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दिल्‍ली में नहीं होगा ‘बिजली संकट’ !

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दिल्‍ली में नहीं होगा ‘बिजली संकट’ !

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्‍होंने आरोप लगाया कि केंद्र यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि देश में ‘कोयला संकट’ है. वहीं, सिसोदिया ने कोयला संकट (Coal Shortage) को कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान रहे ‘ऑक्सीजन संकट’ जैसा बताया है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि हर समस्या के प्रति आंखें मूंद लेने की केंद्र की नीति देश के लिए घातक हो सकती है. वहीं, भाजपा (BJP) ने पलटवार करते हुए दिल्‍ली सरकार पर लोगों को डराने का आरोप लगाया है.

मनीष सिसोदिया का बयान कोयला मंत्रालय के यह कहने के बाद आया है कि विद्युत उत्पादन संयंत्रों की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध है. साथ ही मंत्रालय ने बिजली आपूर्ति में व्यवधान आने की आशंका को पूरी तरह से गुमराह करने वाला करार देते हुए खारिज कर दिया. बिजली मंत्रालय ने यह भी कहा कि 9 अक्टूबर को सभी स्रोतों से कुल 19.2 लाख टन कोयला भेजा गया, जो कुल खपत 18.7 लाख टन से अधिक है.

इसके अलावा सिसोदिया ने कहा कि केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने कहा कि कोयला संकट नहीं है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को पत्र नहीं लिखना चाहिए था. यह दुखद है कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ने इस तरह का गैर जिम्मेदाराना रुख अपनाया है. आप नेता ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार संकट से ‘दूर भागने’ के लिए बहाने बना रही है.

सिसोदिया ने मौजूदा स्थिति की तुलना अप्रैल-मई से की. उन्होंने कहा कि उस वक्त राज्यों और चिकित्सकों ने कहा था कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी है, लेकिन केंद्र ने स्वीकार नहीं किया था कि ऐसा कोई संकट है. दिल्‍ली उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उसने (केंद्र ने) उस वक्त भी यही चीज की थी, जब देश ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा था. उसने यह स्वीकार नहीं किया था कि ऐसा कोई संकट है.

कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को ट्वीट किया, ‘देश में कोयला उत्पादन एवं आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की है. हर किसी को आश्वस्त करता हूं कि बिजली आपूर्ति में व्यवधान आने का कोई खतरा नहीं है. कोल इंडिया लिमिटेड के पास 4.3 करोड़ टन कोयले का पर्याप्त भंडार है, जो 24 दिनों के लिए कोयले की मांग के बराबर है.’

There will be no ‘electricity crisis’ in Delhi!

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