कि कोरोना के वो मरीज जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है उनमें से हर दूसरा मरीज यानी 53% हाइपरटेंशन से पीड़ित है, जबकि दस में से चार यानी 42% मोटापा और हर तीसरा मरीज यानी 32% डायबिटीज का शिकार है।

WHO ने भी कहा है कि कोरोना का मरीज अगर 60 साल से ज्यादा उम्र का है तो ये उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। अगर मरीज बूढ़ा नहीं भी है लेकिन उसे पांच में से कोई एक बीमारी ( हाई बीपी, हार्ट, लंग्स, कैंसर या डायबिटीज) है तो उसे ज्यादा सावधान  रहना चाहिए।

JAMA के रिसर्च से ये भी पता चला है कि पहले से बीमार रहे मरीजों में से जिन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया उनमें से 88% को नहीं बचाया जा सका। जिन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी, उनमें से ज्यादातर पहले से डायबिटीज के मरीज थे।

रिसर्च का निचोड़ ये है कि उन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और उन्हें संक्रमण की स्थिति में फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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