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बढ़ती महंगाई के बीच लोन लेने वालों को राहत, नहीं बढ़ेगा EMI का बोझ, रेपो रेट 4% पर स्थिर

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बढ़ती महंगाई के बीच लोन लेने वालों को राहत, नहीं बढ़ेगा EMI का बोझ, रेपो रेट 4% पर स्थिर

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नए वित्तीय वर्ष की पहली मौद्रिक नीति में, आरबीआई ने रेपो दर – प्रमुख उधार दर (रेपो रेट) को अपरिवर्तित रखा है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, “मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया. एमपीसी ने भी सर्वसम्मति से रुख को अनुकूल रखने के लिए मतदान किया.” उन्होंने कहा कि 2022-23 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. भारत ने अपनी प्रमुख उधार दर को लगभग दो वर्षों से अपरिवर्तित रखा है.

वित्त वर्ष 2013 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को घटाकर 7.2% कर दिया गया है, जो पिछली बैठक में 7.8% थी. भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों को 4% पर अपरिवर्तित रखा है. RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ने अपना रास्ता सफलतापूर्वक नेविगेट किया है. यूरोपीय युद्ध के प्रकोप के साथ, हमें नई और भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. यूरोपीय संघ के संघर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था को बाधित करने की क्षमता है.

FY23 में CPI मुद्रास्फीति औसतन 5.7 प्रतिशत देखी गई. अप्रैल-जून 2022 में इसे औसतन 6.3 प्रतिशत देखा गया है; जुलाई-सितंबर 2022 में औसतन 5.0 प्रतिशत देखा गया; अक्टूबर-दिसंबर 2022 में औसत 5.4 प्रतिशत देखा गया; और जनवरी-मार्च 2023 में औसत 5.1 प्रतिशत देखा गया. आरबीआई गवर्नर दास का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखेगा. आरबीआई वीआरआरआर नीलामी जारी रखेगा.

बता दें, रेपो दर में आखिरी बार 22 मई 2020 को कोविड-प्रेरित राष्ट्रव्यापी तालाबंदी पर कटौती की गई थी. तब से, दर 4 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बनी हुई है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) इस वित्तीय वर्ष में छह बार बैठक करेगी. 2022-23 की अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति 6-8 जून के दौरान आयोजित की जाएगी.

Relief to borrowers amid rising inflation, EMI burden will not increase, repo rate stable at 4%

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