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बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहे TB के मामले, भारत में हर साल 4 लाख 80 हजार हो रही मौतें

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बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहे TB के मामले, भारत में हर साल 4 लाख 80 हजार हो रही मौतें

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हर साल टीबी के खिलाफ जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है. विश्व स्वाथ्य संगठन का लक्ष्य है कि साल 2035 तक टीबी से होने वाली मौतों को 95% तक घटा दिया जाए और टीबी के मामलों को भी 90% तक कम कर दिया जाए. बढ़ते शहरीकरण से कई संक्रमण वाली बीमारियों पर काबू भी देखा जा रहा है लेकिन, टीबी के मामले में ये बात लागू नहीं हो रही. बल्कि शहरीकरण के बढ़ने के साथ-साथ बड़े शहरों में रहने वाले लोगों में टीबी के मामले भी बढ़े हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व भर में कुल टीबी के मामलों में एक-तिहाई मामले भारत में होते हैं. भारत में इस बीमारी से हर साल 4 लाख 80 हजार मौतें हो रही हैं. दरअसल टीबी बैक्टीरिया से फैलता है. किसी भी प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति को ये हो सकता है. ये संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है. ये मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन इसका संक्रमण पेट की हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है.

बढ़ते शहरीकरण से उच्च और मध्यम वर्ग के लोगों के पास अधिक सुविधाएं हो गई हैं जिससे उनके बीच टीबी जैसी संक्रामक बीमारियां बेहद कम फैलती हैं लेकिन इस शहरीकरण ने गरीब तबके के लोगों को शहरों के गंदे स्लम में रहने पर मजबूर किया है. ये झुग्गी-झोपड़ियां अधिक भीड़भाड़ वाली होती है. इनमें रहने वाले लोगों के पास स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं होती और ऐसे ही माहौल में टीबी को फलने-फूलने का मौका मिल रहा है.

शहरों में रहने वाले निम्न और मध्यमवर्ग तबके के लोग गंदे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहते हैं. एक छोटे से कमरे में 10-12 सदस्यों का एक पूरा परिवार गुजारा करता है और ये लोग सामूहिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं. इन जगहों में साफ-सफाई ना के बराबर होती है. घरों में साफ पानी नहीं मिलता और खाना-पीना भी काफी दूषित होता है. इन स्लमों और छोटे घरों में पर्याप्त रोशनी और हवा भी नहीं होती और लोग प्रदूषित वातावरण में रहते हैं.

संक्रमित व्यक्ति भी स्वस्थ व्यक्ति के साथ रहता है. इसलिए ऐसे माहौल में टीबी काफी तेजी से फैलता है. भारत के बड़े शहरों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली आदि शहरों की झुग्गियों में रहने वाले लोगों में टीबी के मामले अधिक रिपोर्ट होते हैं. टीबी फैक्ट्स डॉट ओआरजी वेबसाइट के मुताबिक, ऐसा अनुमान है कि भारत की 40% आबादी अप्रत्यक्ष रूप से टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है लेकिन कोविड महामारी ने टीबी के मामलों में कमी की रफ्तार को बेहद धीमा कर दिया है. कोविड महामारी के आने के बाद अस्पतालों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का सारा ध्यान टीबी से शिफ्ट होकर कोविड पर चला गया. इस दौरान टीबी मरीजों को पर्याप्त जांच और इलाज नहीं मिल पाया. महामारी के समय टीबी के मामले और उससे होने वाली मौतें भी कम रिपोर्ट होने लगीं. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से टीबी 2025 तक खत्म करना नामुमकिन सा है. भारत को पूरी तरह टीबी मुक्त करने के लिए 2025 के बाद भी 5-7 साल और लग सकते हैं.

TB cases increasing rapidly in big cities, 4 lakh 80 thousand deaths are happening every year in India

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