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कोरोना जांच की inside story जो आपको कोई नहीं बताएगा!

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कोरोना जांच की inside story जो आपको कोई नहीं बताएगा!

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि सारे देश में कोरोना जांच की दर एकसमान हो, इस वास्ते व्यवस्था की जाए। इससे पहले 17 मार्च को, ICMR यानी Indian Council of Medical Research ने देश भर के निजी लैब में RT-PCR- real-time polymerase chain reaction जांच के लिए 4,500 की दर तय की थी। साथ ही राज्यों से कहा था कि ये अधिकतम दर है, आप निजी लैब से निगोशिएट कर अपने हिसाब से इससे भी कम दर तय कर सकते हैं। लेकिन ICMR की दर पर ही देश भर में जांच होती रही। शुरूआत में इस जांच के लिए किट और इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल और रीएजेन्ट इम्पोर्ट हो रहे थे, लिहाजा आम लोगों पर कम से कम भार पड़े, इस लिए 4,500 की दर तय की गई थी। लेकिन जल्द ही इसकी तकनीक से लेकर केमिकल तक सब कुछ देश में ही बनने लगा, लिहाजा इस कीमत को और कम किए जाने की संभावना और जरूरत थी, लेकिन निजी लैब मुनाफाखोरी करते रहे। बीते बुधवार को गृह मंत्रालय के आदेश से निजी लैब के लिए जांच की नई दर 2,400 रुपये तय की गई। महाराष्ट्र और तेलंगाना ने निजी लैब के लिए जांच की नई दर 2200 रुपया तय की है। अब लगभग देश के दस राज्यों में ये दर 2200 से 2500 के बीच तय की गई है, जबकि बाकी के राज्यों में ये दर अभी भी  4,500 है।

 ICMR ने इसी हफ्ते antigen-based testing kits की इजाजत दी है। इस तरीके से जांच की कीमत दो हजार से घट कर दो सौ से पांच सौ तक आने की संभावना है।

आपने जांच की कीमत को खबर के नजरिए से समझा, अब सुप्रीम कोर्ट की चिंता को हेल्थ ल़ॉबी की ताकत और उसके रसूख के नजरिए से समझिए।

सुप्रीम कोर्ट ने जब suo moto cognizance लेते हुए कोरोना जांच की दर कम करने को लेकर सुनवाई की, तब केंद्र सरकार का क्या कहना था ये सुनिए

  • Solicitor General Tushar Mehta, appearing for the centre, told the court that some states have been negotiating with various stakeholders to ensure that COVID testing charges are reduced. “We should leave to states. Some states may be discussing even lower rates,” he said.
  • The bench, however, turned down his request and said: “You fix upper limit. States will do rest”.

यानी केंद्र सरकार सस्ती दर पर लोगों की जांच हो, इसके लिए दखल देना नहीं चाहती थी। वो खुद आदेश पारित करना नहीं चाहती थी, वो ये काम राज्यों पर छोड़ना चाहती थी। नतीजा ये होता कि अलग –अलग राज्य में कोरोना जांच की दर मनमाने तौर पर तय होती, फिर उसको लेकर मुकदमेबाजी होती और मरीजों को आखिरकार महंगे जांच के लिए बाध्य होना पड़ता।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील ठुकरा दी और ये साफ कर दिया कि केंद्र सरकार को जांच के लिए अधिकतम दर तय करनी ही होगी। इसके बाद गृह मंत्रालय के आदेश से ये दर 4500 से घटा कर 2500 तय की गई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में कई जगह जैसे मेरठ में निजी लैब्स ने 4500 की जगह 2200 की दर से जांच करने से इनकार कर दिया। ऐसा देश में कई जगहों पर हुआ है।

अब थोड़ा पीछे चलते हैं

तारीख 8 अप्रैल 2020

एडवोकेट शशांक देव की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया

 कोरोना की जांच सरकारी लैब में हो या निजी लैब में ये पूरी तरह से फ्री हो। इसके लिए जरूरी निर्देश तत्काल जारी किए जाएं।

एडवोकेट शशांक ने ICMR के 17 मार्च की उस एडवायजरी के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसके तहत देश भर के  निजी लैब्स में कोरोना जांच के लिए 4500 रुपये की दर तय की गई थी। याचिका में कहा गया था कि ये एडवायजरी नागरिकों में आर्थिक स्थिति के हिसाब से फर्क नहीं करता और इस तरह संविधान की धारा 21 यानी जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है। मतलब ये कि अब अमीर जांच करवा पाएंगे, लेकिन गरीब बगैर जांच के ही मर जाएंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा –

“We find prima facie substance in the submission of petitioner that at this time of national calamity permitting private labs to charge Rs. 4500 for screening and confirmation test of COVID-19 may not be within means of a large part of population of this country and no person be deprived to undergo the COVID-19 test due to non-payment of capped amount of ₹4500,”

कोर्ट ने कहा कि महामारी के मद्देनजर निजी लैब अपनी जिम्मेदारी समझें। कोरोना राष्ट्रीय आपदा है, इस वक्त आप देश हित के लिए काम करें, आपका जो भी खर्च होगा, आगे उसको रिइम्बर्स करने पर सरकार गौर करेगी।

हमारे देश में प्राइवेट डायग्नोस्टिक यानी निजी लैब में जांच करीब  75 हजार करोड़ का कारोबार है।

स्रोत :https://www.biospectrumindia.com/views/70/14454/growing-diagnostics-market-in-india.html

सबसे हालिया रिसर्च  “Indian Diagnostic Services Market Outlook 2020”,  के मुताबिक ये बाजार अगले पांच साल तक हर साल औसतन  27.5% बढ़ने वाला है।

स्रोत : https://www.researchandmarkets.com/reports/3720508/indian-diagnostic-services-market-outlook-2020

फ्री में कोरोना जांच करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हमारे देश  का डायग्नोस्टिक लॉबी सक्रिय हो गया। फैसले के सिर्फ तीन दिन बाद 11 अप्रैल को देश के सबसे महंगे वकीलों की एक पूरी टीम निजी लैब की फरियाद लेकर छुट्टी के दिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।

निजी लैब्स की दलील

  1. अगर सरकार हमें तत्काल उस खर्च की भरपाई करे तो गरीब लोगों की जांच हम फ्री करने को तैयार हैं
  2.  अगर सरकार हमें ₹4500  की दर चार्ज करने की इजाजत नहीं देती, तो हम टेस्टिंग नहीं कर पाएंगे। इससे देश भर में कोरोना का खतरा बहुत बढ़ जाएगा।
  3. हमारी ये हैसियत नहीं है कि हम निशुल्क जांच कर सकें
  4. टेस्टिंग के नजरिए से अगले कुछ हफ्ते बेहद अहम हैं, निजी लैब इसमें बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं
  5. बहुत सारे मरीज, और संदिग्ध मरीज रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी जांच केंद्रों पर पहले ही बहुत ज्यादा दबाव है।
  6.  हम इस जांच को सेवा भाव से ही कर रहे हैं, ब्रिटेन में इस जांच के लिए  $425 यानी ₹32,500 लिया जा रहा है।

देश के सबसे महंगे वकीलों की टीम ने अपनी बात इतने सटीक ढंग से रखी कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल के अपने फैसले में संशोधन किया और निजी लैब्स को 4500 रु शुल्क लेने की इजाजत दी। लेकिन साथ ही अदालत ने ये भी कहा कि ये निजी लैब गरीबों की जांच फ्री में करेंगे। अब अगर आपको कोई ऐसा निजी लैब मिला है जो गरीबों का फ्री में कोरोना टेस्ट कर रहा है तो मुझे भी बताइए।

आपने इस फैसले का कानूनी पहलू समझा, अब इसका कारोबार पर असर सिर्फ एक मिसाल से  समझिए।

स्रोत : https://www.forbes.com/sites/anuraghunathan/2020/05/07/indian-doctor-becomes-a-billionaire-amid-coronavirus-pandemic/#4e660daf4578

मार्च में फोर्ब्स ने भारतीय  की लिस्ट जारी की थी, तब इसमें एक नाम नहीं था, लेकिन 17 मार्च को ICMR की ओर से निजी लैब को कोरोना जांच की इजाजत मिलने के बाद अगले महीने अप्रैल में जब फोर्ब्स ने भारत के डॉलर बिलियनायर की नई लिस्ट जारी की तो इस लिस्ट में एक नया नाम जुड़ गया।

ये नाम है Dr Lal PathLabs के मालिक Arvind Lal का। Dr Lal PathLabs की स्थापना 1949 में हुई, 1977 से अरविंद लाल इसका काम देख रहे थे, लेकिन जो तरक्की इस कंपनी ने बीते 43 साल में नहीं की थी, वो एक महीने में कर ली। पिछले साल इनकी कंपनी का कुल कारोबार सिर्फ 174 मिलियन डॉलर था, इस साल अप्रैल में फोर्ब्स ने अरविंद लाल की निजी आय ही एक बिलियन डॉलर यानी करीब 7500 करोड़ से ज्यादा आंकी है।

अब तक हमने आपको अदालत के फैसले का कानूनी और कारोबारी पहलू बताया । अब इस आने वाले वक्त में गरीब जनता पर पड़ने वाले बोझ  के नजरिए से समझिए।

लैन्सेट में कोरोना को लेकर एक नई रिसर्च प्रकाशित हुई है।

लैन्सेट के रिसर्च में क्या है ?

दुनिया की 22% यानी 1·7 बिलियन आबादी को कोरोना होने का अंदेशा है।यानी दुनिया में हर पांच में एक शख्स को कोरोना होने की आशंका है। ये खतरा 70 साल से ज्यादा उम्र वालों को 66% है तो 20 साल से कम उम्र के लोगों को कोरोना होने का अंदेशा महज 5% है। अनुमान है कि दुनिया की 4% आबादी को जानलेवा कोरोना होने का बेहद गंभीर खतरा है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को कोरोना होने का खतरा दोगुना ज्यादा है। जिस देश की आबादी कम युवा है और जहां डायबिटीज या एचआईवी के मरीज ज्यादा हैं, वहां ये खतरा ज्यादा है।

भारत के नजरिए से इसका मतलब ये है कि हमारे देश में अगर दुनिया का औसत यानी 4% को जानलेवा कोरोना का अंदेशा है तो इसका मतलब है कि हमारे देश में करीब 5.2 करोड़ लोगों को सेफ्टी नेट चाहिए।

सवाल है कोरोना काल में निजी अस्पताल , निजी लैब और प्रेस्क्रिप्शन मेडिसीन की बेहद शक्तिशाली लॉबी से लोहा लेने की ताकत और हिम्मत क्या हमारे देश के हुक्मरानों में है?

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