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Russia ने कारों, ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध, चिप संकट बढ़ा

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Russia ने कारों, ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध, चिप संकट बढ़ा

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कोरोना वायरस महामारी के सामने आने के बाद से पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप संकट देखने को मिल रहा था, जिसके कारण कारों का प्रोडक्शन और डिलीवरी बाधित हो रही थी. मौजूदा समय में कई कारों पर लंबा वेटिंग पीरियड है. कुछ की डिलीवरी के लिए तो ग्राहकों को एक-एक साल तक भी इंतजार करना पड़ रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि जैसे-जैसे कोरोना वायरस संक्रमण कम होगा, वैसे वैसे ही सेमीकंडक्टर चिप संकट भी डाइल्यूट होता चला जाएगा लेकिन अब स्थिति ऐसी बन रही है कि सेमीकंडक्टर चिप संकट कुछ और समय तक बना रह सकता है. इसका कारण रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष हो सकता है.

यूक्रेन-रूस युद्ध के मद्देनजर देश के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने के बाद रूस ने 200 से ज्यादा उत्पादों सहित कारों और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष से न सिर्फ रूस बल्कि दुनिया भर में ऑटो उद्योग प्रभावित हो रहा है। इस फैसले से आने वाले दिनों में ऑटो निर्माताओं के सामने चल रहे सेमीकंडक्टर चिप का संकट और भी गहरा जाएगा। कार और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर रूस का प्रतिबंध इस साल के आखिर तक रहेगा। रूस की निर्यात सूची से हटाई गई वस्तुओं में वाहन, दूरसंचार, चिकित्सा, कृषि, विद्युत उपकरण और लकड़ी शामिल हैं। गुरुवार को, मास्को ने कहा कि उसने “रूस के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करने वाले राज्यों को कई प्रकार की लकड़ी और लकड़ी के उत्पादों के निर्यात को निलंबित कर दिया है।”

रूस के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने कहा, “ये उपाय रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के लिए एक तार्किक प्रतिक्रिया है और इसका मकसद अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों के कामकाज को बिना किसी रूकावट के सुनिश्चित करना है।” रूस का यह कदम देश में कामकाज पर रोक लगाने वाली पश्चिमी कंपनियों के स्वामित्व वाली सभी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करने की धमकी के बीच आया है। पिछले महीने संघर्ष बढ़ने के बाद से कई कार निर्माताओं ने रूस में परिचालन स्थगित करने का फैसला किया। वोल्वो, फेरारी, होंडा, टोयोटा, फॉक्सवैगन, जनरल मोटर्स, जगुआर लैंड रोवर, मर्सिडीज-बेंज, फोर्ड और बीएमडब्ल्यू जैसे कार निर्माताओं ने न सिर्फ अपने परिचालन को निलंबित कर दिया, बल्कि देश में अपने वाहनों के निर्यात पर भी रोक लगा दी है।

Jeep, Fiat और Peugeot जैसे ब्रैंड्स का मालिक Stellantis समूह भी गुरुवार को इन वाहन निर्माताओं की सूची में शामिल हो गया है। कंपनी ने कहा कि उसने रूस से कारों के आयात और निर्यात को निलंबित कर दिया है। स्टेलंटिस की रूस के कलुगा में एक मैन्युफेक्चरिंग प्लांट है, जिसकी वह मित्सुबिशी के साथ संयुक्त रूप से मालिक है। रूस में प्रमुख विदेशी कार निर्माताओं में से एक, ह्यूंदै ने हाल ही में एलान किया है कि वह उत्पादन फिर से शुरू करना चाह रही है, जिसे सप्लाई चेन व्यवधान के कारण कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। हालांकि, अगर कारों और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर रूस का प्रतिबंध रहता है, तो ह्यूंदै के लिए परिचालन फिर से शुरू करना मुश्किल हो सकता है।

अन्य कार निर्माताओं में, रेनो भी चल रहे युद्ध की मार झेल रहा है। यह फ्रांसीसी कंपनी AvtoVaz की मालिक है, जो लाडा कारों का निर्माण करती है। और यह रूस में सबसे लोकप्रिय कार ब्रांड भी है। इसने कहा है कि कंपनी अपने उत्पादन को चालू रखने के लिए माइक्रोचिप्स की घरेलू आपूर्ति की तलाश करेगी।

Russia bans export of cars, auto parts, chip crisis escalates

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