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दवा के इतिहास में सबसे बड़े मुनाफे की कहानी क्या आपने सुनी है?

कोरोना जरुर पढ़ें

दवा के इतिहास में सबसे बड़े मुनाफे की कहानी क्या आपने सुनी है?

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एक कहानी है जो अभी लिखी जा रही है, सुनाई नहीं गई है

ये कहानी है मौत के खौफ में… मुनाफे के तलाश की

कभी सुना है ऐसा बिजनेस…जिसमें 750 रुपया लगाने पर एक लाख का शुद्ध मुनाफा होता हो।

ये बिजनेस है कोरोना की दवा का। कोरोना देश और दुनिया के लिए आपदा है, लेकिन दवा कंपनियों के लिए अवसर।

Glenmark pharma  favipiravir का जेनेरिक वर्जन FabiFlu नाम से लाई है।  200mg के एक टैबलेट की कीमत है 103 रुपया। 14 दिन के फुल कोर्स में इसे पहले दिन 1,800 mg दो बार और बाकी के 13 दिन 800 mg दो बार देना है। इस तरह एक मरीज के लिए दवा का कुल खर्च है 82,500 रुपया।  

ग्लेनमार्क की ये दवा उन मरीजों के लिए है, जिन्हें कोरोना है, लेकिन उन्हें कोई गंभीर परेशानी जैसे सांस लेने में तकलीफ नहीं हो रही है।  

 Hetero ने Remdesivir का जेनेरिक वर्सन COVIFOR का 100mg का इंजेक्शन वायल बाजार में उतारा है। एक इंजेक्शन की कीमत है 5400 रुपया। अभी ये दवा कोविड अस्पतालों में मिल रही है,जल्द ही मेडिकल स्टोर्स में भी मिलने लगेगी। Cipla ने भी अमेरिकी कंपनी Gilead Sciences से इस दवा को भारत में बनाने का लाइसेंस हासिल किया है। सिपला की दवा पांच हजार से कुछ कम में उपलब्ध होगी। रेमेडेसिविर गंभीर मरीजों को दिया जाने वाला इंजेक्शन है। दस दिन के कोर्स के लिए एक दिन में दो बार देने पर मरीज के लिए इस इंजेक्शन का कुल खर्च होगा करीब एक लाख रुपये।

क्या है remdesivir?

Remdesivir (GS-5734™) इंजेक्शन है, जो  अमेरिकी दवा कंपनी Gilead Sciences ने डेवलप की है। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए इसे कारगर बताया जा रहा है।

स्रोत: –https://www.remdesivir.com/us/?gclid=CjwKCAjwltH3BRB6EiwAhj0IUNnkaVuty5pZtqLyH_YLGjM1Ser2VZUXNh9iJRs9-BG8JPtOJAqIWRoC7fUQAvD_BwE&gclsrc=aw.ds

कोरोना के गंभीर मरीज कौन हैं?

patients with an oxygen saturation (SpO2) ≤94% on room air or requiring supplemental oxygen, mechanical ventilation, and/or extracorporeal membrane oxygenation (ECMO)

यानी गंभीर मरीज वो हैं जिन्हें अलग से ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है।

 लाख रुपये की ये दवा कितने काम की है?

  • ये एक investigational drug है जिसे दवा के तौर पर अब तक मंजूरी नहीं मिली है
  • अभी हम नहीं जानते कि ये दवा कितनी कारगर है, न ही ये कि ये कितनी सुरक्षित है ?
  • इसे सिर्फ इमरजेंसी मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है
  • अमेरिका में  National Institute of Allergy and Infectious Diseases  के मुताबिक कोविड 19 मरीज को अगर कोई दवा न दी जाए तो भी वो 15 दिन में खुद ही ठीक हो जाते हैं, वहीं remdesivir देने से वो चार दिन पहले यानी 11 दिन में ठीक हो जाते हैं। प्रतिशत के तौर पर remdesivir के मरीज को placebo यानी बगैर दवा वाले मरीज के मुकाबले महज तीन फीसदी का survival benefit है।

 कोरोना की दवा का अर्थशास्त्र

अमेरिका में गिलीड कंपनी 15 लाख वायल मुफ्त में अस्पतालों को  दे रही है।  Institute for Clinical and Economic Review (ICER)  ने इस इंजेक्शन के एक कोर्स यानी 20 वायल के लिए $5,080 यानी करीब 3.75 लाख रुपया तय किया है। ये जिस समूह की दवा है, उस ग्रुप की दूसरी दवाओं के मुकाबले ये कीमत करीब पचास गुना ज्यादा है।

Journal of Virus Eradication की स्टडी से पता चला है कि इस इंजेक्शन का एक वायल बनाने में महज 93 सेंट का खर्च आता है। ICER report में कहा गया है कि अगर इसका वास्तविक खर्च देखा जाए और 50% मुनाफा जोड़ लें तो दस दिन के इंजेक्शन कोर्स के लिए पूरी कीमत $10 यानी 750 के करीब होनी चाहिए।

गिलीड की ही एक स्टडी में दावा किया गया है कि ये इंजेक्शन दस दिन तक चलाया जाना जरूरी नहीं है, इसका पांच दिन का कोर्स भी उतना ही कारगर है, जितना दस दिन का। यानी न सिर्फ इसे हजारों गुना महंगा बेचा जा रहा है, बल्कि इस मंहगे इंजेक्शन को, जरूरत से दोगुना खरीदने की सलाह भी मरीजों को दी जा रही है।

खास बात ये है कि गिलीड ने ये दवा hepatitis C के लिए बनाई थी, जिसमें ये दवा कारगर नहीं रही, फिर इसे इबोला का रामबाण बताया गया, वहां भी ये नाकाम रही, अब इसे कोरोना का शर्तिया इलाज बताया जा रहा है और गिलीड कंपनी बगैर कोई नया R&D किए, अपनी पुरानी दवा के लिए बेहिसाब कीमत वसूलने की तैयारी कर रही है।

गिलीड का इतिहास

अमेरिका के कैलिफोर्निया में मौजूद बायोटेक कंपनी गिलीड पहले भी अपनी नई दवाओं के लिए बहुत बड़ी कीमत वसूलने को लेकर बदनाम रही है। कंपनी ने 2013 में हेपाटाइटिस सी की दवा Sovaldi के एक कोर्स की कीमत $84,000 यानी करीब 60 लाख रुपये रखी थी। इसी तरह HIV की दवा Truvada के एक कोर्स की कीमत $22,000 यानी 16 लाख रुपये रखी थी।

एक अनुमान के मुताबिक रेमेडेसिविर दवा से गिलीड को इस साल सिर्फ अमेरिका से $27 बिलियन यानी करीब सवा दो लाख करोड़ का मुनाफा होगा। ये अनुमान तब है जबकि अमेरिका में 32 लाख लोगों को कोरोना होने का अनुमान किया गया है।

अमेरिका में रेमडेसिविर इंजेक्शन से गिलीड कंपनी को होने वाले मुनाफे का अनुमान

 

लांसेट की रिसर्च में भारत के लिए ये अनुमान आबादी का 4% यानी करीब पांच करोड़ का है। यानी भारत से गिलीड की संभावित आमदनी 500 से 600 बिलियन $ होने का अनुमान है।

कोरोना… गिलीड के लिए दवा के इतिहास में सबसे बड़े मुनाफे की कहानी साबित होने वाला है। महज तीन फीसदी ज्यादा कारगर इंजेक्शन के लिए ये सौदा बुरा नहीं है।

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