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चीन के खिलाफ भारत की अब तक की सबसे आक्रामक कार्रवाई

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चीन के खिलाफ भारत की अब तक की सबसे आक्रामक कार्रवाई

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भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है, हालात युद्ध जैसे नहीं युद्ध के ही हैं। 30 अगस्त को लद्दाख के पैंगोंग शो झील (Pangong Tso) में LAC पर भारतीय सैनिकों ने उन पहाड़ियों पर नई पोजीशन ली, जिन्हें चीन अपनी सरहद में बताता आया है। नॉर्थ बैंक यानी फिंगर एरिया में चीनी सैनिक अब भी फिंगर- 4 की चोटी पर बैठे हैं । भारतीय और चीनी सैनिक लद्दाख में एक दूसरे से महज 300से 500 मीटर दूर हैं। ब्रिगेड कमांडर स्तर की चुशुल में बातचीत बेनतीजा रही है। अब इसे कूटनीतिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश हो रही है।

विक्स का एक एड आता था – आपको सबसे ज्यादा वो खांसी सताती है जो आपके मुन्ने को आती है। चीन लद्दाख में भारतीय सेना की आक्रामक कार्रवाई से आहत है, PUBG समेत 224 ऐप के भारत में बैन होने से उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, लेकिन भारत की सबसे बड़ी और आज तक भारत चीन रिश्ते में सबसे आक्रामक कार्रवाई वो है जो इंडियन नेवी ने की है। नेवी ने मलक्का खाड़ी से लेकर साउथ चाइना सी में जंगी जहाज भेज कर चीन को सकते में डाल दिया है।

स्रोत

मलक्का की खाड़ी में क्या हो रहा है?

गलवान में भारतीय सैनिकों की शहादत के फौरन बाद,  अंडमान निकोबार से थोड़ी दूर मलक्का की खाड़ी में इंडियन नेवी ने अब तक की सबसे बड़ी और चीन के खिलाफ सबसे आक्रामक कार्रवाई की । यहां नेवी के फ्रंटलाइन वारशिप्स तैनात किए गए । नतीजा… चीनी नौसेना के जंगी जहाज, सबमरीन से लेकर कार्गो शिप तक के लिए ये रास्ता बंद हो गया ।

मलक्का की खाड़ी  क्यों अहम है?

ये भारत के  Andaman Sea (Indian Ocean) को South China Sea (Pacific Ocean) से जोड़ता है

मलक्का की खाड़ी( Strait of Malacca) इंडोनेशिया( Indonesia) मलेशिया (Malaysia) और सिंगापुर( Singapore) के बीच अवस्थित है

व्यापार के नजरिए से इसे गेटवे टू एशिया माना जाता है  

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) से हिन्द महासागर ( Indian Ocean) आने के लिए ये सबसे छोटा रास्ता है

चीन, जापान, साउथ कोरिया और मिडल ईस्ट की सांसें इस खाड़ी में अटकी हैं

हिंद महासागर(Indian ocean) में दाखिल होने के लिए चीन को मलक्का की खाड़ी से गुजरना होता है।

ये भी पढ़ें-
http://sh028.global.temp.domains/~hastagkh/south-china-sea-may-trigger-the-third-world-war/

साउथ चाइना सी में क्या हो रहा है?

दूसरी बड़ी कार्रवाई में  साउथ चाइना सी में भारत ने जंगी जहाज तैनात कर दिए और अब तैयारी यहां एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की है। चीन को डर है कि भारत अमेरिका के साथ मिल कर यहां साझा सैन्य अभ्यास कर सकता है। चीन को लगने लगा है कि भारत साउथ चाइना सी में आक्रामक कार्रवाई के लिए तैयार है। इन जंगी जहाजों पर ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइलें लगी हैं, जिन्हें दुनिया में सबसे घातक anti ship missile माना जाता है।

कूटनीतिक स्तर की हर बातचीत में चीन साउथ चाइना सी में इंडियन नेवी की मौजूदगी को लेकर अपनी बेचैनी का इजहार करता आया है। चीन की जनता में इसकी प्रतिक्रिया से  शी जिनपिंग इस कदर डर गए कि चीनी मीडिया ने 70 दिन से ज्यादा तक इस खबर को नहीं छापा।

चीन को ज्यादा तकलीफ इस बात से है कि साउथ चाइना सी में मौजूद इंडियन नेवी U.S. Navy से secured communication system के जरिए लगातार संपर्क में है, यानी भारतीय जंगी जहाजों को चीनी नेवी की एक –एक हरकत के पल-पल की जानकारी मिल रही है।

चीन के Global Times में नेवी एक्सपर्ट Li Jie के हवाले से कहा गया है-

If the Indian vessel takes any actions to undermine China’s maritime rights or challenge China’s territorial sovereignty, China must expel it or even resort to reasonable collisions. Should the Indian warship further escalate actions, China will have to make contingency plans and deal with it effectively.”

साउथ चाइना सी चीन के लिए क्यों अहम है?

  1. दुनिया के समंदर में गुजरने वाला हर तीसरा जहाज साउथ चाइना सी से हो कर गुजरता है
  2.  सालाना कम से कम 3 ट्रिलियन $ का व्यापार इस रास्ते से होता है
  3.  यहां 28 बिलियन बैरल तेल और 266 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस होने का अनुमान है
  4.  जिस देश का इस रास्ते पर कब्जा होगा, वो एशिया पर राज करेगा

साउथ चाइना सी में चीन ने क्या किया है?

2009 में चीन ने Nine-Dash Line नक्शे के जरिए पूरे साउथ चाइना सी पर अपना दावा पेश किया

इस साल चीनी नेवी ने आक्रामक कार्रवाई करते हुए वियतनाम के एक fishing boat को डुबो दिया, फिलीपीन्स नेवी के एक जहाज को खदेड़ दिया और समंदर में अपने EEZ- exclusive economic zone में तेल निकालने के  मलेशिया की कोशिश को धौंस दिखा कर बंद करवा दिया

2015 में चीन ने  Subi Reef and Thitu Island में फाइटर प्लेन के लिए रनवे और अंडरग्राउंड स्टोरेज तैयार कर लिया। इसके अलावा Fiery Cross Reef और Mischief Reef में रडार केंद्र और मिसाइल शेल्टर तैयार किया है।

पिछले साल जून से यहां चीन लगातार अपने बैलिस्टर मिसाइल का परीक्षण कर रहा है

चीनियों को पहली बार एहसास हुआ है कि चाइना सी में वो किस कदर कमजोर है और इंडियन ओशन का नाम भारत के नाम पर इसलिए रखा गया, क्योंकि यहां भारत के मुकाबिल कोई नहीं।

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