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यात्रीगण कृपया ध्यान दें ! ‘कोरोना स्पेशल’ खुल चुकी है!

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यात्रीगण कृपया ध्यान दें ! ‘कोरोना स्पेशल’ खुल चुकी है!

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देश की राजधानी दिल्ली से देश के अलग-अलग कोनों तक लॉकडाउन में फंसे मुसाफिरों के लिए सरकार राहत की रेल लेकर आई है।

24 मार्च को जब सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया था, तब देश में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा 6सौ के करीब था, अब जबकि ये आंकड़ा 62 हजार के पार चला गया है तब सरकार फंसे लोगों को घर पहुंचाने की योजना लेकर आई है। कोरोना के नजरिए से देखा जाए तो सरकार के इस फैसले में कितना जोखिम है ?

क्या ट्रेनों के चलने में कोई खतरा है ?

  1.  सरकार ये फैसला ठीक उस दिन लेकर आई है जिस दिन देश मे कोरोना के मरीजों की तादाद में सबसे बड़ी उछाल सामने आई है। पहली बार एक दिन में कोरोना के नए मरीजों का आंकड़ा 4213 पर पहुंच गया है।
  2.  जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी का कहना है कि अप्रैल में कोरोना पर भारत कुछ हद तक काबू पाने में कामयाब रहा था, लेकिन मई के महीने में हालात बेकाबू नजर आ रहे हैं। यहां इन्फेक्शन के नए मामलों और कुल मौत के आंकड़ों में दूसरे कई देशों के मुकाबले तेजी आई है। चिंता की बात ये है कि जब बेल्जियम (16.3%) फ्रांस( 14.9%)  और ब्रिटेन (14.6%) जैसे बेहतर मेडिकल सर्विस वाले देशों में पेशेंट मोर्टालिटी रेट इतनी ज्यादा है तब भारत एसिम्टोमैटिक मरीजों की बड़ी तादाद के साथ 3.3% की मोर्टालिटी रेट कब तक कायम रख पाएगा
  •  देश की राजधानी रेड जोन में है, इसके करीब के कई इलाके जैसे नोएडा रेड जोन में हैं और इन 15 ट्रेनों की मंजिल यानी अहमदाबाद, मुंबई जैसे शहर भी रेड जोन में हैं। देश के कुल 130 जिले अभी रेड जोन में हैं, जाहिर है ट्रेन के 90फीसदी मुसाफिर इन रेड जोन में ही जाने वाले हैं।
  •  सरकार के सर्कुलर से साफ है कि स्टेशन पर मुसाफिरों की स्क्रीनिंग होगी। नीचे से तीसरी लाइन में साफ लिखा है—only asymptomatic passengers will be allowed to board the train . – ये इसलिए अहम है क्योंकि रिसर्च से ये बात सामने आई  है कि भारत में कोरोना के ज्यादातर मामले asymptomatic होते हैं। साफ है कि सरकार ये मान कर चल रही है कि बड़ी तादाद में इन ट्रेनों में कोरोना के संदिग्ध मरीज सवार होंगे।
  • सरकार ने रेड जोन दिल्ली स्टेशन तक मुसाफिरों के पहुंचने और मुंबई या अहमदाबाद जैसे रेड जोन स्टेशनों से मुसाफिरों के घर पहुंचने के बारे में कोई दिशा निर्दश नहीं दिया है। जब ये यात्री उतरेंगे तब स्टेशन से घर कैसे पहुंचेंगे, बसें नहीं, टैक्सी नहीं, गाड़ियां नहीं …जाहिर है इसका इंतजाम राज्य सरकारों को करना होगा।  बिहार और छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूरों के मामले में मथुरा मे यूपी और राजस्थान पुलिस की भिड़ंत से साफ है कि राज्यों के बीच कोआर्डिनेशन को और बेहतर किए जाने की जरूरत है।  
  •   मुसाफिरों को डिसइन्फेक्टेंट टनल से होकर गुजरना होगा और उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए चुनिंदा स्टेशन सैनिटाइज किए जा रहे हैं। लेकिन ये कोई एक दिन की बात नहीं है। अगले कई हफ्तों तक स्टेशन पर और ट्रेन में मौजूद रेलवे के अधिकारी, कर्मचारी, आरपीएफ के जवान, मेडिकल टीम सबके लिए कोरोना संक्रमण का संकट होगा।
  •   एक बहुत बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर है। कोरोना काल में रेलवे स्टेशनों पर पहले की तरह मुसाफिरों का फुल बडी चेक करना मुश्किल है।  सुरक्षा एजेंसियों के लिए ये बड़ी चुनौती है।

तो हमारा सुझाव ये है कि अगर आप 50 दिन किसी तरह काट सकते हैं तो कुछ दिन और इंतजार करें। अभी सफर पर निकलना अगर बेहद जरूरी न हो तो टाल दें।

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