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जान बचा सकता है ऑक्सीमीटर!

कोरोना जरुर पढ़ें बड़ी खबर

जान बचा सकता है ऑक्सीमीटर!

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It can save your life

इन दिनों ऑक्सीमीटर काफी चर्चा में है। खास तौर पर फेक ऑक्सीमीटर ऐप के जरिये ऑनलाइन ठगी का बाजार गर्म है। हो सकता है आपके पास भी ऐसा मैसेज आया हो, जिसमें ऑक्सीमीटर ऐप को डाउनलोड करने के लिए लिंक भेजा गया हो। ऐसे किसी लिंक पर क्लिक ना करें..क्योंकि ये आपकी जान बचानेवाला नहीं, बल्कि आपकी जेब खाली करने का तरीका है।

लेकिन क्या आपको पता है कि कोरोना महामारी के इस दौर में ऑक्सीमीटर कितना जरुरी है? क्या आप जानते हैं कि एसिम्टोमैटिक यानी बिना लक्षणों के कोरोना केस में, या होम क्वारंटीन के दौरान…आपके घर में ऑक्सीमीटर का होना कितना जरुरी है?

क्या होता है पल्स ऑक्सीमीटर?

ये हाइपोक्सेमिया यानी खून में ऑक्सीजन की कम मात्रा का पता लगानेवाली मशीन है। सबसे खास बात ये है कि इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और ये बाजार में सस्ती दरों पर उपलब्ध है। अस्पतालों में डॉक्टर्स भी इसे अनिवार्य उपकरण की तरह अपने साथ रखते हैं।

क्यों जरुरी है पल्स ऑक्सीमीटर?

दरअसल, कोरोना के मामूली लक्षण पाए जाने पर अस्पताल जाने की जरुरत नहीं पड़ती और डॉक्टर भी मरीज को घर में ही आराम करने की सलाह देते हैं। लेकिन ये कोरोना तब खतरनाक हो जाता है, जब इसका संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसी हालत में खून में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और वेंटिलेटर पर ना रखा जाए, तो मरीज की जान जा सकती है।

अब देश में कोरोना के 60 से 70 फीसदी मरीज एसिम्टोमैटिक हैं यानी इनमें कोरोना के बहुत मामूली या नहीं दिखाई पड़नेवाले लक्षण होते हैं। जैसे मामूली खांसी या गले में दर्द, हल्का बुखार आदि। लेकिन कोरोना का संक्रमण कब फेफड़ों तक पहुंच जाए, इसका पता नहीं चलता और मरीज गंभीर हालत होने पर ही अस्पताल का रुख करता है। लेकिन, अगर समय पर भर्ती ना हो सके या मेडिकल सुविधा नहीं मिल सकी, तो ये स्थिति जानलेवा साबित होती है।

कई बार तो खून में ऑक्सीजन का स्तर इतनी तेजी से कम हो जाता है कि जब तक मरीज अस्पताल तक पहुंचे, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।अब सवाल ये है कि किसी को ये पता कैसे चले कि कोरोना के संक्रमण की वजह से उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया है?और अब अस्पताल का रुख करना चाहिए? यही बताता है ऑक्सीमीटर।

काम कैसे करता है ऑक्सीमीटर?

इसमें एक क्लिप से जुड़ा मॉनिटर होता है और जब आप क्लिप में अपनी उंगली रखते हैं, तो ये आपकी पल्स रेट और खून में मौजूद ऑक्सीजन का परसेंटेज (SpO2) बताता है। अगर आपकी पल्स रेट 60 से 100 के बीच है, और ऑक्सीजन की मात्रा 95% से 100 % के बीच है, तो आप सुरक्षित रेंज में हैं। अगर इससे कम है, तो आपको फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लेकिन अगर ऑक्सीजन की मात्रा 90% से कम हो, तो फौरन अस्पताल में भर्ती हो जाएं।

क्यूं खरीदें ऑक्सीमीटर?

इन दिनों सस्ता, सुलभ और जरुरी होने की वजह से इसकी तेजी से बिक्री हो रही है और लोग घरों में फर्स्ट-एड किट के तौर पर इसे रख रहे हैं। कोरोना के इस दौर में ये जान बचानेवाला उपकरण साबित हो सकता है। लेकिन ध्यान रखें, इससे कोरोना की टेस्टिंग नहीं होती। क्योंकि फेफड़ों के इन्फेक्शन या इनके ढंग से काम नहीं करने की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इससे इतना जरुर पता लगता है आपको फौरन मेडिकल हेल्प की जरुरत है या नहीं।

कहां से, कौन सा ऑक्सीमीटर खरीदें?

सबसे बेहतर होगा कि आप ये उपकरण किसी प्रतिष्ठित दवा-विक्रेता या मेडिकल स्टोर से खरीदें। ज्यादातर दवा दुकानों पर 1500-2000 रुपये में, विभिन्न कंपनियों के ऑक्सीमीटर उपलब्ध हैं। मेडिकल इक्वीपमेंट बनानेवाली जिस कंपनी पर आपको भरोसा हो, उस कंपनी का ऑक्सीमीटर खरीद लें। अगर आप भारतीय कंपनियों का ही ऑक्सीमीटर खरीदना चाहते हैं तो एम्बीटेक, ऑक्सीसैट, होम मेडिक्स जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट ले सकते हैं।

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