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बिना एग्ज़ाम डिग्री नहीं!

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बिना एग्ज़ाम डिग्री नहीं!

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सुप्रीम कोर्ट (SC) ने यूजीसी के दिशा-निर्देशों पर सहमति जताते हुए साफ किया कि बिना फाइनल ईयर का एग्ज़ाम दिये….छात्रों को डिग्री नहीं मिलेगी। देश की शीर्ष अदालत ने माना कि कोरोना के मद्देनज़र राज्‍य सरकारें परीक्षा रद्द कर सकती हैं… लेकिन यूजीसी(UGC) बगैर परीक्षा के छात्रों को प्रोमोट कर डिग्री(degree) नहीं दे सकती।

क्या था मामला?

जुलाई में यूजीसी (UGC) को देशभर के विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करा लें। यूजीसी की इस गाइडलाइंस के खिलाफ देश भर के कई छात्रों और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाएं करवाना छात्रों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है…इसलिए यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर छात्रों के पिछले प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करना चाहिए।

यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को कोरोना महामारी के बीच फाइनल ईयर के एग्जाम 30 सितंबर तक आयोजित कराने के संबंध में जारी निर्देश कोई फरमान नहीं है। यह समय-सीमा छात्रों के लाभ के लिए है क्योंकि इसके बाद ही विश्वविद्यालयों में पीजी कोर्सेज के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यूजीसी की दलील थी कि परीक्षाओं को आयोजित किए बिना राज्य डिग्री प्रदान करने का निर्णय नहीं ले सकते और राज्य प्राधिकार यूजीसी के दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज भी नहीं सकते हैं।

यूजीसी ने अपनी दलील में इस मामले में राजनीति का मुद्दा भी उठाया था। यूजीसी के मुताबिक मई में महाराष्ट्र सरकार ने सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को बैठक के लिए बुलाया था….और इसमें फैसला लिया गया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पास किया जा सकता है, लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा जरूरी है। लेकिन युवा सेना द्वारा इस फैसले के खिलाफ एक याचिका दायर की गई, जिसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे ने की। इसी युवा सेना की याचिका के बाद सरकार का विचार बदल गया और वह परीक्षा के खिलाफ हो गई। जबकि राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करने का अधिकार ही नहीं है।

प्रतीकात्मक फोटो

क्या हुआ फैसला?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यूजीसी की गाइडलांइस में कोई बदलाव नहीं होगा और कोर्ट इन्‍हें सही मानती है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों को पास करने के लिए एग्जाम जरूरी हैं। कोर्ट ने ये भी कहा था कि छात्रों का हित किसमें है…ये छात्र तय नहीं कर सकते, इसके लिए वैधानिक संस्था है, छात्र ये सब तय करने के काबिल नहीं हैं।

हालांकि, कोरोना से प्रभावित क्षेत्रों में जरूर कुछ रियायत दी जा सकती है। राज्य… आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा स्थगित कर सकते हैं और यूजीसी के साथ चर्चा कर नई तिथियां तय कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी राज्य को लगता है, उनके लिए परीक्षा कराना मुमकिन नहीं, तो वह UGC के पास जा सकता है।

इस फैसले के बाद अब देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को, 30 सितंबर तक स्नातक कोर्सेज की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं हर हाल में आयोजित करानी होगी। और शायद छात्रों के हित के नाम पर राजनीति करनेवालों पर भी थोड़ी लगाम लगेगी।

Shailendra

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