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Delhi-Ncr में पूरी स्क्रीन बुक कर बड़ी तादाद पर कश्मीरियों ने देखीं ‘द कश्मीर फाइल्स’

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Delhi-Ncr में पूरी स्क्रीन बुक कर बड़ी तादाद पर कश्मीरियों ने देखीं ‘द कश्मीर फाइल्स’

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निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ अब सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। ये फिल्म 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन की ऐतिहासिक घटना पर बनी है। रिलीज होने से पहले जम्मू में कश्मीरी पंडितों के लिए कई जगहों पर इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई। इस फिल्म को देखकर दर्शक इतना भावुक हो गए कि अपनी सीटों पर खड़े होकर आंसू बहाने लगे थे।

फिल्म की हर तरफ तारीफ हो रही है। कई लोग ग्रुप में इस फिल्म को देखने जा रहे है। इस बीच कल यानि शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में 100 से भी अधिक कश्मीरियों ने शिप्रा ionx हॉल में स्क्रीन बुक कर फिल्म देखी। एक साथ आये इतनी तादाद में लोगों को देख कर हर कोई हैरान रह गए। सभी ने फिल्म तो देखी ही इसके अलावा एक जुट दिखाने के लिए अपनी बाजू पर काली पट्टी बांधी हुई नजर आये। कइयों का कहना है कि फिल्म देख उनके आँख भर आये।

सभी का जोश देखने लायक था। सब ने थिएटर में ही वंदे मातरम, भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे लगाए। लोगों में फिल्म को लेकर कभी उत्साह देखने को मिला। इस दौरान सभी ने फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री के हौंसले की तारीफ की। साथ कहा कि सच को दिखाना हिम्मत का काम है व वो सब विवेक अग्निहोत्री उनके साथ है।

इस दौरान Vishal Aery, Ritesh Koul, Sunil Mantoo, Rajan, Mona, Vivek Kaul, Sanjay Pandita , Ranjana Wangnoo, Sakshi A Mattoo समेत 100 से भी अधिक लोग शामिल थे।

फ़िल्मी की कहानी –
इसकी कहानी कश्मीरी पंडितों के दर्द को बताती है। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि 1990 में हुआ कश्मीरी नरसंहार भारतीय राजनीति का एक अहम और संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए इसे पर्दे पर उतारना कोई आसान काम नहीं था। 2 घंटे 40 मिनट की द कश्मीर फाइल्स के कुछ हिस्से आपको झकझोर सकते हैं. फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों संग हुई उस घटना को बयां करती है, जिसने उन्हें आतंकियों ने अपने ही घर से भागने पर मजबूर कर दिया था. फ़िल्म देश के टॉप कॉलेज की पॉलिसी, मीडिया और उस वक़्त की सरकार पर कटाक्ष करती है, इस फिल्म के जरिए विवेक 30 साल से दर्द लिए कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने की बात करते हैं.

द कश्मीर फाइल्स एक टाइम ट्रैवल के तौर पर काम करती है, जिसमें 1990 के वक़्त को मौजूदा पीढ़ी के साथ जोड़ने का काम किया गया है. दिल्ली में पढ़ने वाला छात्र अपने दादा की अस्थियों को विसर्जित करने कश्मीर जाता है. यहां पर ही उसकी मुलाक़ात दादा के दोस्तों से होती है और फिर पुरानी कहानियां निकलकर आती हैं कि किस तरह कश्मीरी पंडितों को उनके घर से खदेड़ा गया था. यहां से ही कहानी को रिवाइंड में मोड़ दिया गया है, जिसमें 1990 के वक़्त में किस तरह चीज़ें फैलीं और कश्मीरी पंडितों को भगाया गया, ये दर्शाया गया है. इसी दलदल में दोस्ती, सरकारी मशीनरी के एक पहलू को दिखाते हुए उसपर तंज कसे गए हैं.

Kashmiris watched ‘The Kashmir Files’ in large numbers after booking the entire screen in Delhi-Ncr

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