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#Rajinikanth: अभी या कभी नहीं #NowOrNever

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#Rajinikanth: अभी या कभी नहीं #NowOrNever

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70 साल की उम्र, राजनीति में शुरूआत करने की नहीं होती, लेकिन there is nothing that Rajni kant’…तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत (#Rajinikanth) ने  कहा है कि  31 दिसंबर को उनकी पार्टी का गठन होगा और करीब पांच महीने बाद जब तमिलनाडु में एसेंबली के चुनाव होंगे, तब …

अभी या फिर कभी नहीं। चाहे इसके लिए मुझे जान ही क्यों न देनी पड़े…हम राजनीति बदलेंगे, हम सत्ता बदलेंगे…जनता के समर्थन से ये चुनाव जरूर जीतेंगे…ये तय है कि तमिलनाडु में अब एक ईमानदार, पारदर्शी, सेकुलर और आध्यात्मिक सरकार होगी…एक चमत्कार…एक जादू …जरूर होगा

रजनीकांत

आंध्रप्रदेश में NTR जब 1982 में स्टेट इलेक्शन में शामिल हुए, तब वे 59 के थे। इसी साल 34 की जयललिता ने MGR के कहने पर AIADMK ज्वाइन की और 9 साल बाद 1991 में 43 की उम्र में तमिलनाडु की सबसे युवा मुख्यमंत्री बनीं। इसके पहले MGR ने 55 साल की उम्र में AIADMK की स्थापना की थी, 60 की उम्र में 1977 में सीएम बने। 1987 में जब उनकी मौत हुई तब वो 70 के थे, रजनीकांत 70 की उम्र में राजनीति में शुरूआत कर रहे हैं।

इस शुरूआत के पीछे एक कहानी है जो करीब 24 साल पहले शुरू हुई थी।

#Rajinikanth:मुख्यमंत्री की ताकत का पहला एहसास

चेन्नई का ये केथेड्रल रोड है। इस सड़क से थोड़ी दूर है poes Garden. यहां 81 नंबर कोठी है वेदा निलयम…

1991 में जब जयललिता मुख्यमंत्री बनीं, तब लिट्टे आतंकवादियों से हिफाजत को लेकर उनकी सुरक्षा बेहद सख्त की गई। इससे उनके ठीक सामने की कोठी में रहने वाले रजनीकांत को परेशानी हुई।

 क्योंकि जब जयललिता अपने घर से बाहर निकलने को होतीं तो काफी देर तक सारा ट्रैफिक ब्लॉक कर दिया जाता था। अब न रजनीकांत घर से बाहर निकल सकते थे, न उनके फैंस उनका दर्शन कर सकते थे। रजनी के रिश्ते MGR से भी मधुर नहीं रहे थे, लेकिन 48 की जयललिता ने 46 के रजनीकांत को पहली बार एहसास कराया कि 1980 में बिल्ला के रिलीज होने के बाद से वो जिस सुपरस्टारडम के आदी हो चुके थे, उसकी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के सामने कोई हैसियत नहीं थे। दर्शक रजनीकांत के साथ थे, लेकिन पुलिस जयललिता के पास थी। इन पांच सालों में जयललिता के रवैये से रजनीकांत इतने नाराज हुए कि 1996 में चुनाव के वक्त अमेरिका से लौट कर उन्होंने ANI TV के कैमरे पर अंग्रेजी में कहा -“Even God cannot save Tamil Nadu” if the AIADMK comes back to power. DMK प्रमुख करुणानिधि के भांजे के चैनल Sun TV ने चुनाव होने तक हर दिन …हर घंटे ये बयान चलाया। TMC ( प्रचार चिह्न साइकल) के प्रचार में रजनीकांत की फिल्म ‘अन्नमलाई’ के पोस्टर चिपकाए गए ।

 रजनी मीडियम भी थे और मैसेज भी.. AIADMK को 234 में महज 4 सीटें आईं। जयललिता बारगर से चुनाव हार गईं।

रजनीकांत फिर फिल्मों की दुनिया में लौट आए। इसके बाद 2017 में उन्होंने राजनीति मे आने का ऐलान किया, लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव में शामिल नहीं हुए। अब जबकि वो राजनीति में शामिल हो रहे हैं, तो क्या इससे तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा? रजनीकांत के असर को समझना है तो पहले उनके करिश्मा को समझना होगा।

चार साल पहले उनकी फिल्म कबाली रिलीज हुई तो रिलीज के दिन 22 जुलाई को चेन्नई और बंगलुरू में तमाम बड़ी निजी कंपनियों ने छुट्टी का ऐलान कर दिया। चेन्नई में फिल्म का पहला शो सुबह के चार बजे रखा गया था। कबाली की पहले दिन की कमाई थी 250 करोड़ और रजनीकांत का मेहनताना था 80 करोड़।

दो साल बाद मई 2018 में जब कर्नाटक में पैदा हुए रजनीकांत ने कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु का पक्ष लिया और उसी वक्त उनकी फिल्म ‘काला’ कर्नाटक में भी रिलीज होने वाली थी, तब मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने रजनीकांत को कावेरी बेसिन का दौरा करने के लिए आग्रह किया ।   

 “वो यह भी देख सकते हैं कि कैसे हमारे किसान तमिलनाडु के लिए त्याग कर रहे हैं और वो किस तरह परेशानियों का सामना कर रहे हैं. एकबार वो इसे देखेंगे तो मुझे लगता है कि वो अपने विचारों को बदल लेंगे.”

लेकिन रजनीकांत अपनी राय पर कायम रहे। इस साल जनवरी में उन्होंने मसीहा माने जाने वाले पेरियार की आलोचना की, इससे डीएमके के कार्यकर्ता बेहद नाराज हुए। उन्होंने रजनीकांत से माफी की मांग की, लेकिन रजनीकांत नहीं झुके।

#Rajinikanth:2021 के एसेंबली चुनाव में रजनीकांत के लिए क्या है?  

बीते तीन सालों से बीजेपी के प्रति उनके नरम रुख को देखते हुए ये माना जाता रहा है कि वो बीजेपी के साथ राजनीति में आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन अमित शाह BJP –AIADMK गठबंधन और पनीरसेल्वन को सीएम कैंडिडेट कबूल करने का पहले ही ऐलान कर चुके हैं। बीजेपी का तमिलनाडु मे खास जनाधार भी नहीं है। रजनीकांत के लिए सीएम से कम कुछ भी कबूल करना उनके कद के मुताबिक नहीं होगा। दस साल की एंटीइनकमबैंसी झेल रही AIADMK के मुकाबले इस बार DMK को ज्यादा प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा दिनाकरन की AMMK और  कमल हासन की MNM भी है। संभावना है कि DMK गठबंधन की छोटी पार्टियां MDMK, VCK, CPI, CPM उसके साथ बनी रहेंगी, ऐसे में सिर्फ DMDK और PMK रजनीकांत के साथ आ सकते हैं। कर्नाटक में पैदा हुए रजनीकांत को यकीन है कि जिस तरह केरल के MGR श्रीलंका में जन्म लेकर भी तमिलनाडु की जनता के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहे, उसी तरह उनकी सेकुलर, स्पिरिचुअल, क्लीन पॉलिटिक्स को जनता का समर्थन मिलेगा। वो अरसे से राज्य के भूगोल में कैद रही राजनीति को राष्ट्रीय पार्टी का तेवर और कलेवर देना चाहते हैं।बीते पचास साल से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के इर्दगिर्द घूमती रही है। 2016 का चुनाव जयललिता बनाम करुणानिधि था। लेकिन अब न जयललिता हैं न करुणानिधि। सिनेमा ने ही इस शून्य को 1977 में MGR के जरिए भरा था, रजनीकांत को लग रहा है कि अब उनकी बारी है।

Ask not what your nation can do for you, ask what Rajinikanth can do to your nation!

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