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नीतीश मंत्रिमंडल: सुशासन नहीं, समीकरण पर जोर

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नीतीश मंत्रिमंडल: सुशासन नहीं, समीकरण पर जोर

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nitish and his cabinet reflects the cast balance

सोमवार को नीतीश कुमार ने 14 मंत्रियों के साथ पथ एवं गोपनीयता की शपथ ली। अगले दिन कैबिनेट (cabinet) की पहली बैठक में मंत्रियों के विभाग भी तय कर दिये गये। इस बार बीजेपी कोटे से सबसे ज्यादा 7 मंत्री बनाए गए हैं, जेडीयू कोटे से 5 विधायकों को मंत्री पद मिला है। पहली नजर में ये साफ नजर आता है कि मंत्रिमंडल में पद एवं विभाग का बंटवारा योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि जातीय, क्षेत्रीय, राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के आधार पर किया गया।

nitish cabinet:किसको क्या मिला? 

  1. नीतीश कुमार (CM) –  गृह, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट (cabinet), निगरानी, निर्वाचन विभाग और आवंटित नहीं हुए अन्य सभी मंत्रालय
  2. तारकिशोर प्रसाद (डिप्टी सीएम) –  वित्त, वाणिज्यिक कर, पर्यावरण एवं वन, सूचना प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास मंत्रालय
  3. रेणु देवी (डिप्टी सीएम) –  पिछड़ी जाति का उत्थान एवं ईबीसी कल्याण विभाग, उद्योग मंत्रालय
  4. अशोक चौधरी (JDU) –  विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग
  5. मेवा लाल चौधरी (JDU)  शिक्षा विभाग
  6. विजय चौधरी (JDU)  ग्रामीण अभियंत्रण, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य मंत्रालय
  7. विजेंद्र यादव (JDU)  बिजली विभाग
  8. शीला देवी (JDU) परिवहन विभाग
  9. मंगल पांडेय (BJP)  स्वास्थ्य और पथ निर्माण विभाग
  10. अमरेंद्र प्रताप सिंह (BJP) – कृषि विभाग
  11. रामसूरत राय (BJP)   राजस्व और कानून मंत्रालय
  12. रामप्रीत पासवान (BJP) – लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग
  13. जीवेश मिश्रा (BJP) – पर्यटन, श्रम और खान एवं भूतत्व विभाग
  14. संतोष मांझी (HAM)  लघु सिंचाई, SC/ST कल्याण मंत्रालय
  15. मुकेश साहनी (VIP)  पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग
nitish kumar cabinet 1

अपने मंत्रियों को जानिये

तारकिशोर प्रसाद (डिप्टी सीएम) – सुशील मोदी की जगह वैश्य समुदाय से आने वाले तारकिशोर प्रसाद को डिप्टी सीएम बनाया गया है। 12वीं पास तारकिशोर प्रसाद को वे सभी मंत्रालय दिए गए हैं, जो पहले डिप्टी सीएम सुशील मोदी के पास थे। तारकिशोर प्रसाद जमीन से जुड़े हुए नेता माने जाते हैं और सीमांचल में उनका अच्छा प्रभाव है। इन्होंने कटिहार से लगातार चौथी बार चुनाव जीत दर्ज की है, लेकिन पहली बार मंत्री बने हैं। सीमांचल से पांच दशक बाद किसी नेता को इतना अहम पद मिला है।

रेणु देवी (डिप्टी सीएम) – बीजेपी ने चंद्रवंशी समाज के प्रेम कुमार की जगह, अतिपिछड़ा नोनिया समाज की रेणु देवी को डिप्टी सीएम जैसा अहम पद सौंपा है। इन्हें पंचायती राज, पिछड़ा एवं अत्यंत पिछड़ा कल्याण और उद्योग विभाग सौंपा गया है। रेणु देवी बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और बेतिया से चार बार चुनाव जीत चुकी हैं। रेणु देवी पहले भी मंत्री थीं, लेकिन उन्हें डिप्टी सीएम बनाकर महिला मतदाताओं को भी संदेश देने की कोशिश की गई है।

अशोक चौधरी – जेडीयू के एमएलसी को भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण और साइंट तथा टेक्नोलॉजी विभाग दिए गए हैं। महादलित समुदाय से आने वाले अशोक चौधरी जेडीयू में आने से पहले बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे और राहुल गांधी के करीबी नेता माने जाते थे। श्याम रजक के जाने के बाद अशोक चौधरी जेडीयू में दलित चेहरा बनकर उभरे। इन्हें चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने जेडीयू का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया था।

मेवालाल चौधरी – तारापुर के विधायक और कुशवाहा जाति के मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति रहते समय इन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2017 में चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद नीतीश कुमार ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था। बाद में उन्हें जेडीयू से भी निलंबित कर दिया गया था। अब ये पूरे शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी इन पर होगी।

शीला कुमारी – फुलपरास की विधायक शीला कुमारी को परिवहन विभाग सौंपा गया है। अतिपिछड़ा समुदाय की शीला मंडल ने पहली बार चुनाव लड़ा और सीधे मंत्री बन गईं। इनका मंत्री बनाया जाना इसलिए भी खास है क्योंकि फुलपरास से 42 साल बाद किसी नेता को कैबिनेट (cabinet) में जगह मिली है।

विजेंद्र यादव – सुपौल के जेडीयू विधायक विजेन्द्र यादव बिजली विभाग का जिम्मा मिला है। पिछली सरकार में मंत्री रहे विजेन्द्र यादव, नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं । विजेंद्र यादव ने साल 1990 में पहली बार विधान सभा चुनाव लड़ा और उसके बाद से अब तक हुए सभी चुनावों में विजयी रहे हैं। अपने इलाके में विकास कार्यों और कोशी नदी पर पुल बनवाने की वजह से उन्हें लोग कोशी के विश्वकर्मा भी कहते हैं।

विजय कुमार चौधरी – सरायरंजन के जेडीयू विधायक विजय चौधरी को ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, सूचना-जनसंपर्क तथा संसदीय कार्य का मंत्री बनाया गया है। विजय चौधरी पहली भी सरकार में रह चुके हैं और 2015 में विधान सभा अध्यक्ष बने थे। ये नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं और जेडीयू कोर टीम के सदस्य हैं।

मंगल पांडे – बीजेपी के एमएलसी मंगल पांडे को एक बार फिर स्वास्थ्य तथा पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी। लेकिन बीजेपी ने एक बार फिर इन्हीं पर अपना विश्वास जताया है।

अमरेंद्र प्रताप सिंह – आरा से विधायक चुने गए अमरेंद्र प्रताप सिंह को कृषि, सहकारिता और गन्ना विभाग का मंत्री बनाया गया है। 74 वर्षीय अमरेंद्र सिंह भाजपा के सबसे बुजुर्ग मंत्री हैं। इन्हें पिछली सरकार में सहकारिता मंत्री रहे राणा रणधीर सिंह की जगह, राजपूत समाज के प्रतिनिधि के तौर पर कैबिनेट (cabinet) में जगह दी गई है। अमरेंद्र प्रताप सिंह साल 2000 में पहली बार विधायक बने और पिछला चुनाव छोड़कर लगातार जीतते रहे हैं।

जीवेश मिश्रा – पहली बार मंत्री बने जीवेश मिश्रा को पर्यटन, श्रम और खान एवं भूतत्व मंत्रालय सौंपा गया है। इन्हें मुजफ्फरपुर से मंत्री रहे सुरेश शर्मा की जगह मिली है। जीवेश मिश्रा भूमिहार हैं, और दरभंगा की चर्चित जाले सीट से जीते हैं। इन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विवादित कांग्रेस कैंडिडेट मशकूर उस्मानी को हराया है। जीवेश मिश्रा ने लगातार तीसरी बार चुनाव में जीत दर्ज की है।

रामप्रीत पासवान – मधुबनी के राजनगर से विधायक रामप्रीत पासवान के पास लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की जिम्मेवारी रहेगी। बीजेपी ने LJP के मूलवोट बैंक दुसाध समुदाय को ध्यान में रखते हुए इन्हें कैबिनेट (cabinet) में शामिल किया है।

रामसूरत राय – मुजफ्फरपुर के औराई से ये पहली बार विधायक चुने गए रामसूरत राय को राजस्व एवं विधि विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन्हें नंदकिशोर यादव की जगह मंत्री बनाया गया है। रामसूरत राय 2015 का चुनाव हार गए थे, लेकिन इन्हें पार्टी के पुराने और कर्मठ नेताओं में गिना जाता है। ये नित्यानंद के करीबी भी बताये जाते हैं। इनके जरिए यादव समुदाय को सियासी संदेश देने की कोशिश की गई है।  

संतोष मांझी – एनडीए के सहयोगी दल के नाते जीतनराम मांझी के बेटे संतोष मांझी लघु और सिंचाई तथा अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री बनाया गया है। संतोष मांझी इस बार चुनाव नहीं लड़े थेऔर वो फिलहाल बिहार विधानसभा परिषद के सदस्य हैं। हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के प्रधान महासचिव और पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सुमन मांझी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया और 2003 में पीएचडी कंप्लीट किया था।

मुकेश सहनी – वीआईपी से मुकेश सहनी को मंत्री बनाया गया है। इन्हें पशुपालन और मत्स्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खास बात ये है कि ये खुद तो चुनाव हार गए लेकिन उनकी पार्टी ने 4 सीटें जीतीं। एनडीए के बहुमत में इनकी पार्टी का रोल भी अहम है।

nitish kumar OATH

हम किसी से कम नहीं!

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और इलेक्शन वॉच के अध्ययन के अनुसार, नीतीश कैबिनेट (cabinet) के 14 मंत्रियों में से आठ (57 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। वहीं छह (43 प्रतिशत) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आपराधिक मामलों वाले 8 मंत्रियों में से बीजेपी के 4, जेडीयू के 2 और हम व वीआईपी के एक-एक शामिल हैं।

मेवालाल चौधरी का नाम बीएयू भर्ती घोटाले में सामने आया था और राजभवन के आदेश से उनके खिलाफ 161 सहायक प्रोफेसर और कनिष्ठ वैज्ञानिकों की नियुक्ति के मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बता दें कि 12.31 रुपए की घोषित संपत्ति के साथ चौधरी सबसे अमीर मंत्री हैं। वहीं, 14 मंत्रियों की औसत संपत्ति 3.93 करोड़ रुपए है।

मेवालाल चौधरी ने अपने शपथ पत्र में आईपीसी के तहत एक आपराधिक मामला और चार गंभीर मामले घोषित किए हैं। पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री मुकेश सहनी ने पांच आपराधिक मामलों और गंभीर प्रकृति के तीन मामलों की घोषणा की है। बीजेपी के जिवेश कुमार मिश्रा ने भी पांच आपराधिक मामलों और गंभीर प्रकृति के चार मामलों की घोषणा की है। वहीं पांच अन्य हैं जिनके खिलाफ अलग-अलग प्रकृति के आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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