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#socialmedia: शुद्ध देसी सेंसरशिप

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#socialmedia: शुद्ध देसी सेंसरशिप

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हमारे लोकतंत्र में दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र लिच्छवि की छवि देखने वालों के लिए खबर है। खबर ये है कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र अब आधिकारिक तौर पर दुनिया का पहला लोकतंत्र है जहां इंटरनेट सूचना मंत्री के अधीन हो गया है।

अगर आप किसी  डिजीटल मीडिया से जुड़े हैं.. नेटफ्लिक्स, अमेजन या जी 5 के कन्टेंट प्रोवाइडर हैं, यूट्यूबर हैं, फेसबुक पर वीडियो या टेक्स्ट शेयर करते हैं, न्यूज पोर्टल चलाते हैं तो अब आप 357वें संशोधन अधिनियम 2020  सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन हैं। केंद्र सरकार के कैबिनेट सेक्रेटेरियट की ओर से 9 नवंबर को जारी अधिसूचना के तहत “सूिना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन  (Allocation of Business) Rules, 1961 के  Second Schedule of the Rules में 22A और 22B जोड़े गए हैं।

  • 22क. ऑनलाइन विषय वस्तु प्रदाताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए फिल्म और दृश्य-श्रव्य कार्यक्रम  
  • 22ख. ऑनलाइन प्लेटफ़ार्म पर समाचार और समसामयिक विषयवस्तु

सरकार की अधिसूचना (#socialmedia: ) के मायने क्या हैं ?

तत्काल प्रभाव से लागू आदेश के तहत –

  1. अब नेटफ्लिक्स पर अगर फिर से पाताललोक जैसा सीरियल प्रसारित होता है, तो  अब केंद्र सरकार को वो कानूनी शक्तियां हासिल हैं, जिसके तहत वो नेटफ्लिक्स को इसकी स्ट्रीमिंग करने से रोकने का आदेश दे सकती है।  
  2. अमेजन प्राइम पर स्वरा भाष्कर की वेबसीरिज रसभरी पर    CBFC अध्यक्ष प्रसून जोशी ने एडल्ट कन्टेंट को लेकर गहरी नाराजगी जताई थी। अब ऐसे कन्टेंट को सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेशन के नियमों के तहत लाया जा सकेगा।  

3 इरॉस नाउ ने नवरात्रि को लेकर रणवीर सिंह, सलमान खान और कैटरीना कैफ की तस्वीरों के साथ कुछ मीम्स तैयार किए, इन पर कंगना रनौत भड़क गई थी।

अब नए मीम्स जावड़ेकर जी को पसंद नहीं आए तो इरोस को कहना होगा – जो हुक्म मेरे आका !
मतलब ये कि अखबार और टीवी के लिए सेल्फ रेगुलेशन और ओटीटी से सोशल मीडिया पर पूरी तरह सरकार का नियंत्रण। रेगुलेटर के तौर पर अमेरिका में (FCC) यानी Federal Communications Commission है, यूरोप में  Articles 167 and 173 of the Treaty on the Functioning of the European Union (TFEU) है, लेकिन सोशल मीडिया और ओटीटी के डिजीटल कन्टेंट का कोई रेगुलेटर नहीं है। चीन, उत्तर कोरिया जैसे देशों में कई तरह के प्रतिबंध हैं, लेकिन वहां भी सूचना मंत्री इंटरनेट का चौधरी नहीं है, जैसा हमारे यहां बनाया गया है।

ये फैसला क्यों खास है?

न संसद में बहस, न राज्यों से मशविरा …इतना महत्वपूर्ण आदेश लेकर आई सरकार, वो भी एक्जिक्यूटिव आर्डर से …हमारे यहां फैसले इसी तरह होते हैं। नोटबंदी की तो आरबीआई की नहीं सुनी, जीएसटी लेकर आए तो कारोबारियों से नहीं पूछा,, देशबंदी की तो राज्यों से बात किए बगैर और किसान का कानून पहले लेकर आए, उन्हें समझाने का काम अब कर रहे हैं।

दो महीना पहले  DOT – department of telecommunication को TRAI – ने कहा था कि OTT के लिए किसी तरह के रेगुलेशन की अभी कोई जरूरत नहीं है।

डीजिटल मीडिया के संगठन IAMA- Internet and Mobile Association of India ने ट्राई का शुक्रिया किया था। सितंबर में IAMA के 15 सदस्यों ने यूनिवरसल सेल्फ रेगुलेशन कोड बनाया था।   

इस कोड में कई ऐसी चीजें हैं जो इसे एनबीए या प्रेस काउन्सिल से ज्यादा प्रभावशाली बनाती हैं। जैसे –

कंज्यूमर कंप्लेंट डिपार्टमेंट जहां बाल अधिकार, जेंडर इक्वलिटी जैसे विषयों के स्वतंत्र जानकारों का एडवायजरी पैनल होगा

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के अधीन Digital Curated Content Complaints Council का गठन

सरकार को आपत्ति थी कि बोर्ड में स्वतंत्र मेंबर सिर्फ एक होगा, जबकि दो मेंबर इंडस्ट्री के होंगे। अब इसका हल सरकार ने ये निकाला है कि वो खुद तय करेगी कि ओटीटी और सोशल मीडिया पर क्या चलेगा और क्या नहीं ?

सुदर्शन टीवी पर विवादित यूपीएससी जिहाद कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था

टीवी न्यूज में सेल्फ रेगुलेशन है, लेकिन डिजीटल मीडिया को रेगुलेट करने की जरूरत है,क्योंकि इनका असर ज्यादा है।

इस फैसले से कई लोग क्यों नाराज हैं ?

उन्हें लगता है कि अब बीजेपी या प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कुछ भी लिखने या कहने पर सरकार कार्रवाई करेगी। अभिसार शर्मा या पुण्यप्रसून वाजपेयी के वीडियो को हटाने के लिए यूट्यूब को आदेश दिया जाएगा, जबकि विरोधी पार्टियों की निंदा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि डिजीटल मीडिया पर सॉफ्ट पॉर्न, एंटी हिन्दू, एंटी मोदी, एंटी बीजेपी, प्रो इस्लाम, प्रो टेरर,  कन्टेंट के सिवा कुछ होता ही नहीं है। इन पर कार्रवाई देशहित में जरूरी है।

फैसले का असर क्या होगा ?

OTT का आकर्षण इसलिए ज्यादा है क्योंकि यहां कन्टेंट फिल्टर्ड नहीं है। सेक्रेड गेम्स से एडल्ट सीन्स और मिर्जापुर से गालियां निकाल दें तो उनमें जो बचा रहेगा वो कन्टेंट तो होगा, लेकिन रॉ इमोशन के बगैर ये शायद उतना इंटरेस्टिंग नहीं रह जाएगा।

इसकी जरूरत क्या थी ?

सरकार नया रेगुलेटरी अथॉरिटी नहीं बना रही, वो सारा डिजीटल मीडिया बस अपने अधीन कर रही है। अगर मकसद पॉर्न रोकना है, हेट कन्टेंट पर लगाम लगाना है तो मौजूदा साइबर कानूनों के तहत पहले ही सरकार के पास सारे अख्तियार हैं।  हाल ही में एडल्ट कन्टेंट को लेकर ऑल्ट बालाजी समेत सात ओटीटी प्लेटफार्म और दो पोर्न वेबसाइट के खिलाफ महाराष्ट्र साइबर डिपार्टमेंट ने आईपीसी की धारा 292 के साथ आईटी एक्ट की धारा 67, 67 (ए) और महिलाओं की गलत छवि पेश करने के आरोप में संबंधित कानून की धारा 3, 4 के तहत FIR दर्ज की है। ये सवाल तब फिर उठा जब (OTT) प्लेटफॉर्म पर निगरानी और नियंत्रण के लिए उचित व्यवस्था बनाए जाने की मांग को लेकर  वकील शशांक शेखर झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिका में कहा गया था कि OTT प्लेटफार्म कंपनियों ने स्व नियमन के लिए जो संस्था बनाई है, वो ठीक से काम नहीं कर रही, लिहाजा अदालत सरकार को सेंट्रल बोर्ड फ़ॉर रेग्युलेशन एंड मॉनिटरिंग ऑफ ऑनलाइन वीडियो कंटेंट्स (CBRMOBC) नाम की एक स्वायत्त संस्था के गठन का आदेश दे।हफ्ते भर पहले जब नाइजीरिया के सूचना मंत्री ने फेक न्यूज और हेट पोस्टिंग को लेकर सोशल मीडिया को रेगुलेट करने का मशविरा दिया तो राजधानी लागोस में भारी हंगामा मच गया, लेकिन भारत में किसी को शायद फर्क नहीं पड़ता।

भारत का डिजिटल बाजार

PWC की रिपोर्ट के मुताबिक सस्ते डाटा की वजह से दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रहा OTT बाजार भारत है। 2024 तक ये दुनिया का छठा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। 28.6% CAGR (सालाना विकास दर ) के साथ तब ये 2.9 बिलियन $ यानी करीब 22 हजार करोड़ का बाजार होगा। सिनेमा हॉल की रिवेन्यू में सालाना 2.6% की कमी और स्ट्रीमिंग वीडियो की रिवेन्यू में 30.7% इजाफा हो रहा है।

सही क्या होता ?

होना ये चाहिए कि स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री फूड इंडस्ट्री की तरह काम करे। जैसे फूड पैकेट पर कन्टेंट का फुल डिस्कलोजर होता है , उससे ग्राहक को खरीदने को लेकर राय बनाने में मदद मिलती है, उसी तरह स्ट्रीमिंग में फुल कन्टेंट डिस्क्लोजर हो, इसके लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी हो जो डिस्कलोजर नार्म्स बनाए और कन्टेंट ऑडिटिंग के लिए कम्पलायंस नार्मस बनाए। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग का जिस तरह फेसबुक और यूट्यूब फिल्टर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उस तरह शुरूआत की जा सकती है। ओटीटी भविष्य का बाजार है। ओवर रेगुलेशन विल किल इट।

टॉल्सटॉय ने कहा था- हर कोई दुनिया बदलने के बारे में सोचता है, जबकि जरूरत खुद को बदलने की है।

प्रकाश सर ! ये आपके लिए है।

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