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Nitish: शिक्षामंत्री मेवालाल से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

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Nitish: शिक्षामंत्री मेवालाल से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

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शिक्षा मंत्री का पद अधिकांश राज्यों में अत्यंत गौरव और गरिमा का पद माना जाता है, नीतीश (nitish) के बिहार में ये पद …एक प्रसाद है, मेवा है.. इसलिए मेवालाल को दिया गया। अगर मंजू वर्मा की चेरिया बरियारपुर से टिकट देने की वजह मुजफ्फरपुर बालिका कांड में उनका नामित होना था, तो मेवालाल इस कसौटी पर किसी तरह कमतर नहीं। कहते हैं शिक्षा सबसे बड़ा धन है, मेवालाल जी से बेहतर ये कोई नहीं जानता

मेवालाल जी ने बिहार का विकास करने की ठान ली है, इसलिए परेशान करने वाले सवाल पूछनेवाले रिपोर्टर को उन्हेंने समझाया – विकास पर बात करिए ना !

 वो राज्य के इतिहास के पहले शिक्षामंत्री हैं जिन पर वीसी रहते, 160 एसिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में धांधली करने का आरोप लगा, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की जांच हुई, आरोप सही पाए गए, राज्यपाल के आदेश से उनके ऊपर मामला दर्ज किया गया, फरार रहते हुए हाईकोर्ट से बेल मिला, जेडीयू से निष्कासित हुए, मुंगेर के तारापुर से चुनाव जीता और नीतीश कुमार ने उन्हें उपेंद्र कुशवाहा की काट के लिए, लव-कुश समीकरण साधने के लिए जेडीयू के कोटे से शिक्षा मंत्री बनाया। वो देश के किसी राज्य के पहले शिक्षामंत्री हैं, जिनकी नियुक्ति ने देश के राष्ट्रपति को आहत किया होगा, क्योंकि कुलाधिपति और बिहार के तत्कालीन राज्यपाल के तौर पर उन्होंने मेवालाल पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। राजनीति में नैतिकता नीतीश के लिए मुद्दा नहीं है, लेकिन इससे विपक्ष को जरूर हमलावर होने का मौका मिल गया है।  माले शिक्षा मंत्री की बर्खास्त किए जाने की मांग पूरी करने तक धारावाहिक आंदोलन की चेतावनी दे रहा है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने भी शिक्षा मंत्री के खिलाफ DGP को पत्र लिखा है

सोशल मीडिया में आरजेडी की ओर से शेयर किया गया वो वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें दिखाया गया है कि एक यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी की खुद की शिक्षा का स्तर ये है कि उन्हें राष्ट्रगान भी पूरी तरह याद नहीं।

नीतीश कैबिनेट में 14 में से 13 मंत्री करोड़पति हैं, आठ के ऊपर क्रिमिनल केस दर्ज हैं, छह के ऊपर तो बेहद संगीन मामले दर्ज हैं। 14 में 4 मंत्रियों ने आठवीं से बारहवीं तक ही पढाई की है।   जाहिर है बिहार में मंत्री का पद न सर्वोच्च गरिमा का है, न योग्यता का। लेकिन सवाल है क्या बिहार का शिक्षामंत्री का पद मेवालाल को दिया जाना चाहिए था ? नीतीश कुमार बिहार के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने स्कूली  शिक्षा को ठेके पर दे दिया। बिहार में चार लाख शिक्षक दैनिक मजदूरों से कम रकम पर बच्चों को कलाम बनने की तालीम दे रहे हैं। और जब ये रेगुलर किए जाने या सैलरी बढाने की मांग करते हैं तो इन पर पुलिस की लाठियां बरसती हैं। भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि देश में 9 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं, इनमें से एक तिहाई वैकेंसी अकेले बिहार की हैं। ऐसे वक्त में जबकि दिल्ली में मनीष सिसोदिया सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बना रहे हैं, ट्रेनिंग के  लिए टीचर्स को जापान भेज रहे हैं, बिहार में शिक्षक अपनी सैलरी और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य ब्लॉक स्तर पर स्टेट ऑफ द आर्ट स्कूल खोल रहे हैं, वहीं बिहार में जिला स्तर पर SC बच्चों के लिए अंबेडकर हॉस्टल तक नहीं बन रहे। झारखंड और राजस्थान में बच्चों को स्कॉलरशिप मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्टेट स्कॉलरशिप पोर्टल हैं, बिहार में बच्चों का वजीफा सालों साल से बाकी है, कुछ का 2019 का तो कइयों का 2012 का।

शिक्षा मंत्री मेवालाल से हमें ये शिक्षा मिलती है कि हमें विजिलेंस की जांच और अदालत में मुकदमे से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि जिस तरह एक स्टूडेंट इम्तिहान की तैयारी करता है, उसी एकाग्रता से विधायक बनने की कोशिश करनी चाहिए। चुनाव में जीत गए तो जो लोग पहले जब्ती-कुर्की की घुड़की देते थे, अब ट्रांसफर, पोस्टिंग के लिए रिश्वत पहुंचाएंगे। यही तो विकास है …..जिसकी बात मेवालाल जी कह रहे हैं …वैसे …बिहार की जनता को भगावान को धन्यवाद देना चाहिए… चेरिया बरियारपुर से अगर मंजू वर्मा राजवंशी महतो से चुनाव न हारतीं तो शायद वो मेवालाल की जगह होतीं।

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