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क्या थाली में छेद कर रहे हैं रवि किशन?

जरुर पढ़ें मनोरंजन संपादकीय

क्या थाली में छेद कर रहे हैं रवि किशन?

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who is right- jaya of ravi kishan?

राज्यसभा में सांसद रवि किशन (Ravi Kishan) के बयान को लेकर जया बच्चन (Jaya Bachchan) के जोरदार जवाब से एक नया विवाद पैदा हो गया है…जो बॉलीवुड से शुरु होकर राजनीतिक मंचों तक पहुंच चुका है। फिल्म इंडस्ट्री की बात करें तो एक तरफ रवि किशन (Ravi Kishan) के समर्थक हैं..तो दूसरी तरफ जया बच्चन के। वहीं राजनीति के नजरिये से देखें तो मोदी-समर्थक… रवि किशन (Ravi Kishan) के पक्ष में खड़े हो गये हैं और मोदी-विरोधी जया बच्चन के समर्थन में। अब दोनों पक्षों में जोरदार ट्वीटर-वॉर शुरु हो गया है। मामला इतना बढ़ गया है कि मुंबई में जया बच्चन के घर के बाहर एहतियातन सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

कैसे शुरु हुआ विवाद?

राज्यसभा में बीजेपी सांसद रवि किशन (Ravi Kishan) ने फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के फैलते कारोबार का मुद्दा उठाया था और कहा था कि ड्रग्स की लत (Drug Addiction) का शिकार बॉलीवुड भी है। इस पर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने तीखी प्रतिक्रिया जताई और कहा, “कुछ लोगों की वजह से, आप पूरी इंडस्ट्री की छवि खराब नहीं कर सकते। मुझे कल बहुत बुरा लगा जब लोकसभा के एक सदस्य जो खुद इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते हैं, ने फिल्म इंडस्ट्री के बारे में खराब बोला। जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं।”

समर्थन में उतरी कई हस्तियां

जया बच्चन (Jaya Bachchan) के बयान के कई लोगों ने तारीफ की…खास तौर पर बॉलीवुड से जुड़े लोगों ने। इनमें अनुभव सिन्हा, सोनम कपूर, दिया मिर्जा, तापसी पन्नू, ऋचा चड्ढा, फरहान अख्तर और कई कलाकार शामिल हैं।

जया बच्चन के बयान को राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में जया बच्चन की तारीफ की है और कहा है कि वह अपने बेबाकी और सच बोलने के लिए प्रसिद्ध हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत नो भी खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि जया बच्चन का बयान बिल्कुल ठीक है।

विरोध के सुर भी तीखे

जया बच्चन (Jaya Bachchan) के बयान पर सबसे ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की अभिनेत्री कंगना रनौत ने। पहले तो उन्होंने सीधे तौर पर बच्चन परिवार के सदस्यों को इस विवाद में घसीटा और ट्वीट किया – “जया जी क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर मेरी जगह आपकी बेटी श्‍वेता को टीनएज में पीटा गया होता, ड्रग्‍स दिए गए होते और शोषण होता? क्‍या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार बुलींग और शोषण की बात करते?” उसके बाद भी कंगना लगातार ट्वीटर पर सक्रिय हैं और हर बात का जवाब दे रही हैं। सबसे ताजा नमूना नीचे दिया गया है।

बेकार है ये बहस?

जब रवि किशन (Ravi Kishan) ने ये कहा कि बॉलीवुड भी ड्रग्स का शिकार होता जा रहा है, तो जाहिर है उनका मतलब इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों से नहीं था। उनका इशारा रिया चक्रवर्ती और उनसे जुड़े संदिग्ध युवा कलाकारों से था, जो नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। और ये एक ऐसी सच्चाई है जिससे इंडस्ट्री के लोग मुंह नहीं मोड़ सकते।

वहीं जब जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने ये कहा कि इंडस्ट्री को बदनाम ना करें, तो उनका मतलब ये था कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें, जो फंसेंगे उनको तो सज़ा मिलेगी ही, लेकिन हर जगह ये शोर मचाने से…कि बॉलीवुड में ड्रग्स का धंधा फैल रहा है….नाहक बॉलीवुड के बारे में गलत छवि बनेगी। कम से कम इंडस्ट्री के लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए।

अब दोनों ही सांसदों ने अपनी-अपनी पार्टी की नीतियों के मुताबिक राजनीतिक लाइन पकड़ी और बयान देने में अति-उत्साह दिखाया। यही वजह है कि बहस का फोकस मुद्दे से हटकर बयानबाजी पर केन्द्रित हो गया है। दोनों के समर्थक आंख मूंदे ट्वीट करने और जवाब देने में जुटे हैं। जनता को बैठे-बिठाये मनोरंजन का सामान मिल गया है।

क्या था असली मुद्दा?

बहस और चर्चा होनी चाहिए, सवाल भी जरुर उठाये जाने चाहिए…। पूछा ये जाना चाहिए कि क्या किसी आईपीएस को पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने का हक़ नहीं है? क्या ये अपनी थाली में छेद करना है? क्या किसी अधिकारी को अपने विभाग में चल रही गड़बड़ियों को सामने लाने या जांच की मांग करने का हक़ नहीं है? क्या ये विभाग को बदनाम करने की साजिश है? क्या आप किसी को इस दलील से रोक सकते हैं कि मैंने तुम्हें रोटी दी (चाहे जिस कीमत पर), इसलिए तुम मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकते???

जब आप नेताओं को भ्रष्ट बोलते हो, तो क्या ये नेहरु, गांधी और तमाम राजनेताओं का अपमान होता है? क्या देश के लोगों को अपने देश की कुव्यवस्था पर सवाल उठाने का हक़ नहीं है? क्या ये देश के साथ गद्दारी है? क्या ये वही सवाल नहीं हैं, जो मोदी सरकार के खिलाफ आज़ादी का नारा बुलंद करनेवाले लोग उठाते रहे हैं? अगर बॉलीवुड में किसी को लगता है कि यहां शोषण है, ड्रग्स है, निपोटिज्म है… तो इस पर सवाल खड़े करना गलत कैसे है?

जैसे शिवसेना या उसकी सरकार पर सवाल उठाने का मतलब महाराष्ट्र या मुंबई का अपमान नहीं है, उसी तरह बॉलीवुड में ड्रग्स के फैलते कारोबार पर सवाल उठाने का मतलब ये नहीं है कि इससे देवानंद, धर्मेन्द्र और राज कपूर समेत तमाम बॉलीवुड की बेइज्जती की जा रही है।

क्यों जरुरी है ट्वीटर-वॉर?

वैसे मेरे विचार से रवि किशन (Ravi Kishan) का बयान या जया बच्चन का जवाब सिर्फ एक बहाना है। इस विवाद के बढ़ने की मुख्य वजह तो ये है कि कोरोना महामारी के दौर में लोगों के पास फालतू टाइम बहुत है, और खुद को बिजी रखने के लिए या अपनी पहचान जिंदा रखने के लिए इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं। वैसे भी ये दौर सोशल मार्केटिंग का है…..और आपने तो सुना ही होगा – ‘बदनाम भी होंगे..तो क्या नाम ना होगा?’

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