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स्वाति मालीवाल की बढ़ी मुश्किलें, DCW की नियुक्तियों में गड़बड़ी मामले में आरोप तय

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स्वाति मालीवाल की बढ़ी मुश्किलें, DCW की नियुक्तियों में गड़बड़ी मामले में आरोप तय

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Swati Maliwal

दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में अनियमितताओं के मामले में गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल और अन्य के खिलाफ महिला अधिकार संस्था में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्त करने के लिए अपने आधिकारिक पदों का प्रथम दृष्टया दुरुपयोग करने के आरोप में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय करने का आदेश दिया है. अदालत ने आदेश दिया कि डीसीडब्ल्यू की पूर्व सदस्य प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक पर भी मुकदमा चलाया जाए.

विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने कहा कि डीसीडब्ल्यू द्वारा विभिन्न तिथियों पर आयोजित बैठकों के विवरण जिसमें सभी चार अभियुक्त हस्ताक्षरकर्ता थे, के अवलोकन प्रथम दृष्टया इस संदेह की ओर इशारा करते हैं कि जिन नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं वे आरोपियों ने एक दूसरे के साथ मिलीभगत करके की. न्यायाधीश ने कहा, परिस्थितियां प्रथम दृष्टया आरोपी व्यक्तियों के बीच इस तरह की साजिश का संकेत देती हैं.

अदालत ने आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) (एक लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है. डीसीडब्ल्यू की पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी विधायक बरखा शुक्ला सिंह की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामला दर्ज किया था. शिकायत में कहा गया था कि दिल्ली महिला आयोग में नियमों को दरकिनार कर आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों की दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियां की और उन्हें वित्तीय लाभ पहुंचता गया.

शिकायत के मुताबिक 6 अगस्त 2015 से लेकर 1 अगस्त 2016 के बीच 90 नियुक्तियां की गई इनमें से 71 संविदा पर 16 लोगों को “डायल 181” की हेल्प लाइन के लिए भर्ती किया गया जबकि 3 लोगों का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है. शिकायत के आधार पर एसीबी ने 19 सितंबर 2016 को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के सेक्शन 13(1)(d) और आईपीसी की धारा 409 और 120 B के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

जांच के दौरान एसीबी ने पाया कि दिल्ली सरकार द्वारा 27 जुलाई 2015 को अधिसूचित कर महिला आयोग का पुनर्गठन किया गया जिसमें आरोपी नंबर 1 स्वाति मालिवाल को महिला आयोग का अध्यक्ष और अन्य तीन आरोपियों को आयोग के सदस्यों के रूप में पहले से स्वीकृत 26 पदों को अनदेखा कर नियुक्त किया गया. आरोपियों ने 6 अगस्त 2015 से लेकर 1 अगस्त 2016 के दौरान 87 लोगों की नियुक्ति की जिनमें कम से कम 20 लोग सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे. पूछताछ में मालिवाल ने दावा किया कि उन्होंने 90 लोगों की भर्तियां की लेकिन एजेंसी को 3 लोगों के दस्तावेज ही नहीं मिले.

एजेंसी का आरोप है कि ये सभी नियुक्तियां किसी भी प्रक्रिया, नियमों और विनियमों का पालन किए बिना की गई. GFR के नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गईं, 5 अप्रैल 2016 को इसी प्रकार प्रेम प्रकाश ढल को सदस्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था. निर्धारित नियम और उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना 700 लाख के बजट में से 676 एकमुश्त राशि दे दी गई जबकि यह किश्तों में जारी करनी होती है.

यह दावा किया जाता है कि महिला आयोग जोकि दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन आता है उन्हें भी महिला आयोग ने सूचित नहीं किया. महिला आयोग ने दावा किया कि नियुक्ति उम्मीदवारों के इंटरव्यू करने के बाद पात्रता पूरी करने वालों की ही की गई लेकिन एजेंसी के मांगने पर भी दस्तावेज या कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए. आरोपी ने नियमों का उल्लंघन कर मुख्यमंत्री कार्यालय में काम कर चुके अपने सहयोगी को लाखों की तनख्वाह पर रखा.

Swati Maliwal’s problems increased, charges framed in case of irregularities in DCW appointments

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