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फिर बढ़ने लगे पेट्रोल-डीजल के दाम!

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फिर बढ़ने लगे पेट्रोल-डीजल के दाम!

petrol-diesel prices increased again
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तेल कंपनियों ने बुधवार को लगातार चौथे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम में क्रमश: 40 पैसे प्रति लीटर और 45 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। पिछले चार दिनों के दौरान, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 2.14 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.23 प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

क्यूं बढ़ रही हैं कीमतें?

कोरोनावायरस महामारी के चलते सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 16 मार्च से पेट्रोल और डीजल की कीमतों की रोजाना समीक्षा रोक दी थी। हालांकि ATF और LPG की कीमतों की नियमित समीक्षा की जा रही थी। 83 दिन के बाद, रविवार से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (HPCL, BPCL, IOC) ने रोजाना पेट्रोल-डीज़ल कीमतों की समीक्षा शुरू कर दी है, इसीलिए अब कीमतों में हर रोज बदलाव हो रहा है।

क्या कर रही है सरकार?

मार्च के बाद से, केंद्र सरकार ने दोनों ईंधन पर दो बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उठाने के लिए सरकार ने बीते 14 मार्च को, पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लेकिन उस वक्त कंपनियों ने इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला। उसके बाद सरकार ने 6 मई को एक बार फिर एक्साइज ड्यूटी में, पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल में 13 रुपये प्रति लीटर का इज़ाफा कर दिया। हालांकि, इससे खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं हुई क्योंकि करों में बढ़ोतरी कच्चे तेल की दरों में भारी गिरावट के कारण हुई थी। लेकिन अब उसका असर दिखने लगा है।

अंंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है स्थिति?

बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल, 41 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। कीमतों में स्थिरता लाने के लिए शनिवार को हुई बैठक में ओपेक, रुस और अन्य उत्पादक देशों (OPEC+) ने जुलाई तक उत्पादन में रिकॉर्ड 9.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कटौती पर सहमति जताई है। इस वजह से पिछले कुछ सत्रों से क्रूड की कीमतों में थोड़ी तेजी देखी जा रही है। वहीं डॉलर के मजबूत होने से भी कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।

कोरोना के संकट में सरकार को पैसे चाहिए, इसलिए टैक्स बढ़ा दिया। तेल कंपनियों को कम बिक्री और करों की भरपाई के लिए पैसे चाहिए, इसलिए दाम बढ़ा दिये। लेकिन किसानों, ट्रांसपोर्टरों और उद्योग-जगत को इस लॉकडाउन की वजह से जो घाटा हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा ? पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता पर जो बोझ बढ़ेगा, उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या सरकार ये समझती है, कि इस दौरान केवल उसका नुकसान हुआ है? क्या किसान, मध्य वर्ग या उद्योग इस दौरान मुनाफा काट रहे थे, और अब उनसे वसूली का वक्त आ गया है?

Shailendra

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