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दो महीने में जुटाए 1 लाख करोड़!

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दो महीने में जुटाए 1 लाख करोड़!

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reliance jio got investment of one lakh crores

वैश्विक कंपनी टीपीजी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स में 4,546.80 करोड़ रुपए का निवेश किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसने टीपीजी को अपनी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स में 4,546.80 करोड़ रुपये में 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। यह जियो प्लेटफॉर्म्स में पिछले आठ सप्ताह में नौवां बड़ा निवेश है। इसके साथ ही 49 दिनों के भीतर, जियो में कुल एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो चुका है। आरआईएल अब तक जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 1.02 लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम जुटा चुकी है।

कौन सी कंपनी है टीपीजी ?

टीपीजी एक प्रमुख वैश्विक वैकल्पिक परिसंपत्ति कंपनी (ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट फर्म) है, जिसकी स्थापना 1992 में 79 अरब डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों के प्रबंधन के साथ हुई थी। इसमें निजी इक्विटी, ग्रोथ इक्विटी, रियल एस्टेट और पब्लिक इक्विटी शामिल हैं। टीपीजी ने 25 वर्षों से अधिक के इतिहास में दुनिया भर में सैकड़ों पोर्टफोलियो कंपनियों का एक विस्तृत नेटवर्क बनाया है। वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों में इसके निवेश में एयर बीएनबी, उबेर और स्पॉटिफ़ाई जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

किसने कितना किया निवेश?

  1. सबसे पहले फेसबुक ने 22 अप्रैल को जियो प्लेटफार्म्स में 43,574 करोड़ रुपये में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी।
  2. इस सौदे के कुछ दिनों बाद दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी निवेशक कंपनी सिल्वर लेक ने जियो प्लेटफार्म्स में 5,665.75 करोड़ रुपये में 1.15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी।
  3. अमेरिका स्थित विस्टा इक्विटी पार्टनर्स ने 8 मई को जियो प्लेटफार्म्स में 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी।
  4. वैश्विक इक्विटी फर्म जनरल अटलांटिक ने 17 मई को कंपनी में 6,598.38 करोड़ रुपये में 1.34 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की।
  5. इसके बाद अमेरिकी इक्विटी निवेशक केकेआर ने 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी।
  6. पांच जून को अबु धाबी के सावरेन संपत्ति कोष मुबाडला ने जियो प्लेटफॉर्म्स की 1.85 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 9,093.60 करोड़ रुपये का निवेश किया।
  7. इसी दिन सिल्वरलेक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 0.93 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी के बदले 4,546.80 करोड़ रुपये का नया निवेश किया। इससे जियो प्लेटफॉर्म्स में सिल्वर लेक द्वारा किया गया कुल निवेश 10,202.55 करोड़ रुपये और कुल हिस्सेदारी 2.08 प्रतिशत हो गयी।
  8. अबु धाबी निवेश प्राधिकरण (एआईडीए) ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.16 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 5,683.50 करोड़ रुपये का निवेश किया.
  9. 13 जून को टीपीजी ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 4,546.80 करोड़ रुपए का निवेश किया।

मुकेश अंबानी का क्या है प्लान?

भारत के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में, अपनी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को मार्च 2021 से पहले कर्जमुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया था। जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश के इन सौदों तथा 53,125 करोड़ रुपये के राइट इश्यू के कारण अंबानी का लक्ष्य समय से काफी पहले ही पूरा होता दिख रहा है। ऐसा अनुमान है कि इस साल दिसंबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्जमुक्त हो जायेगी। मार्च तिमाही के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज का शुद्ध उधार 1.61 लाख करोड़ रुपये का था। कंपनी, जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश के इन सौदों तथा हालिया राइट इश्यू से करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है।

क्या करेगी जियो प्लेटफॉर्म्स?

जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई है। ये कंपनी एक ऐसे ‘डिजिटल भारत’ का निर्माण करना चाहती है जिसका फ़ायदा सभी 130 करोड़ भारतीयों और व्यवसायों को मिले। इसके लिए जियो के प्रमुख डिजिटल एप, डिजिटल ईकोसिस्टम और देश के नंबर एक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्लेटफ़ॉर्म को एक-साथ लाने का काम चल रहा है। रिलायंस जियो इंफ़ोकॉम लिमिटेड, जिसके 38 करोड़ 80 लाख ग्राहक हैं, जियो प्लेटफ़ॉर्म्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई बनी रहेगी। 

देश को क्या फायदा?

रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। पांच जून को खत्म हुए सप्ताह में, विदेशी मुद्रा में 8.22 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और इस वजह से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 501.70 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार की यह धनराशि एक वर्ष के आयात के खर्च के बराबर है। अगर दूसरे देशों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना करें तो इस मामले में भारत, चीन और जापान के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे विदेशी निवेश मुख्य वजह है। मार्च में जहां कुल विदेशी निवेश (FDI) 4 बिलियन डॉलर के आसपास था, वहीं केवल अप्रैल महीने में 2.1 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ। जून के पहले हफ्ते में विदेशी निवेशकों ने 2.75 बिलियन डॉलर मूल्य के स्टॉक खरीदे। इसमें रिलायंस जिओ में हुए करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश भी शामिल है। अन्य वजहों में, कच्चे पेट्रोलियम की कीमत एवं आयात में कमी, विदेश भ्रमण में गिरावट और कॉरपोरेट टैक्स में कमी भी शामिल हैं।

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