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क्या आपने StopTheB कैंपेन के बारे में सुना है?

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क्या आपने StopTheB कैंपेन के बारे में सुना है?

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StopTheB campaign

भारतीय मूल की दो छात्राओं…वसुंधरा ओसवाल और उनकी छोटी बहन रिद्धि ओसवाल के ”स्टॉप द बी” (StopTheB) यानी स्टॉप द बुलिंग कैंपेन शुरु किया है। अब इनके कैंपेन को दुनिया भर के लोगों का समर्थन मिल रहा है। फुटबॉल के स्टार खिलाड़ी रोनाल्डिन्हो, अमेरिका स्थित शिक्षाविद् डॉ. समीर हिंदुजा और डॉ. जो मूडी (स्वीट्जरलैंड) जैसी बड़ी हस्तियां इस अभियान से जुड़ रही हैं।

एक स्टडी के मुताबिक दुनिया भर के एक तिहाई बच्चे अपने स्कूल में बुलिंग (Bullying) के शिकार हैं। कुछ पश्चिमी देशों में तो 40% बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार होते हैं। StopTheB कैंपेन का मकसद लोगों को इस बारे में जागरुक करना और इसके गंभीर परिणामों के प्रति शिक्षित करना है। इस मुहिम से जुड़े लोगों की मंशा है कि जल्द ही ऐसा माहौल तैयार हो, जिसमें ऐसा समस्या दिखने पर लोग तमाशा ना देखें, बल्कि आगे बढ़कर कमजोर बच्चों की मदद करें।

क्या है बुलिंग?

ज्यादातर देशों में बुलिंग की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। लेकिन इस ऐसे व्यवहार के तौर पर परिभाषित किया जाता है, जिसमें किसी के रंग, रुप, जाति, धर्म, क्षेत्रीयता, लैंगिक व्यवहार या परंपराओं की वजह से उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता हो। इसमें शारीरिक या मानसिक रुप से चोट पहुंचाना, मजाक उड़ाना, छेड़छाड़, भद्दे कमेंट करना और सोशल मीडिया पर अपमानजनक कमेंट करना शामिल है। कई बार बच्चे इसे मजाक मानते हुए समझ भी नहीं पाते कि वो क्या कर रहे हैं या क्या झेल रहे हैं। लेकिन यूनेस्को के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ एजुकेशन का मानना है कि लगातार होनेवाली ऐसी बुलिंग किसी के भी मानवाधिकारों का उल्लंघन है, और इसके शामिल दोनों पक्षों पर इसका दूरगामी मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं।

कौन हैं वसुंधरा और रिद्धि ओसवाल?

स्विट्जरलैंड में रह रहीं ये दोनों बहनें ओसवाल बिजनेस ग्रुप के मालिक पंकज ओसवाल की बेटियां हैं। इनमें वसुंधरा की उम्र 22 साल और रिद्धि की उम्र 16 साल है। ये दोनों बहनें स्विट्जरलैंड के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रही थीं। उन्हें स्कूल में स्थानीय स्टूडेंट्स की तरफ से कई तरह की असामान्य टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, दुत्कार झेलनी पड़ी। विरोध करने पर सोशल मीडिया पर भी इन्हें अपमानजनक कमेंट्स आने लगे। इन्होंने इसका डटकर मुकाबला करने का फैसला किया और स्टॉप द बुलिंग (StopTheB) कैंपेन की शुरुआत की। आज उनके इस अभियान को दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है।

क्या हुआ था इनके साथ?

भारतीय मूल का इन दोनों बच्चियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारतीय और बाहरी होने की वजह से उन्हें एक प्रतिष्ठित स्कूल में इतना कुछ झेलना पड़ेगा। आईये आपको विस्तार से बताएं उनके साथ क्या-क्या हुआ –

  • इसकी शुरुआत कुछ साल पहले हुई, जब रिद्धि को स्कूल में उसके ही बैच के कुछ छात्रों ने धमकाया। इसके बाद छेड़छाड़ और मारपीट भी शुरू हो हुई।
  • जब रिद्धि ने फिर भी स्कूल नहीं छोड़ा, तो साइबर हमले होने लगे, उसके रंग, भारतीयता, जाति और पृष्ठभूमि के बारे में नस्लवादी टिप्पणियां की जाने लगीं। उसे शारीरिक नुकसान पहुंचाने की भी धमकी दी गई।
  • इस दौरान बाकी छात्रों ने सारी चीजें देखते-समझते हुए भी कभी किसी तरह की मदद नहीं की। ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्हें डर था कि बीच-बचाव करने पर उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।
  • रिद्धि ने पैरेंट्स ने जब बुलिंग के खिलाफ स्कूल प्रशासन से शिकायत की, तो स्कूल ने उनके मूल्यांकन ग्रेड को कम कर दिया और बिना किसी उचित कारण के उनका री-एडमीशन कैंसिल कर दिया। इस वजह से उसे स्कूल छोड़ना पड़ा।
  • स्कूल छोड़ने के बाद भी बुलियों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उन्होंने सोशल मीडिया और ऑनलाइन ग्रुप चैट पर उसके बारे में उल्टे-सीधे पोस्ट डालने शुरु कर दिये। आखिरकार, रिद्धि को अपने दोस्तों के ग्रुप चैट्स से भी बाहर निकलना पड़ा और वो सोशल मीडिया से भी दूर हो गई।
  • बुलियों ने अब भी हार नहीं मानी। उसने जिस नए स्कूल में एडमिशन लिया, उसके बच्चों को खोजकर पहले से ही मैसेज भेजने शुरु कर दिये। नए स्कूल में आने से पहले ही उसके बारे में इतनी अफवाहें फैला दीं कि वहां कोई भी उससे बात करना नहीं चाहता था।
  • नये स्कूल में भी रिद्धि के बारे में इतनी नफरत और अफवाहें फैल गई थीं कि उसके लिए वहां शांति से पढ़ाई करना और दोस्तों से घुलना-मिलना मुश्किल हो गया।
  • इसकी वजह से उसकी मानसिक सेहत पर बहुत प्रभाव पड़ा। लगातार चिंता में रहने के कारण उसे घबराहट के दौरे पड़ने लगे थे और नींद आने में दिक्कत होने लगी थी।

कैसे शुरु किया StopTheB कैंपेन?

14 साल की रिद्धि को ये सब सिर्फ इसलिए झेलना पड़ा क्योंकि वो यूरोपीय नहीं थी, उसका रंग सफेद नहीं था और उसकी संस्कृति और परंपराएं उनसे अलग थीं। और ये सब एक ऐसे प्रतिष्ठित स्कूल में हो रहा था, जिसमें अपने बच्चों को पढ़ाना NRI और एशियाई मूल के लोगों का सपना होता है। नफरत के लिए रंग-रुप और संस्कृति भी कोई वजह हो सकती है, ये इस मासूम बच्चियों की समझ से बाहर था। इसलिए रिद्धि और उसकी बड़ी बहन वसुंधरा ने इसके खिलाफ आवाज उठाने की ठान ली और दोनों बहनों ने मिलकर स्टॉप द बी (StoptheB) कैंपेन शुरु किया।

इस ऑनलाइन कैंपेन में विशेष रूप से युवाओं और किशोरों पर फोकस किया गया है। इसमें कई तरह की ऑनलाइन प्रतियोगिताओं को शामिल कर, नई पीढ़ी को सही व्यवहार की जानकारी दी जाती है। वहीं अन्य पीड़ित बच्चों की कहानियां पेश कर, दुनिया भर के अन्य युवाओं को अपनी कहानी शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा ये कैंपेन (StopTheB) उन जिम्मेदार लोगों को भी दखल देने के लिए प्रेरित करता है, तो इसे देखकर भी बच्चों की बात कहकर अनदेखा कर देते हैं।

आपको बता दें कि दुनिया भर के स्कूलों में ताकत, पैसे, जाति, रंग-रुप या शक्ल-सूरत के आधार पर बच्चों को निशाना बनाया जाता है। इसके खिलाफ दुनिया के किसी भी देश में कोई कानून नहीं है, जबकि बच्चों पर इसका काफी गंभीर और लंबा मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। रिद्धि और वसुंधरा का कहना है कि हर माता-पिता को अपने बच्चों से इस बारे में बात करनी चाहिए, ताकि वे इस बारे में अधिक जान सकें कि उनके स्कूल में क्या चल रहा है। उन्हें ना सिर्फ अपने बच्चों को बुलियों से बचाना चाहिए बल्कि अपने बच्चों पर भी नज़र रखनी चाहिए ताकि वो दूसरों को अपना निशाना ना बना सकें।

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