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किंग ऑफ गुड टाइम्स?

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किंग ऑफ गुड टाइम्स?

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देश के जाने-माने शराब कारोबारी और भगोड़े विजय माल्या, भारत में प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ ब्रिटेन के उच्च न्यायालय में मुकदमा हार गये हैं। लंदन में हाईकोर्ट के जजों ने माल्या कि उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2018 के प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया ये मामला धोखाधड़ी का ही लगता है।

फैसले के बाद किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक ने कहा कि वो ‘निराश हैं, लेकिन अपने वकीलों की सलाह के मुताबिक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। विजय माल्या के मुताबिक उनके खिलाफ केवल 2009 में आईडीबीआई बैंक से कुल 900 करोड़ रुपये के उधार की तीन किस्तों से संबंधित आरोप हैं। माल्या ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि निचली अदालत ने गलत तरीके से उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी जबकि साजिश के तहत उनके खिलाफ धोखाधड़ी और धनशोधन का मामला दर्ज किया गया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने माल्या के तर्कों को खारिज कर दिया।

अब आगे क्या ?

उच्च न्यायालय में माल्या की अपील खारिज होने के बाद अब उनके पास ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के लिए 14 दिन का समय है। ब्रिटेन का गृह विभाग को माल्या के भारत को प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले उस अपील के फैसले का इंतजार करना पड़ेगा। आपको बता दें कि विजय माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में हैं और अप्रैल 2017 से प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तारी के बाद जमानत पर हैं।

क्या हैं आरोप?

माल्या पर कथित रूप से 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी तथा मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज है। भारत व ब्रिटेन में उनकी कई संपत्ति जब्त की जा चुकी है। माल्या पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर भारतीय बैंकों को अपने डूब रहे किंगफिशर एयरलाइन्स के बारे में जानकारी नहीं दी, और इस दौरान बैंक से लिए गये लोन के पैसे को फॉर्मूला वन जैसे अन्य प्रोजेक्ट और मनी-लॉन्ड्रिंग में डाइवर्ट किया।

कहां हुई चूक?

  • देश के 17 निजी और सरकारी बैंकों ने कुछ सालों में ही किंगफिशर को करीब 9000 करोड़ रुपये का लोन (फंड-बेस्ड और नॉन-फंड) दिया। इनमें SBI ने सबसे ज्यादा करीब 1,700 करोड़, जबकि IDBI ने 900 करोड़ दिये।
  • ब्याज आदि जोड़कर ये रकम अब 10 हजार करोड़ पहुंच गई है। बैंकर्स की मानें तो ये भी न्यूनतम अनुमान है, वास्तविक रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है।
  • खास बात ये है कि ये सभी लोन, माल्या की पर्सनल गारंटी पर दिये गये। दूसरी गारंटी में किंगफिशर ब्रांड शामिल था। आपको बता दें कि ये अपनी तरह का अनोखा मामला था, जिसमें  जिसकी किसी कॉरपोरेट कंपनी के ब्रांड वैल्यू पर इतनी रकम दी गई।
  • बाद में इन बैंकों ने लोन के बड़े हिस्से को इक्विटी में बदल दिया। SBI  और ICICI ने किंगफिशर के शेयर को 64.48 प्रति शेयर के मूल्य पर बदला, जो कि उस समय के बाजार भाव से 60 फीसदी ज्यादा था।
  • 16 महीनों में ही ये शेयर, कौड़ियों के भाव तक गिर गये। तब से किंगफिशर सभी स्टॉक एक्सचेंजों से डी-लिस्ट हो चुका है।  
  • इतना तो साफ है कि इन शेयरों को बेचने से बैंकों को कुछ नहीं मिलनेवाला। ना ही वे कंपनी को फिर से खड़ा करने की सोच सकते हैं, क्योंकि एविएशन इंडस्ट्री के बारे ना तो बैंकों को कोई जानकारी है और ना ही मौजूदा माहौल उसके लायक है।
  • आम तौर तक लोन नहीं चुकाने के मामले में बैंक इतना इंतजार नहीं करते, और स्थिति खराब होने से पहले ही वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरु कर देते हैं। लेकिन माल्या के मामले में सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। ना तो समय पर शेयर बेचे और ना ही उसके भागने से पहले कोई कानूनी कार्रवाई की।  
  • अब इसे बैंकर्स की चूक मानें या मिलीभगत, लेकिन ये अधिकारी बैंकों के सर्वमान्य नियमों को भी ताक पर रखकर, एक ऐसे एयरलाइन को लोन-दर-लोन देते रहे, जिसने 8 सालों में कभी मुनाफा नहीं कमाया।

क्या बकाया वसूली कर पाएंगे बैंक?

बैंकर्स की मानें तो माल्या को भारत लाये जाने के बाद भी लोन की वसूली मुश्किल लग रही है। उसकी रियल एस्टेट संपत्ति, जिसमें मुंबई का ऑफिस, कुछ कारें और कीमती सामान हैं, की बिक्री से बैंकों को कुछ खास हासिल नहीं होनेवाला।

ऐसे में बैंकों की उम्मीदें यूनाइटेड स्पिरिट और यूनाइटेड ब्रिवरीज में माल्या की हिस्सेदारी पर टिकी हैं। यूनाइटेड ब्रिवरीज में माल्या की हिस्सेदारी 11.04 प्रतिशत है, जिसका बाजार मूल्य करीब 2696 करोड़ है, जबकि यूनाइटेड स्पिरिट में उसकी हिस्सेदारी 1.52 प्रतिशत है, जिसका बाजार मूल्य करीब 582 करोड़ रुपये है। आज की तारीख में अगर बैंक इस सारी हिस्सेदारी को बेच दें, तो भी उन्हें करीब 3,278 करोड़ रुपये ही मिलेंगे। ये भी ध्यान रखें कि इन्हें बेचना और पैसे वसूल करना भी कोई आसान काम नहीं है।

कुल मिलाकर जब तक माल्या खुद सारा पैसा देने को राजी ना हो जाएं, पैसों की वसूली की ज्यादा गुंजाइश नहीं है।

अब तक क्या हुआ?

  • विजय माल्या पर जांच एजेंसियों की नजर तब गई जब 2015 में उन्होंने शानदार ढंग से अपना 60वां जन्मदिन मनाया। गोवा के उनके किंगफिशर विला में दो दिन तक चली इस पार्टी में सैकड़ों लोग शामिल हुए। सोनू निगम और एनरिक जैसे गायकों के साथ माल्या ने स्टेज पर गाना गाया। माना जाता है कि इस पार्टी में 15 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए थे।
  • 2 मार्च 2016 को जब बैंकों का कसोर्टियम आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट में माल्या को रोकने और लोन के बकाया भुगतान कराये जाने की अपील कर रहा था, उस समय विजय माल्या का प्राइवेट जेट देश छोड़कर निकल रहा था।
  • अप्रैल 2016 में विदेश मंत्रालय ने विजय माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया और तबसे भारतीय और ब्रिटिश अदालतों में उनके खिलाफ मामला चल रहा है।
  • मनी लांड्रिंग रोधक कानून (पीएमएलए) से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान माल्या के वकील ने  दावा किया था कि उनके मुवक्किल गुपचुप तरीके से देश छोड़कर नहीं गए थे, बल्कि जिनेवा में वर्ल्ड मोटर स्पोर्ट की बैठक में भाग लेने गए थे।  ईडी के वकील ने इस दावे गलत बताते हुए पूछा कि ऐसा कौन है जो बैठक में भाग लेने के लिए 300 बैग और भारी मात्रा में सामान लेकर जाता है? 
  • माल्या के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में भारतीय अधिकारियों को अब तक सिर्फ इतनी सफलता मिली है कि माल्या को कई बार गिऱफ्तार किया गया। ये और बात है कि हर बार कुछ ही घंटों में उन्हें जमानत मिल गई।  
  • 18 फरवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने माल्या की वो अपील खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने ईडी को उनकी संपत्तियां जब्त करने और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किये जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। इस मामले में होली के बाद सुनवाई होनी थी, लेकिन इसी दौरान कोरोना के संक्रमण की वजह से सुनवाई टल गई।

क्या है मौजूदा स्थिति?

पिछले चार सालों में विजय माल्या ने बैंकों या जांच एजेंसियों से कभी हार नहीं मानी और खुद को सही साबित करने का प्रयास करते रहे। उन्होंने 2012 के बाद से बैंकों को एक पैसा नहीं दिया है और लगातार साबित करने में लगे हैं कि भुगतान नहीं करने की वजह उनके एयरलाइन्स बिजनेस का डूबना है, ना कि आर्थिक धोखाधड़ी।

फिलहाल विजय माल्या लंदन के पास, 115 करोड़ के महलनुमा घर में पूरे परिवार के साथ रह रहे हैं। अपने अच्छे दिनों में माल्या ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर थे। आज भी वो किंग की तरह ही जी रहे हैं।

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