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भाजपा का अब पंजाब पर फोकस! समझिए कृषि कानूनों की वापसी के सियासी मायने

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भाजपा का अब पंजाब पर फोकस! समझिए कृषि कानूनों की वापसी के सियासी मायने

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आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का बड़ा फैसला सुनाया। पीएम ने कहा कि संसद सत्र में इस कानून को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि शायद इस कानून को लेकर हम किसानों को समझा नहीं पाए। विपक्ष सरकार के इस फैसले को किसानों की बड़ी जीत बता रहा है। 

माना जा रहा है कि अगले साल पांच राज्यों खासतौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला किया है। बताया जा रहा है कि सरकार को लगातार इस बात का फीडबैक मिल रहा था कि जिस तरह किसान अभी तक आंदोलन पर बैठे हैं, ऐसे में यदि कृषि कानून वापिस नहीं लिए गए तो भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह फीडबैक देने वालों में भाजपा सांसद, विधायक और उनके जमीनी कार्यकर्ता थे। कई जगहों पर भाजपा नेताओं को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था। कुछ जानकार इसे लखीमपुर खीरी कांड से जोड़कर भी देख रहे हैं। 

कृषि कानूनों की ‘रणनीतिक वापसी’ बीजेपी को सियासी तौर पर लाभ दिला सकती है। पार्टी की कोशिश पंजाब के चुनावी खेल में वापसी की है, तो उत्तर प्रदेश में अपने किले को और मजबूत बनाने की है। यूपी के पश्चिमी इलाके में कृषि कानूनों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला है। पंजाब में बीजेपी के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ गठबंधन का रास्ता साफ हो गया है, जहां चुनावी तालमेल के लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने कृषि कानूनों की वापसी की पूर्व शर्त रख दी थी। वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और जयंत चौधरी का राष्ट्रीय लोक दल कृषि कानून के मुद्दे पर पश्चिमी यूपी में किसानों को एकजुट करने में लगा हुआ है। बीजेपी को अब उम्मीद होगी कि उसने यूपी चुनाव में अपने खिलाफ दिख रहे सबसे बड़े मुद्दे को निपटा दिया है। अगले तीन महीनों से भी कम समय में पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होंगे। हालांकि विपक्ष कृषि कानूनों की वापसी को अपनी जीत के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा है।

सरकार के इनसाइडर्स की मानें तो प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और सरकार को यह भान था कि कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के एक साल से भी ज्यादा समय से चल रहे आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। सरकार को यह महसूस हुआ कि स्थिति ऐसी है, जैसे कि हम राष्ट्र विरोधी ताकतों के हाथों खेल रहे हों, जोकि देश के ताने बाने और सामुदायिक स्तर पर भाईचारे की भावना को बिगाड़ना चाहता हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘तीनों कृषि कानूनों की वापसी का सबसे ज्यादा दुख प्रधानमंत्री को होगा, क्योंकि इन कानूनों को उन्होंने एक पवित्र सोच के साथ आगे बढ़ाया था, ताकि किसानों की आय में इजाफा हो। किसानों की एक बड़ी संख्या ने इन कानूनों का समर्थन किया था और प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भी इसका जिक्र किया।’

Now focus of BJP on Punjab! Understand the political meaning of the return of agricultural laws

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