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कोरोना का अंग्रेजी कैसा है?

जरुर पढ़ें संपादकीय

कोरोना का अंग्रेजी कैसा है?

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मर्ज बढ़ता गया…ज्यों..ज्यों दवा की …

देश में लॉकडाउन जब लागू हुआ था, तब कोरोना के मरीजों की तादाद 600 के करीब थी, अब जबकि ये तादाद 74 हजार के पार हो गई है, लॉकडाउन को बिजनेस फ्रेंडली बनाने की बात हो रही है।

दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे सख्त लॉकडाउन धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है, नरम होता जा रहा है। प्रवासी मजदूरों के रिवर्स माइग्रेशन के बाद सरकार ने जिस तरह ताबड़तोड़ पहले  468 श्रमिक स्पेशल, फिर दिल्ली से 15 जगह के लिए स्पेशल ट्रेनें और अब फ्लाइट की मंजूरी दी है, उसके बाद एक तरह से देखा जाए तो लॉकडाउन बस गृह मंत्रालय की फाइल में ही लागू रह गया है। सवाल है क्या कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ये अहम फैसला लेने का सही वक्त है?

#WHO  का कहना है

countries need to be cautious about lifting restrictions.

there had been a “welcome slowing” of epidemics in some European countries – ItalyGermanySpain and France – but there had been an “alarming acceleration” elsewhere including community transmission in 16 countries of Africa.

#WHO का सुझाव है कि किसी तरह की ढील देने से पहले ये देखना जरूरी है कि आपके पास जरूरत भर N-95 मास्क,ग्लब्स, PPE, टेस्ट किट्स, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, आइसोलेशन, क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था हो जाए।

अमेरिका में कोरोना वायरस टास्क फोर्स के मेंबर # Anthony Stephen Fauci  का कहना है

”There is a real risk that you will trigger an outbreak that you may not be able to control,” It not only would cause ”some suffering and death that could be avoided, but could even set you back on the road to try to get economic recovery.”

अमेरिका ने लॉकडाउन हटाने के लिए एक प्रोटोकॉल बनाया है।इसके तहत कोई राज्य तभी लॉकडाउन हटाएगा, जब लगातार 14दिन तक कोरोना के नए केसेज में गिरावट दर्ज हो।

एक मानक टेस्टिंग का भी है। माना जा रहा है कि इकोनॉमी को खोलने से पहले 9 लाख टेस्टिंग रोज का स्तर हासिल करना जरूरी है।

जहां रोक हटी है, वहां क्या हुआ है?

इटली में लॉकडाउन में ढील देने के एक हफ्ते में ही हालात पहले से प्रभावित इलाकों में बेकाबू हो गए। लेबनान में रियायत देने के एक महीने बाद एकाएक केसेज में जबरदस्त तेजी आई। कुछ ऐसा ही अनुभव साउथ कोरिया, जर्मनी और चीन का भी रहा है।

भारत की बड़ी चिंता क्या है?

दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना केसेज में भारत 13वें नंबर पर है,लेकिन एक्टिव केसेज में वो 8वें नंबर पर है।जर्मनी, ईरान, कनाडा में कुल मामले भारत से ज्यादा हैं,लेकिन एक्टिव केसेज कम हैं। मौतों का आंकड़ा भी हमारे यहां तेजी से बढ़ रहा है। अभी हम 75हजार के करीब हैं, अगर रफ्तार यही रही तो अगले एक महीने में कुल संक्रमितों की तादाद दो लाख तक होने की आशंका है।

हेल्थ सेक्टर पर पहले ही बहुत ज्यादा दबाव है, क्या वो  संक्रमितों की इससे और बड़ी तादाद झेल पाएगा?  हेल्थ वर्कर्स के लिए पीपीई, मेडिकल ग्रेड मास्क, जांच के लिए टेस्टिंग किट, मरीजों के लिए आइसोलेशन और क्वारंटीन सेंटर, अस्थायी अस्पताल इस बारे में कोई रोडमैप अगर सरकार के पास है, तो ये अभी का सबसे बड़ा स्टेट सीक्रेट है…क्लासीफाइड इंफार्मेशन है।

हमारी सरकार को उम्मीद है कि विदेश से जो कोरोना म्यूटेट होकर इंडिया आया है वो बिजनेस फ्रेंडली होगा, माइल्ड, एक्सट्रा माइल्ड, सुपर सॉफ्ट वैरिएंट होगा,  वो धारावी और साउथ मुंबई में, लुटयंस और ट्रांस यमुना में फर्क करेगा…ऐसा हुआ तो अत्यंत दुख के साथ सरकार इस सदमे को सह लेगी। हमारे शहर तेजी से फीचर फोन और रिबूक जूतों से मुक्त हो रहे हैं, बस …  उम्मीद है… कोरोना की अंग्रेजी और ज्योग्राफी मजबूत हो।

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