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इस बार नहीं थमेगा मानसून!!

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इस बार नहीं थमेगा मानसून!!

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Due to La nina effect, monsoon will continue

अगस्त का महीना खत्म होनेवाला है, और जल्द ही सितंबर का महीना शुरु हो जाएगा। आम तौर पर जुलाई अंत तक बारिश(rain) खत्म हो जाती थी, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी बारिश हो रही है। यही नहीं, मौसम विभाग (meteorological department) का कहना है कि मानसून(monsoon) का असर ना सिर्फ सितंबर तक रहेगा, बल्कि सबसे ज्यादा असर भी इसी महीने में ही दिखेगा। यानी ये बारिश अभी थमनेवाली नहीं है….और इन सबके लिए जिम्मेदार है ला-नीना।

दरअसल, अमेरिकी मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि सितंबर-अक्टूबर 2020 से प्रशांत महासागर में ला-नीना का असर दिखेगा। इसके कारण भारत में मानसून का प्रभाव कुछ और दिनों तक रहेगा और सितंबर में बारिश की मात्रा भी बढ़ सकती है। इस थ्योरी से भारतीय मौसम वैज्ञानिक भी सहमत हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार देश में ला-नीना की संभावना पहले ही बता दी गई थी और सितंबर में आखिरी हफ्तों में 104 प्रतिशत से अधिक वर्षा होने की संभावना है।

देश भर में भारी बारिश ( प्रतीकात्मक फोटो)

क्या है एल-नीनो और ला-नीना?

अब सबसे बड़ा सवाल कि ये एल-नीनो और ला-नीना हैं क्या? दरअसल ये बार-बार आनेवाले मौसमी चक्र के दो हिस्से हैं। इनकी वजह से भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत महासागर की सतह और उसके ऊपर का तापमान बदल जाता है। एल-नीनो की वजह से गर्मी बढ़ती है और ला-नीना की वजह से ठंड।

दरअसल, जब विषुवत रेखा के आसपास प्रशांत महासागर में, पूर्व से पश्चिम की ओर चलनेवाली व्यापारिक हवाओं ( Trade winds) की गति ज्यादा होती है, तो समुद्र तल का ठंडा पानी ऊपर आ जाता है, जिसकी वजह से समुद्री सतह और उसके आसपास का वातावरण ठंडा हो जाता है। इसे ला-नीना एफेक्ट कहते हैं। वहीं जब ये हवाएं कमजोर होती हैं, तो समुद्र की सतह और आसपास का तापमान बढ़ जाता है। इसे एल-नीनो एफेक्ट कहते हैं।

इन दोनों ही स्थितियों में पूरे विश्व का मौसम प्रभावित होता है। एल-नीनो और ला-नीना हर 2 से 7 साल में अपना असर दिखाते हैं…जिसमें एल-नीनो का प्रभाव ज्यादा बार दिखता है। सामान्य तौर पर, इनका असर 9-12 महीने रहता है…लेकिन कभी-कभी कई साल तक दिख सकता है।

एल-नीनो और ला-नीना में तापमान का अंतर

भारत पर क्या होता है असर?

भारत में एल-नीनो की वजह से जलवायु में अनियमितता पैदा होती है, मौसम चक्र बदल जाता है, और सूखा पड़ने तक की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं ला-नीना की वजह से मानसून लंबा खिंच जाता है, ज्यादा बारिश होती है, और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

अभी क्या है स्थिति?

ऑस्ट्रेलियाई मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार ला-नीना की संभावना 50 से बढ़कर 70% तक पहुंच गई है। भारत में हो रही बारिश को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में सामान्य से 18% ज्यादा बारिश हुई, जुलाई में कुछ कम हुई, तो अगस्त में 110% बारिश रिकॉर्ड की गई। देश में केवल 14 % हिस्सा ऐसा है, जहां सामान्य से कम वर्षा हुई है।

मौसम में और क्या बदलाव होंगे?

विशेषज्ञों की मानें तो ला-नीना के कारण अगस्त के बचे हुए दिनों और सितंबर में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसका असर ठंड के मौसम पर भी पड़ेगा। इसकी वजह से, भारत के दक्षिणी हिस्सों के पहाड़ी इलाकों में पाला पड़ने की संभावना है और सर्दियों के मौसम में दक्षिणी राज्यों में ठंड भी ज्यादा रहेगी।

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