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#Kisan: कोल्ड स्टोरेज का अर्थशास्त्र

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#Kisan: कोल्ड स्टोरेज का अर्थशास्त्र

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इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने कृषि के लिए 16 एक्शन प्वाइंट पेश किए थे। इसके जरिए वित्त मंत्री ने राज्य सरकारों को केंद्र सरकार के ओर से जारी तीन मॉडल कानून को अपनाने की ‘सलाह’ दी थी। ये कानून थे

  • a) The Model Agricultural Land Leasing Act, 2016
  •  b) The Agricultural Produce and Livestock Contract Farming and Services (Promotion & Facilitation) Act 2018
  • और c) Model Contract Farming Act, 2018

जाहिर है आर्डिनेंस के जरिए कृषि कानून पेश करने से काफी पहले से ही सरकार कृषि कानून में भारी बदलाव की पहल कर चुकी थी। लेकिन किसानी कानूनों को बजट के जरिए राज्य सरकारों पर थोपने के अलावा भी इस साल के बजट में कुछ और है जो आपको जानना चाहिए।किसानों की परेशानी समझना है तो बजट को गौर से पढ़िए…काफी कुछ समझ आ जाएगा। अगर आप इस साल के बजट पर गौर करें तो पाएंगे कि कृषि का बजट करीब 1.6 लाख करोड़ का है, वहीं ग्रामीण विकास का बजट करीब 1.2 लाख करोड़ का है। इसमें पीएमकिसान ( 2 हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों को साल में तीन किस्तों में कुल 6 हजार रुपये ) पर 75 हजार करोड़, खाद सब्सिडी पर 71 हजार करोड़ और फूड सब्सिडी पर 1.15 लाख करोड़ का खर्च है। इस तरह कैपिसिटी बिल्डिंग के लिए सरकार के पास ज्यादा रकम नहीं बचती। आपने गौर किया होगा कि अक्सर हमारे यहां इस तरह की तस्वीरें अखबार में छपती हैं कि किसानों ने सड़कों पर टमाटर फैंक दिया, या खेत में आलू के ऊपर ही ट्रैक्टर चला दिया, क्योंकि उनको फसल की वाजिब कीमत नहीं मिल रही थी। ऐसा क्यों होता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमार यहां जरूरत के मुकाबले बहुत कम कोल्ड स्टोरेज और एग्री प्रोसेसिंग प्लांट हैं। अब इसे आंकड़ों से समझिए। अभी देश में 8186 कोल्ड स्टोरेज हैं। इनमें 3.7 करोड़ टन भंडारण की क्षमता है। अब ये इतना कम है इसे इस तरह समझिए कि अकेले एक सब्जी आलू का एक सीजन में औसत उत्पादन हमारे यहां करीब 5.2 करोड़ टन होता है। यानी सारे देश के कोल्ड स्टोरेज को मिला दें तो हमारे पास इतनी क्षमता नहीं है कि हम सिर्फ एक सब्जी का एक सीजन का 70 फीसदी उपज ही स्टोर कर सकें। अब इसमें टमाटर, या दूसरी सब्जियां जोड़ दें तो कुल उत्पादन करीब 31 करोड़ टन है और भंडारण महज 3.7 करोड़ टन। आजादी के बाद से किसानों के लिए बड़ी- बड़ी बातें तो हर सरकार ने की है, लेकिन इस ओर कितना कम ध्यान दिया गया है, इसे इस तरह समझिए कि सभी कोल्ड स्टोरेज में से 95% निजी क्षेत्र में हैं, 3% कोआपरेटिव के हैं और महज 2% पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग हैं। 5000 MT Cold Storage की कुल लागत करीब 3.5 से 4 करोड़ है। यानी सरकार अगर  एक साल में 20 हजार करोड़ का आवंटन कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए करे तो महज दो सालों में जरूरत भर कोल्ड स्टोरेज बनाए जा सकते हैं। हम 90 फीसदी तक फलों और सब्जियों को बचा सकेंगे।  इससे कोल्ड स्टोरेज की क्षमता में इजाफा तो होगा ही, प्राइवेट कोल्ड स्टोरेज की मनमानी वसूली पर भी रोक लगेगी। कर्नाटक और झारखंड के किसानों की आय का फर्क समझना है तो कोल्ड स्टोरेज से समझिए।

कर्नाटक में देश में सबसे ज्यादा 3146 कोल्ड स्टोरेज हैं, जबकि झारखंड में महज 15. कोल्डस्टोरेज की वजह से कर्नाटक के किसान अनाज की खेती से फल और सब्जियों की खेती की ओर मुड़ पाए। आज कर्नाटक का किसान पंजाब के किसान के मुकाबले प्रति हेक्टेयर तीन गुनी ज्यादा आय हासिल कर पाता है। जबकि झारखंड देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है।  

कोल्ड स्टोरेज की तरह कैपिस्टी बिल्डिंग में दूसरी बड़ी जरूरत एग्री प्रोसेसिंग प्लांट की है। यहां भी सरकार ने चाबी प्राइवेट सेक्टर के हाथ में रख दी है।

हमारे यहां दुनियां का छठा सबसे बड़ा  Food & Grocery market है। इस बाजार में अब तक $32.75 bn का कुल निवेश हुआ है, जबकि सालाना कारोबार 2016 में $322 bn से बढ़कर इस साल $543 bn होने की संभावना है। kraft, mars,nestle,mccain,danone,Ferrero ,Delmonte , kagome,kellogg’s, pepsi, uniliver,perfetti, Cargill, coca cola, hershey’s, metro, Walmart, yakult,amazon, itc, Britannia, godrej agrovet जैसी कंपनियों के होते हुए भी कोल्ड चेन की ही तरह फूड प्रोसेसिंग में भी अभी हम बहुत पीछे हैं।

जब सरकार कहती है कि इस साल बजट में किसानों को 15 लाख करोड़ का कर्ज देने की व्यवस्था की गई है तो इस बड़ी सी तस्वीर में ये छोटी बातें छूट जाती हैं कि देश की अस्सी करोड़ आबादी जिस खेती पर जिंदा है उसपर रिसर्च के लिए हमारा बजट इस साल सिर्फ 8362 करोड़ है और मानसून आधारित भारत की अनिश्चित कृषि के लिए इंश्योरेंस के लिए इस साल महज 15,695 करोड़ का बजट है।

शून्य से सौ की गिनती अगर नब्बे की जगह सरकार शून्य से शुरू करती तो बड़ी तादाद में अमूल जैसे को-आपरेटिव बनाती, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर काम करती, लेकिन कानून बनाकर गरीबों का कल्याण करने में जो- अपुन ही भगवान है, वाली फीलिंग है, वो इन कामों में कहां आती है?

http://sh028.global.temp.domains/~hastagkh/kisan-andolan-nine-questions-of-the-farmers-which-the-media-will-never-ask/
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