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असीम संभावनाओं वाली एक जिन्दगी जो रह गई अधूरी, अशांत: सुशान्त

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असीम संभावनाओं वाली एक जिन्दगी जो रह गई अधूरी, अशांत: सुशान्त

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हम हार जीत, सक्सेस-फेल्यर में इतना उलझ गए हैं,कि जिंदगी जीना भूल गए हैं। जिंदगी में अगर कुछ सबसे ज्यादा अहम है, तो वो है खुद की जिन्दगी

फिल्म छिछोरे में सुशांत सिंह राजपूत का डायलॉग

कभी-कभी कोई कलाकार अपने किरदार में इतना खो जाता है कि वो अपने ही डायलॉग भूल जाता है।

सुशांत सिंह राजपूत में एक अलग तरह की बेचैनी थी, वो कम वक्त में ज्यादा हासिल करना चाहते थे और उन्होंने ये किया भी। स्कूल और कॉलेज में उनका शुमार बेस्ट स्टूडेंट्स में होता था। 2003 में दिल्ली में इंजीनियरिंग के लिए इम्तिहान दिया, तो उनका रैंक सातवां था। एक या दो नहीं, 11 इंजीनियरिंग कॉलेज के एन्ट्रेंस इग्जाम पास किए…लेकिन थर्ड ईयर में इंजीनियरिंग छोड़ दी, वो भी तब जब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिल गया था…..क्योंकि एक्टर बनना था। श्यामक डावर से डांसिंग सीखी, बैरी जॉन से एक्टिंग…हमेशा की तरह यहां भी हर कोर्स में अव्वल।

एक्टर के तौर पर उन्हें 2008 में स्टार प्लस के सीरियल #किस देश में है मेरा दिल – से पहचान मिली।  तब वो सिर्फ 22 साल के थे। अगले साल जी टीवी पर आई #पवित्र रिश्ता से उनका शुमार टीवी के बड़े एक्टर्स में होने लगा। लेकिन सुशांत छोटे पर्दे के लिए नहीं बने थे। पवित्र रिश्ता खत्म होते-होते उनके पास #काय पो चे का ऑफर आ गया। फरवरी 2013 में फिल्म रिलीज हुई। फिल्म को फिल्मफेयर के 6 नॉमिनेशन मिले, इनमें से एक #best male debut …क्रिकेट कोच इशान भट्ट के किरदार के लिए सुशांत का भी था। अगले 6 साल में सुशांत ने दर्जन भर फिल्में की। इनमें शुद्ध देसी रोमांस, डिटेक्टिव व्योमकेश बख्शी से लेकर पीके, एमएस धोनी द अन्टोल्ड स्टोरी, केदारनाथ और छिछोरे शामिल हैं।

एमएस धोनी के किरदार के लिए बतौर लीड एक्टर उन्हें पहली बार फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन मिला। 30 सितंबर 2016 को जब ये फिल्म रिलीज हुई उस वक्त 61 देशों में एक साथ रिलीज होने वाली बॉलीवुड की ये पहली फिल्म थी।

फिल्म के प्रोड्यूसर अरुण पांडे के मुताबिक

शूटिंग के दौरान मैं करीब 18 महीने उसके साथ रहा। सुशांत महज चार से पांच घंटा ही सोता था। एक दिन मैंने उससे कहा -थोड़ा और सो लो तो सुशांत ने कहा – हमेशा से एक्टिंग करना चाहता था, अब मौका मिला है तो, सोना नहीं चाहता

महज सात-आठ साल के बॉलीवुड करियर में सुशान्त ने इन्टेंस एक्टिंग से अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी कुछ फिल्में हिट रहीं,  तो कुछ औसत ही चलीं। लेकिन उनके हर फिल्म में उनकी एक्टिंग की सराहना हुई। 

इतनी कामयाबियों के बावजूद वो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में कई मुश्किल चुनौतियां का सामना करते रहे।

अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर अपनी आखिरी तस्वीर जो उन्होंने 5 मई 2020 को  डाली , उसके साथ एक संदेश है #eyeofastorm

झुकी हुई आंखें, उदास मन… एक कलाकार और स्टार के तौर पर वो मुश्किल से मुश्किल सीन आसानी से कर लेते थे, लेकिन पर्सनल लाइफ में उन्हें कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। टीवी पर पवित्र रिश्ता की साथी कलाकार अंकिता लोखंडे के साथ छह साल के बाद उनका रिश्ता टूट गया। फिर  कृति सनोन और आखिर में रिया चक्रवर्ती के वो करीब आए। लेकिन वो बेहद इंट्रोवर्ट थे और अक्सर अपने मुस्कराते चेहरे के पीछे अपने अंदर एक तूफान छिपाए रखते थे। इंस्टाग्राम पर उनके एक करोड़ से ज्यादा फैन थे, लेकिन ये युवा फिर भी बहुत अकेला  था।  वो कई बार अपनी फीलिंग्स शेयर नहीं कर पाते थे।

इंस्टाग्राम पर उन्होने एक पोस्ट लिखा  30 सितंबर 2019 को, फिर  2 मई 2020 को उन्होंने उसके टेक्सट को फिर से शेयर किया।  प्यार को लेकर उनका ये आखिरी पोस्ट है

सुबह उठकर खुद को उसकी निगाहों से देखना और फिर उसे देखना उस एहसास के साथ कि मैं बस उतना ही हूं जितना तुम मुझे समझती हो

असीम संभावनाओं वाली एक जिन्दगी जो अधूरी रह गई, एक प्यार जो अधूरा रह गया

सुशान्त को मां से बहुत लगाव था। मौत से चंद रोज पहले इंस्टाग्राम पर उनका आखिरी पोस्ट मां के नाम है। मां जो बेटे को 18 साल पहले छोड़ गई, लेकिन फिर भी वो हर पल बेटे के साथ थी, तब तक जब तक वो कुछ समझने और बताने की स्थिति में था।

आंसुओं की बूंदों में भाप बन कर उड़ता, धुंधला अतीत

कभी ना खत्म होने वाले ख्वाब उकेर रहे हैं मुस्कान की रेखा और तेज भागती जिन्दगी के बीच मेरे लिए मोल-भाव करती मां

आखिरी के छह महीने सुशांत के लिए बहुत मुश्किल रहे। उनके पास टैलेन्ट था, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा था। वो एक ऐसी रेस में थे, जहां हर कोई बस आगे निकलने को बेचैन था, किसी के पास अपने पिछड़ रहे साथी कलाकार के बारे में जानने का, उसे संभालने का वक्त नहीं था।

28 मार्च को उन्होंने इंस्टा पोस्ट में लिखा – अगर आप ऐसी जंग में हैं जिसमें एक ओर आप हैं और दूसरी ओर सारी दुनिया तो ये तय है कि जीतेगी दुनिया ही

सुशांत डिप्रेशन के शिकार थे।ये एक मर्ज है जिसमें इनसान के लिए हर नया दिन किसी अदृश्य  और असंभव से पहाड़ को पार करने जैसा होता है। न अमीरी से मदद मिलती है, न कामयाबी से। ये एक बेहद कठिन जंग है जिससे लड़ने के लिए खुद को मेन्टल और फिजिकली फिट रखने की हर मुमकिन कोशिश सुशान्त कर रहे थे।  

लेकिन कुछ था जो छूट रहा था, कुछ था जो टूट रहा था..सुशान्त को लग रहा था कि जिन्दगी बालू की रेत की तरह फिसलती जा रही थी। 24 मई को इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा –

जो मिले उस पर अभिमान नहीं करो, जो जाना चाहे उसे जाने दो जैसे वो कभी तुम्हारा था ही नहीं

वो हारा नहीं, वो बस थक कर सो गया है। वो सिर्फ 34 साल का है…खो गया है। वो चाहता है कोई उसे ढूंढ ले, उसकी एक्टिंग में, उसके अधूरे ख्वाबों में, अधूरे रिश्तों में। उसे लगता था कि जब वो नहीं होगा, तब लोगों को एहसास होगा कि उन्होंने क्या खोया है।

सुशान्त सिंह की लिखावट । लॉकडाउन के दौरान कंप्यूटर कोडिंग सीख रहे थे सुशांत। सौजन्य इंस्टाग्राम – सुशान्त सिंह के पेज से

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