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जो बाहर हैं, उन्हें लाएंगे, गले लगाएंगे – सीएम

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जो बाहर हैं, उन्हें लाएंगे, गले लगाएंगे – सीएम

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विभिन्न राज्यों में फंसे छात्रों और प्रवासी श्रमिकों को राज्य सरकार झारखण्ड वापस लाएगी। इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। केन्द्र सरकार की अनुमति मिलते ही झारखंड सरकार सक्रिय हो गयी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे झारखंड के करीब 10 लाख मजदूरों और छात्रों की वापसी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 आईएएस अधिकारियों को बतौर नोडल अफसर तैनात किया है। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री  से बात करके रेल परिचालन शुरू करने का भी आग्रह किया है ताकि फंसे लोगों को झारखंड वापस ला सके। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्रालय की ओर से जारी प्रोटोकॉल, सोशल डिस्टेंसिंग, स्क्रीनिंग का सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश भी दिया है।

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में पलामू एवं कोल्हान प्रमंडल के सांसदों एवं विधायकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात की, और सुझाव मांगे, ताकि फंसे लोगों को वापस लाया जा सके। ने उनसे ये भी आग्रह किया कि वो अपने क्षेत्रों के श्रमिक भाईयों को आश्वस्त करें कि सरकार हर हाल में फंसे मजदूरों को लाएगी। तब तक धैर्य बनाये रखें।

बैठक में लिए गये अहम फैसले और सुझाव

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न राज्यों से आ रहे श्रमिक भाईयों के लिए राज्य सरकार रोजगार की व्यवस्था का प्रयास करेगी। इसके लिए सरकार ने कार्य योजना तैयार कर रही है, जो जल्द धरातल पर उतरेगी।
  • सरकार मनरेगा पर नये गाइडलाइन लाने की तैयारी में जुटी है, ताकि अधिक रोजगार का सृजन हो सके। श्रमिकों को उनके गांव में ही रोजगार मिलेगा।
  • मौसम की वजह से किसानों की फसलों का जो नुकसान हुआ है, उसके आकलन का निर्देश  दे दिया गया है। आपदा प्रबंधन के तहत राज्य सरकार फसलों के नुकसान की भरपाई करेगी।
  • मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों ने आग्रह किया कि लॉक डाउन में टीकाकरण का कार्य नहीं रुके। बच्चों का टीकाकरण होता रहे।
  • सभी जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को जागरूक करें ताकि राशन वितरण के समय वे ग्रामीणों के साथ उपस्थित रहें और सुनिश्चित करें कि सभी को अनाज मिले।
  • बाहर से अपने गांव लौट रहे लोगों के लिए सामाजिक पुलिसिंग को सार्थक करना है। क्योंकि बाहर से आनेवाले लोगों में संक्रमण की संभावना हो सकती है। लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं।
  • जनप्रतिनिधि अपने स्तर से बाहर से आनेवाले लोगों की पहचान कर प्रशासन को सूचित करें, जिससे संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके।
  • चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा ने सुझाव दिया कि राज्य का अंदर जो लोग फंसे हैं, उन्हें अपने गृह जिला लाने की व्यवस्था होनी चाहिये। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को आवागमन की इजाजत मिलेगी, लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ राज्य के अंदर लागू होगी।
  • गढ़वा विधायक सह पेयजल मंत्री श्री मिथिलेश ठाकुर ने बताया कि राज्य में कहीं भी अगर खराब चापानल की शिकायत मिलती है तो उसे तीन दिन में ठीक करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अभियंता जिम्मेदार होंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, ओएसडी गोपालजी तिवारी, प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद और वरीय आप्त सचिव सुनील श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूरों की संख्या

राज्यफंसे मजदूरराज्यफंसे मजदूर
गुजरात1,00,500राजस्थान7500
महाराष्ट्र90,000गोवा6400
तमिलनाडु45,000ओडिशा5000
कर्नाटक35,000पंजाब5000
तेलंगाना26,000पश्चिम बंगाल4500
आंध्र प्रदेश17,000मध्य प्रदेश4000
हरियाणा16,000बिहार3000
दिल्ली12,000छत्तीसगढ़3000
उत्तर प्रदेश7000सिक्किम1100

इनके अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, दमन एवं दीव, अंडमान, पुद्दुचेरि जैसी जगहों पर भी 100 से 1000 तक मजदूर फंसे हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे झारखंड के करीब 10 लाख मजदूरों और छात्रों की वापसी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 आईएएस अधिकारियों को बतौर नोडल अफसर तैनात कर दिया है। राज्य सरकार ने राज्यों के हिसाब से नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है और उनके फोन नंबर भी जारी किये हैं, ताकि मजदूरों को संपर्क करने में आसानी हो। प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

घर वापसी : कितनी मुश्किल है राहें ?

झारखंड सरकार के श्रम विभाग द्वारा जारी किए गए टॉल फ्री नम्बर्स पर अबतक 33,155 कॉल्स प्राप्त हुए हैं, जिसमें राज्य के बाहर 9,50,539 लोगों के फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई है। इनमें 14,207 जगहों पर 6,41,205 प्रवासी मजदूरों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई है। यानी करीब 10 लाख लोगों को वापस लाने की जिम्मेदारी सरकार ने उठाई है। अब सवाल ये है कि ये कैसे संभव होगा और क्या-क्या चुनौतियां सामने आएंगी?

  • अलग-अलग राज्यों के विभिन्न जिलों, शहरों में गांवों में फैले झारखंड के मजदूरों को सरकार इकट्ठा कैसे करेगी? अगर कोई एक जगह तय भी की, तो लॉकडाउन के दौरान वहां तक मजदूर कैसे पहुचेंगे?
  • उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में झारखंड के करीब 1 लाख मजदूर हैं। ये मुंबई, थाणे, कल्याण, नासिक, पुणे, जैसे शहरों में फैले हुए हैं। अब सरकार उन्हें किसी स्टेशन से भी उठाने की कोशिश करे, तो ये मजदूर वहां तक पहुंचेंगे कैसे?
  • कई मजदूर दूर-दराज के दुर्गम इलाकों में फंसे हैं, जैसे असम, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, मणिपुर आदि। इनमें से कई जगहों पर ट्रेन की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में इन मजदूरों को सरकार कैसे निकालेगी?
  • मान लिया जाए, कि वहां के स्थानीय अधिकारी इन मजदूरों के लिए पास निर्गत कर भी देते हैं, तो भी बिना बस-रेल आदि की सुविधा के, ये वहां से कैसे निकलेंगे?
  • सरकार अगर बसों का इंतजाम कर उन्हें निकालने का प्रयास करे, तो लंबी दूरी की इस यात्रा में इन्हें रास्ते में खाना कैसे मिलेगा ? छोटे बच्चों को दूध कैसे मिलेगा?
  • अगर इनमें से कोई कोरोना से संक्रमित हुआ, तो क्या ये कदम सभी यात्रियों को जान-बूझकर बीमार करने का जरिया नहीं बन जाएगा?
  • अगर स्क्रीनिंग भी हुई, तो ऐसे कोरोना पॉजिटिव पकड़ में नहीं आएंगे, जिनमें लक्षण दिखाई नहीं देते। भारत में करीब 90 फीसदी कोरोना के मरीज ऐसे ही पाए गये हैं।
  • इन्हें ट्रेनों से लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में ट्रेनों का परिचालन शुरु करना होगा। क्योंकि झारखंड के मजदूर लगभग हर राज्य- केन्द्रशासित प्रदेश में फंसे हैं। कुछ तो अंडमान जैसी जगहों पर हैं। इन्हें कैसे वापस लाएगी सरकार?
  • वापस पहुंचने के बाद भी क्या सरकार के पास करीब 10 लाख लोगों को आइसोलेशन में रखने की क्षमता है? उनके खाने-पीने और रहने के इंतजाम का खर्च सरकार उठा पाएगी? ये एक बड़ा प्रश्न है और सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारी करनी होगी।
  • करीब 6 लाख से ज्यादा मजदूरों के वापस आने के बाद उनके सामने काम की समस्या खड़ी होगी। क्या सरकार इतनी बड़ी संख्या में रोजगार दे सकती है? क्या मनरेगा का बजट इतना है कि इन सभी को अगले कुछ महीनों तक काम मिल सके?

कुल मिलाकर झारखंड सरकार ने अभी तक केवल प्रवासी मजदूरों की परेशानियां सुनी है, उनको लाने और लाने के बाद की परेशानियों के बारे में नहीं सोचा है। चलिए अगर एक बारगी ये मान भी लेते हैं कि सरकार के अधिकारियों के पास पूरा प्लान है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि झारखंड सरकार एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी उठाने जा रही है, तो अब तक की तमाम कोशिशों और सरकार की प्रतिष्ठा को पानी में मिला सकती है।

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